कोविड-19

कोविड टीकाकरण में आई 60 फीसदी की कमी, कई राज्यों ने कहा- नहीं बचीं खुराक

साल के अंत तक सभी भारतीय वयस्कों को पूरी तरह से कोविड टीका लगाने की केंद्र की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए हर दिन कम से कम अस्सी लाख खुराक दी जानी है. हालांकि, खुराक की कमी के कारण कई राज्यों को टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा है.

24 मई 2021 को दिल्ली का एक टीकाकरण केंद्र. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: 21 जून के बाद देखी गई टीकाकरण की साप्ताहिक गति घटकर लगभग 60 फीसदी रह गई है. सुस्ती के परिणामस्वरूप कई राज्यों ने कमी और मांग को पूरा करने में असमर्थता की शिकायत की है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, नई नीति के पहले दिन 21 जून को करीब 91 लाख खुराकें दी गईं और 27 जून तक करीब 4 करोड़ खुराक दी गईं.

5 जुलाई से 11 जुलाई की अवधि में केवल 2.3 करोड़ खुराक का वितरण किया गया है. जनवरी में शुरू हुए अभियान के बाद से अब तक लगभग 38 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं.

21 जून के बाद से प्रतिदिन 60 लाख वैक्सीन का नियम था. हालांकि, आखिरी बार भारत ने यह आंकड़ा 3 जुलाई को पार किया था.

साल के अंत तक सभी भारतीय वयस्कों को पूरी तरह से टीका लगाने की केंद्र की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए, हर दिन कम से कम अस्सी लाख खुराक दी जानी है.

खुराक की कमी के कारण कई राज्यों को टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा है.

हमें 10 करोड़ खुराकों की आवश्यकता है: तमिलनाडु

तमिलनाडु के चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री मा. सुब्रमणियन ने कहा, ‘हमारे पास 3,96,750 खुराक हैं. यह निश्चित रूप से पर्याप्त नहीं है. हमें लगभग 11.5 करोड़ खुराक की जरूरत है लेकिन हमें 1.67 करोड़ खुराक मिली हैं. हमें 10 करोड़ और खुराक की जरूरत है. सरकार अधिक टीके प्राप्त करने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है.’

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से कहा कि राज्य को उसकी जनसंख्या के अनुपात में कोविड-19 रोधी टीके की पर्याप्त खुराक नहीं मिली है जिससे टीके की कमी हो गई है. इसके साथ ही स्टालिन ने टीके की एक करोड़ खुराक की मांग की.

तमिलनाडु को आठ जुलाई 2021 तक, 18 से 44 आयु वर्ग के लिए केंद्र से टीके की 29,18,110 खुराक और 45 वर्ष की आयु से अधिक के लाभार्थियों के लिए 1,30,08,440 खुराक मिल चुकी है.

टीकाकरण केंद्र बंद रहना या फिर कई जगहों पर टीकों के लिए लोगों की लंबी कतार लगना आम बात हो गई है. तमिलनाडु को अब तक दो टीकों की 1.67 करोड़ खुराक मिल चुकी है, जबकि 1.66 करोड़ की खुराक दी जा चुकी है.

महाराष्ट्र ने अब तक 3.7 करोड़ खुराकें दी हैं. राज्य सरकार ने दावा किया है कि उसके पास एक दिन में 15 लाख खुराक देने की क्षमता है. स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि पिछले सप्ताह 70 लाख खुराक आ गई थी, लेकिन केवल तीन दिनों में समाप्त हो गई. राज्य विधानसभा ने हाल ही में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें केंद्र से अगले तीन महीनों के लिए प्रति माह 3 करोड़ खुराक की मांग की गई थी.

अब तक, मुंबई की 18 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 47 फीसदी आबादी को पहली खुराक दी गई है, जबकि 25 फीसदी से अधिक को दोनों खुराक दी गई हैं. कुल 60 लाख व्यक्तियों (पहली और दूसरी खुराक दोनों) ने टीका लिया है.

बीएमसी अधिकारियों ने कहा है कि उनके पास प्रतिदिन 1,00,000 खुराक देने की क्षमता है, लेकिन टीकों की कमी के कारण नगर निकाय उस कोटे का 50 निकाय भी पूरा करने में असमर्थ है.

कर्नाटक में केवल पहली खुराक पाने वालों और पूरी तरह से टीकाकृत लोगों के बीच अंतर बढ़ गया है जिसमें पूरी तरह से 23 फीसदी लोगों को टीकाकृत किया जा चुका है. राज्य स्वास्थ्य आयुक्त केवी त्रिलोक चंद्रा ने मई में शुरू की गई कोविशील्ड की दो खुराक के बीच 12-16 सप्ताह के अंतराल के लिए पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों के कम प्रतिशत को जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में टीकाकरण का एक बड़ा हिस्सा हुआ है, इसके बाद पहली खुराक लेने वालों को दूसरी खुराक नहीं मिली है. उन्होंने तर्क दिया कि आने वाले दिनों में मांग बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि पात्र श्रेणी में आने वाले लोग बढ़ जाएंगे.

तेलंगाना में कोवैक्सीन खुराक की कमी

तेलंगाना सरकार के कई कोविड टीकाकरण केंद्रों (जीसीवीसी) में कोवैक्सीन की खुराक खत्म हो गई है. पिछले कुछ दिनों से टीकों की कमी महसूस की जा रही है.

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने द हिंदू को बताया कि हैदराबाद, रंगारेड्डी और मेडचल-मलकजगिरी जिलों में जीसीवीसी में कोवैक्सीन की खुराक नहीं दी गई थी.

