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छत्तीसगढ़: नक्सलियों ने बीजापुर से अपहृत पुलिस अधिकारी की हत्या की

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने अपहृत पुलिस अधिकारी मुरली ताती के शव के पास एक पर्चा भी रखा था, जिसमें ताती को जन अदालत में सजा दिए जाने की बात कही गई है. बीते 21 अप्रैल को नक्सलियों ने बीजापुर ज़िले के पालनार क्षेत्र से मुरली ताती का अपहरण कर लिया था. पालनार ताती का गृह ग्राम है. वह बस्तर ज़िले के जगदलपुर में तैनात थे.

छत्तीसगढ़ में सुकमा-बीजापुर जिले की सीमा पर नक्सली हमले के बाद जवानों के शवों की तलाश जारी है. (फोटो साभार: एएनआई)

(फाइल फोटो: एएनआई)

बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से अपहृत एक पुलिस अधिकारी की नक्सलियों ने हत्या कर दी है. पुलिस ने यह जानकारी दी.

बीजापुर जिले के पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि जिले के पालनार क्षेत्र से 21 अप्रैल को अगवा किए गए पुलिस उप निरीक्षक मुरली ताती की नक्सलियों ने धारदार हथियार से हत्या कर दी तथा शव को सड़क किनारे फेंक दिया.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नक्सलियों ने अपहृत पुलिस अधिकारी मुरली ताती की हत्या कर शव गंगालूर क्षेत्र के पुलशुम पारा में फेंक दिया है. जानकारी के बाद पुलिस दल को रवाना किया गया तथा शव को बरामद किया गया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.

उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने शव के करीब एक पर्चा भी रखा था, जिसमें ताती को जन अदालत में सजा दिए जाने की बात कही गई है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की 21 तारीख को नक्सलियों ने बीजापुर जिले के पालनार क्षेत्र से मुरली ताती का अपहरण कर लिया था. पालनार ताती का गृह ग्राम है. वह बस्तर जिले के जगदलपुर में तैनात थे.

ताती के परिजनों के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान थे, जिसकी वजह से पिछले दो माह से कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए थे.

मालूम हो कि राज्य के नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में इस महीने की तीन तारीख को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सुरक्षा बलों के 22 जवानों की मृत्यु हो गई थी तथा 31 अन्य जवान घायल हो गए थे.

इसके बाद कहा गया कि नक्सलियों ने 210वीं बटालियन के कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को बंधक बना लिया.

उनकी रिहाई के लिए नक्सलियों ने कुछ शर्तें रखी थीं, जिसके बाद सरकार ने दो सदस्यीय टीम का गठन किया था, जिनके जिम्मे नक्सलियों से बातचीत कर राकेश्वर सिंह की रिहाई की जिम्मेदारी थी. हालांकि, बाद में नक्सलियों ने राकेश्वर सिंह को बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया था.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)