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मध्य प्रदेशः सरकारी कार्यक्रम में अस्पताल में भर्ती बच्चों को घंटों धूप में बैठाया, मिला नोटिस

विदिशा ज़िला अस्पताल का मामला. आरोप है कि अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती बच्चों को एक सरकारी कार्यक्रम में चिलचिलाती धूप में घंटों तक बैठाए रखा. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर हफ़्ते भर में मामले की जांच कर दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा है.

भोपालः मध्य प्रदेश के विदिशा जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के लोकार्पण कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए यहां इलाज के लिए भर्ती बच्चों को जबरन झुलसती गर्मी में लगभग दो घंटे तक बैठाने का मामला सामने आया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को नोटिस जारी किया है.

बाल अधिकार समिति ने मुख्य सचिव बैंस से सात दिनों के भीतर मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है.

बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्चुअल तौर पर अस्पताल में इस ऑक्सीजन संयत्र का उद्घाटन किया था.

एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो की ओर से जारी नोटिस में कहा गया, ‘अस्पताल में भर्ती बच्चों को झुलसती धूप में लगभग दो घंटों तक बैठाया गया, जो प्रथमदृष्टया किशोर न्याय (देखभाल एवं बाल अधिकार) अधिनियम 2015 की धारा 75 का उल्लंघन है.’

विदिशा के मुख्य मेडिकल एवं स्वास्थ्य अधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा, ‘हम यह पता लगाने के लिए जांच करेंगे कि आखिर यह किसने किया लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि बच्चों को दो घंटे तक बैठाया गया क्योंकि यह कार्यक्रम लगभग 45 मिनट का था.’

कानूनगो ने कहा, ‘मुझे इस कार्यक्रम में शामिल लोगों से इसके वीडियो मिले हैं, जिनमें बच्चों को कार्यक्रम में बैठे देखा जा सकता है. यह वीडियो देखकर दुख हुआ इसलिए हमने जांच के आदेश दिए हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के किलाफ कार्रवाई करने को कहा है.’

जिले के सीएमएओ सिंह ने कहा, ‘जब कार्यक्रम शुरू होने वाला था, विधायक उमाकांत शर्मा ने ध्यान दिलाया कि कन्या पूजा के लिए कोई लड़की वहां नहीं थी. हमने फिर एक बच्ची को कार्यक्रम में लाने की कोशिश की और इसी भ्रम में किसी ने वॉर्ड से बच्चों को बुला लिया.’

उन्होंने यह भी कहा कि यह भी संभव है कि कुछ बच्चे अपने माता-पिता के साथ कार्यक्रम में आए हों.

एनसीपीसीआर के नोटिस में कहा गया, ‘अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम में भीड़ इकट्ठा करने के लिए अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिवार के सदस्यों, बच्चों के परिजनों और बच्चों को कार्यक्रम में भेजा था. इस दौरान जिला मजिस्ट्रेट भी वहां मौजूद थे.’

बताया जाता है कि जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो वहां मौजूद बच्चों के हाथों में वैन्युला लगा था. इस बीच प्रशासन ने जब देखा कि मीडिया ने बच्चों को देख लिया है तो तुरंत उन बच्चों को वापस भेज दिया गया.

जेजे अधिनियम की धारा 75 का उल्लंघन करने वालों को तीन साल तक की जेल की सजा या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है.

मालूम हो कि मुख्यमंत्री चौहान ने शनिवार को राज्य के भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और अन्य मंत्रियों के साथ वर्चुअल रूप से 10 ऑक्सीजन संयंत्रों का उद्घाटन किया था.