अधिकारियों ने कहा कि केरल में भारी आपूर्ति-मांग में असंतुलन एक मुद्दा बना हुआ है. राज्य ने जनसंख्या में विशिष्ट समूहों को प्राथमिकता का दर्जा दिया है, जैसे एनआरआई या छात्र जो विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं और 18-23 वर्ष की आयु के बीच कॉलेज के छात्र हैं, लेकिन सभी को वितरित करने के लिए पर्याप्त टीके नहीं हैं.

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि हालांकि आपूर्ति नियमित है, लेकिन एक राज्य के लिए खेप काफी कम है, जिसमें प्रति दिन 2.5-3 लाख खुराक देने की क्षमता है. इसने भारी मांग के बावजूद टीकाकरण की गति को गंभीर रूप से कम कर दिया है.

केरल ने 18 साल से ऊपर की 44 फीसदी आबादी और दूसरी 16 फीसदी को पहली खुराक दी है.

जुलाई के लिए राज्य की वैक्सीन की आवश्यकता 60 लाख खुराक है, जिसमें 25 लाख खुराक की आवश्यकता उन लोगों को दूसरी खुराक देने के लिए है जो इसके पात्र हैं.

दिल्ली सरकार द्वारा मंगलवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का वैक्सीन स्टॉक केवल दो और दिनों तक चलने की उम्मीद है. लेकिन कई केंद्र मंगलवार को बंद रहे क्योंकि शहर में सोमवार शाम को एक दिन से भी कम समय के लिए स्टॉक था और केंद्रों को अभी तक ताजा स्टॉक नहीं मिला था.

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंगलवार को कहा कि कमी के कारण 500 केंद्र बंद थे.

टीकों की पर्याप्त खुराक की कमी के कारण, आंध्र प्रदेश ने अब लाभार्थियों को दूसरी खुराक देने को प्राथमिकता दी है क्योंकि उसने
लगभग 45 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की माताओं और विदेश यात्रा करने वाले लोगों के लिए पहली खुराकको सीमित कर दिया है.

अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने जुलाई में 50 लाख डोज देने का वादा किया था. हालांकि, कोविन पोर्टल के अनुसार, जुलाई में दूसरी खुराक प्राप्त करने के लिए 30 लाख से अधिक लाभार्थी हैं और उनमें से केवल छह लाख ही इसे प्राप्त कर पाए हैं. पिछले तीन दिनों के दौरान, राज्य में छह लाख से अधिक खुराकें दी गईं और उनमें से आधी दूसरी खुराक थीं.

ट्वीट्स की एक श्रृंखला में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि ओडिशा ने 30 में से 24 जिलों में टीकों के खत्म होने की सूचना दी थी.

उन्होंने कहा, ‘ओडिशा में भाजपा की सहयोगी पार्टी का शासन है. वैक्सीन की कमी की शिकायतों को खारिज करने वाली केंद्र सरकार का अब क्या कहना है? वैक्सीन की कमी एक सच्चाई है. वैक्सीन उत्पादन बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है. वैक्सीन आयात एक रहस्य है. दिसंबर 2021 तक पूरी वयस्क आबादी का टीकाकरण एक खोखला दावा है.’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को जानकारी दी कि देश में अब तक कोविड-19 टीके की 38.50 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं. हालांकि, उसमें से केवल 4.7 फीसदी खुराक कोवैक्सीन की शामिल है.

सरकार ने पहले अनुमान लगाया था कि भारत बायोटेक जुलाई-अगस्त से एक महीने में 6-7 करोड़ खुराक और सितंबर से एक महीने में 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करना है. यह जुलाई-दिसंबर तक कम से कम 52 करोड़ खुराक के बराबर है, जिसमें से 40 करोड़ सितंबर से दिसंबर तक चिह्नित हैं.

राहुल गांधी ने टीकों की ‘कमी’ को लेकर केंद्र पर निशाना साधा

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कई राज्यों में कोरोना रोधी टीके की कथित तौर पर कमी होने का हवाला देते हुए बुधवार को केंद्र पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ‘जुमले हैं, टीके नहीं हैं.’

उन्होंने एक खबर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘जुमले हैं, वैक्सीन नहीं!’ कांग्रेस नेता ने जो खबर साझा की उसमें कहा गया है कि कई राज्यों में टीकों की कमी है, हालांकि केंद्र ने इससे इनकार किया है.

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने आरोप लगाया कि टीकों की कमी और ईंधन की कीमतों में वृद्धि से भाजपा सरकार जनता के घाव पर नमक रगड़ रही है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘टीकाकरण की दर में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है और इस सरकार में ईंधन की कीमतों में 63 बार बढ़ोतरी हुई है. भाजपा लोगों के घाव पर नमक रगड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.’

उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास टीकों की 1.51 करोड़ खुराक पड़ी है जिनका अभी उपयोग नहीं हो सका है.

उसने यह भी कहा कि अब राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को टीकों की 39.59 करोड़ खुराक उपलब्ध कराई जा चुकी है.

राज्यों और निजी अस्पतालों के पास टीके की 1.51 करोड़ से अधिक खुराकें उपलब्ध: केंद्र

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास लोगों को लगाने के लिए कोविड-19 टीके की 1.51 करोड़ से अधिक अप्रयुक्त एवं शेष खुराकें उपलब्ध हैं.

मंत्रालय ने कहा कि सभी माध्यमों से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को टीके की अब तक करीब 39.59 करोड़ खुराकें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और 30,250 अतिरिक्त खुराकें भेजी जाने की तैयारी पूरी है.

उसने बताया कि बर्बाद हुए टीकों समेत अब तक कुल 38,07,68,770 टीके लगाए जा चुके हैं. कोविड-19 टीकाकरण के सार्वभौमिकीकरण का नया चरण 21 जून से शुरू हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)