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हम अमेरिकी कंपनी हैं इसलिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है: ट्विटर

केंद्र के नए आईटी नियमों का पालन न करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दाख़िल एक याचिका के जवाब में हलफ़नामा दाख़िल कर ट्विटर ने बताया कि वह नए नियमों के तहत एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक अंतरिम स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति के ‘अंतिम चरण’ में है. कंपनी ने यह भी कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म के ज़रिये प्रसारित होने वाली सामग्रियों को न तो शुरू करने वाला है और न ही उनका प्रकाशक है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: ट्विटर ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि वह नए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक अंतरिम स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति के ‘अंतिम चरण’ में है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, ट्विटर ने यह भी तर्क दिया है कि अनुच्छेद 226 के तहत इसके खिलाफ एक रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह अमेरिका में पंजीकृत एक कंपनी है और वह अपने संचार सेवा या प्लेटफॉर्म के जरिये प्रसारित होने वाली सामग्रियों को न तो शुरू करने वाला है (बनाने वाला) और न ही उनका प्रकाशक है.

वकील अमित आचार्य ने अपनी याचिका में दावा किया था कि ट्विटर केंद्र के नए आईटी नियमों का पालन नहीं कर रहा है.

आचार्य की याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में ट्विटर ने कहा है कि भारतीय प्रयोक्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों को एक शिकायत निवारण अधिकारी देख रहे हैं.

ट्विटर ने यह भी कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्‍थानों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत वह ‘महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यवर्ती संस्थान’ की परिभाषा में आ सकता है.

यह नियम सोशल मीडिया मंचों समेत साइबर जगत में विषय वस्तु के प्रसार और प्रकाशन का नियमन करता है. केंद्र सरकार ने फरवरी में इसे अधिसूचित किया था.

ट्विटर ने कहा कि नए आईटी नियमों के नियम 3 (2) और नियम 4 (1) (सी) का ‘समुचित अनुपालन’ करते हुए उसने एक अंतरिम स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की.

ट्विटर ने कहा कि हालांकि, व्यवस्था को पूरी तरह से औपचारिक रूप देने के लिए कदम उठाए जाने से पहले स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी ने 21 जून को अपना नाम वापस ले लिया. साथ ही कंपनी ने इस बात से इनकार किया कि उसने मध्यवर्ती संस्थानों के लिए दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है.

ट्विटर ने कहा, ‘समझौते को पूरी तरह से औपचारिक रूप देने के लिए कदम उठाए जाने से पहले, अंतरिम स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी ने 21 जून को अपना नाम वापस ले लिया. इसलिए, प्रतिवादी (ट्विटर) उनके स्थान पर नियुक्ति के अंतिम चरण में है, जबकि इस बीच शिकायत अधिकारी द्वारा भारतीय उपयोगकर्ताओं की शिकायतों का समाधान किया जा रहा है.’

ट्विटर ने अपने हलफनामे में कहा है, ‘इसके अलावा, प्रतिवादी एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति के अंतिम चरण में है.’

अधिवक्ता आकाश वाजपेयी और मनीष कुमार के जरिये दाखिल याचिका में आचार्य ने कहा कि उन्हें कथित तौर पर गैर-अनुपालन के बारे में तब पता चला जब उन्होंने कुछ ट्वीट्स के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का प्रयास किया.

ट्विटर ने दलील दी है कि अर्जी एक रिट याचिका के रूप में टिकने योग्य नहीं है और आचार्य ने नियमों के तहत अपनी शिकायत के निवारण की प्रतीक्षा किए बिना ‘समय से पहले’ अदालत का रुख किया.

आचार्य के पास विचाराधीन ट्वीट के संबंध में शिकायत करने का कोई अधिकार नहीं था और उन्होंने बताया कि शिकायत पर अब विचार किया गया है और उसका निपटारा कर दिया गया है.

बता दें कि अदालत ने 31 मई को ट्विटर को रिकॉर्ड पर यह बताने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था कि उसने एक स्थानीय शिकायत अधिकारी नियुक्त किया है और कहा कि अगर उन्हें रोका नहीं गया है तो उसे इसका पालन करना होगा.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)