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बंगाल: मुकुल रॉय की पीएसी नियुक्ति के ख़िलाफ़ आठ भाजपा विधायकों का सदन समितियों से इस्तीफ़ा

भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद हाल में सत्तारूढ़ टीएमसी में लौटे वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को बीते नौ जुलाई को लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है. भाजपा के विधायकों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है.

मुकुल रॉय की पीएसी में नियुक्ति के खिलाफ आठ भाजपा विधायकों ने विधानसभा समितियों से इस्तीफा दिया. (फोटो: पीटीआई)

कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ विधायकों ने विधायक मुकुल रॉय की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के विरोध में मंगलवार को विधानसभा की विभिन्न समितियों के प्रमुखों के रूप में इस्तीफा दे दिया.

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने रॉय की पदोन्नति पर आपत्ति जताते हुए तर्क दिया कि विधायक, जो पिछले महीने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चले गए थे, उन्हें भाजपा का विधायक नहीं माना जा सकता.

परिपाटी के अनुसार, मुख्य विपक्षी दल के विधायक को पीएसी अध्यक्ष बनाया जाता है और रॉय ने पार्टी बदलने के बावजूद सदन में भाजपा विधायक के रूप में पद नहीं छोड़ा है.

इस्तीफा देने वाले इन आठ विधायकों में – मिहिर गोस्वामी (चेयरमैन एस्टिमेट), मोनोज तिग्गा (चेयरमैन लेबर), कृष्णा कल्याणी (चेयरमैन पावर और गैर-पारंपरिक ऊर्जा), निखिल रंजन डे (चेयरमैन मत्स्य पालन), बिष्णु प्रसाद शर्मा (चेयरमैन पीडब्ल्यू और पीएचई), दीपक बर्मन (चेयरमैन सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा), अशोक कीर्तनिया (चेयरमैन अधीनस्थ विधानमंडल) और आनंदमय बर्मन (चेयरमैन पेपर्स लेड ऑन द टेबल) शामिल हैं.

भाजपा के विधायकों में से एक मनोज तिग्गा ने एक स्थायी समिति से इस्तीफा देने के बाद कहा, ‘रॉय की नियुक्ति अलोकतांत्रिक और पक्षपातपूर्ण राजनीति का नग्न प्रदर्शन है. इसके विरोध में हमने पद छोड़ने का फैसला किया है.’

अधिकारी के नेतृत्व में मिहिर गोस्वामी, भीष्म प्रसाद शर्मा और तिग्गा सहित आठ विधायक बाद में राज्यपाल जगदीप धनखड़ को ‘सत्तारूढ़ दल द्वारा लोकतांत्रिक मानदंडों के घोर उल्लंघन’ से अवगत कराने के लिए राजभवन गए.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अधिकारी ने राज्यपाल से कहा कि सत्तारूढ़ दल ने मुख्य विपक्षी दल के एक विधायक को पीएसी का अध्यक्ष नियुक्त न करके सुस्थापित परंपरा का पालन नहीं किया, जो सरकार के खातों का ऑडिट करती है.

उन्होंने बताया कि भाजपा ने पैनल को नामांकन के लिए छह विधायकों की सूची थी जिसमें मुकुल राय का नाम नहीं था.

अधिकारी ने कहा, ‘सत्तारूढ़ दल नहीं चाहता कि विपक्ष को उसके खातों में विसंगतियों के बारे में पता चले. इसलिए उन्होंने इस पद के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का चयन किया जो सत्ताधारी दल में शामिल हो गया.’

धनखड़ से मुलाकात के बाद अधिकारी ने कहा कि भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में वापसी करने वाले राय को विपक्षी दल का सदस्य नहीं माना जाना चाहिए.

बैठक के तुरंत बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ट्वीट किया, ‘विपक्ष के नेता शुभेंद्रु अधिकारी के नेतृत्व में विपक्षी विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज शाम 4 बजे राजभवन कोलकाता में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की. विपक्ष के नेता ने पीएसी अध्यक्ष से संबंधित अनियमितताओं के संबंध में एक आवेदन दिया.’

इस बीच, सदन में तृणमूल कांग्रेस के उप मुख्य सचेतक तापस रॉय ने कहा कि यह भाजपा का फैसला था और वह उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे.

उन्होंने कहा, ‘किसी भी विधानसभा समिति के लिए नियुक्तियों को अध्यक्ष के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए, जिन्होंने इस मामले में नियम का पालन किया. यह ध्यान में रखना होगा कि भाजपा सत्ता पर कब्जा करने के लिए पूरे देश में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को गिराने की साजिश रच रही थी. उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है.’

गौरतलब है कि मुकुल रॉय को पीएसी का प्रमुख बनाए जाने के बाद नौ जुलाई को भाजपा विधायकों ने विधानसभा में बहिर्गमन किया था.

कृष्णनगर उत्तर से आधिकारिक रूप से भाजपा के विधायक रॉय पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे. हालांकि उन्होंने भाजपा के कई बार कहने के बावजूद विधानसभा से इस्तीफा नहीं दिया था. रॉय को जून में निर्विरोध पीएसी के 20 सदस्यों में एक चुना गया था.

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में 41 समितियां हैं और पीएसी सदन की लेखा संबंधी निगरानी रखती है. सदन में वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक पारित होने के बाद पीएसी प्रमुख की नियुक्ति की घोषणा की गई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)