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यूपी: धर्मांतरण के शक़ में बहिष्कार झेल रहे युवक ने शुरू की सुप्रीम कोर्ट तक पैदल यात्रा

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कर चुके लोगों की एक कथित सूची लीक हुई थी, जिसमें अब्दुल समद नाम के शख़्स के साथ सहारनपुर के प्रवीण कुमार की तस्वीर लगी थी और अन्य जानकारियां भी उन्हीं की थीं. प्रवीण ने धर्मांतरण से इनकार किया है लेकिन पुलिस से क्लीन चिट मिलने के बाद भी गांव में उनका सामाजिक तौर पर बहिष्कार कर दिया गया है.

प्रवीण कुमार (फोटो साभारः ट्विटर)

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के एक स्वघोषित हिंदू राष्ट्रवादी युवक ने खुद पर धर्मांतरण का आरोप लगने के बाद सहारनपुर में अपने घर से सुप्रीम कोर्ट तक की 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने युवक पर इस्लाम धर्म में परिवर्तन करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उनका सामाजिक तौर पर बहिष्कार कर दिया गया. इससे आहत होकर युवक ने यह पैदल यात्रा शुरू की है, जो छह अगस्त को सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर पूरी होगी.

दरअसल, उत्तर प्रदेश की आतंकवाद रोधी स्क्वॉड (एटीएस) अब्दुल समाद नाम के शख्स को तलाश करती हुई 23 जून को यूपी के सहारनपुर के शीतला खेड़ा गांव में प्रवीण कुमार नामक युवक के घर पहुंची थी.

बता दें कि प्रदेश में धर्मांतरण कर चुके लोगों की एक कथित सूची लीक हुई है, जिसमें अब्दुल समद नामक शख्स का नाम भी शामिल है, जिस पर प्रवीण कुमार की तस्वीर लगी है और अन्य जानकारियां भी कुमार की ही हैं.

यह लीक हुई सूची कथित तौर पर धर्मांतरण रैकेट से संबंधित हैं. जिसके आरोपी इस्लामिक दावाह सेंटर (आईडीसी) के चेयरपर्सन मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी और मोहम्मद उमर गौतम हैं.

पुलिस का कहना है कि इनके नाम डासना देवी मंदिर के मुख्य पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती की कथित हत्या की साजिश की जांच के दौरान सामने आए.

द वायर  ने पूर्व में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि नरसिंहानंद ने फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान बार-बार मुस्लिमों के नरसंहार का आह्वान किया था, जिसकी वजह से दंगे में पचास से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.

नरसिंहानंद ने पानी पीने के लिए डासना देवी मंदिर में आए 14 साल के मुस्लिम बच्चे की पिटाई के लिए अपने अनुयायियों का समर्थन भी किया था.

गन्ने के कारखाने में काम करने वाले पीएचडी स्कॉलर प्रवीण कुमार को बेशक पुलिस ने क्लीन चिट दे दी लेकिन शीतला खेड़ा गांव के लोगों ने कुमार को माफ नहीं किया और इस संदेह में कि उसने इस्लाम धर्म अपना लिया है, ग्रामीणों ने सामाजिक तौर पर प्रवीण का बहिष्कार कर दिया. प्रवीण कुमार को प्रताड़ित किया जाने लगा. उनके घर के दरवाजे पर ‘पाकिस्तान जाओ’ लिख दिया गया.

कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘मैं जिस परिस्थिति से गुजर रहा हूं, मैं उसके बारे में देश को बताना चाहता हूं.’

बीते 27 जुलाई को उन्होंने सहारनपुर में अपने घर से पैदल ही यह यात्रा शुरू की थी. कुमार ने अपनी इस यात्रा को ‘सामाजिक न्याय यात्रा’ बताया है.

वे कहते हैं, ‘मैं इस कलंक से छुटकारा चाहता हूं, जिसका बोझ मुझ पर डाला गया है. सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही मेरी मदद कर सकता है.’

प्रवीण कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर किताबें भी लिखी हैं. अपने घर से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा के दौरान कुमार ने प्रतिदिन 30 किलोमीटर तक का सफर किया.

इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस उन पर लगातार निगरानी रख रही है और उन्हें वापस लौटने को कह रही है. 30 जुलाई को दादरी में अपने रिश्तेदारों के घर रात को रुकने के दौरान पुलिसकर्मियों की एक टीम ने उनका स्वागत किया था.

कुमार ने बताया, ‘सहारनपुर पुलिस की एक टीम ने मेरे फोन की जीपीएस लोकेशन का पता लगाया था. उन्होंने पहले मुझे ढूंढा और मुझे इस मार्च को छोड़ने को कहा. जब मैंने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्होंने मुझ पर दबाव बनाना शुरू किया. उन्होंने मुझे हिरासत में लिया और जबरन वापस भेजने की कोशिश की.’

हालांकि, पुलिस की मौजूदगी की वजह से हुए हंगामे के बीच वह भागने में सफल रहे लेकिन इस दौरान उन्हें अपना सामान छोड़ना पड़ा.

सहारनपुर के विशेष पुलिस अधीक्षक एस. चनप्पा ने कहा, ‘हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हम उन पर दबाव नहीं बना रहे.’

प्रवीण कुमार पीछे हटने के मूड में नहीं है. वे कहते हैं, ‘पुलिस के उस एक दौरे के क्या मायने? जब मुझ पर आतंकी का ठप्पा लगा दिया गया था. उन्होंने तब मेरी मदद नहीं की.’

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)