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जंतर मंतर हेट स्पीच: दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यक्रम के आयोजक को ज़मानत दी

बीते आठ अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ नामक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हिंसा का आह्वान किया गया था. कार्यक्रम के आयोजकों में से एक प्रीत सिंह पर सांप्रदायिक नारेबाज़ी का आरोप है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर मंतर के समीप पिछले महीने हुए एक कार्यक्रम के आयोजकों में से एक प्रीत सिंह को शुक्रवार को जमानत दे दी. इस कार्यक्रम में सांप्रदायिक नारेबाजी और मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा का आह्वान करने का आरोप है.

जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने आरोपी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने पर यह राहत दी.

अदालत ने कहा, ‘याचिकाकर्ता 10 अगस्त 2021 से हिरासत में है. याचिकाकर्ता से अब हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं रही. अत: याचिकाकर्ता को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है.’

साथ ही अदालत ने शर्त रखी कि आरोपी अदालत की मंजूरी के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकता और अगर घर के पते और मोबाइल फोन नंबर में कोई बदलाव होता है तो हलफनामे के जरिये उसकी सूचना दी जाएगी.

जस्टिस गुप्ता ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी दोपहर दो बजे के करीब घटनास्थल से चला गया था, जबकि ‘सह-आरोपियों ने उकसावे वाले मुख्य शब्द/नारे शाम करीब चार बजे लगाए.’

अदालत ने कहा कि इस पर कोई राय व्यक्त करना उचित नहीं होगा कि क्या याचिकाकर्ता द्वारा बोले गए शब्द आईपीसी की धारा 153ए (घृणा भाषण) के तहत अपराध के दायरे में आते हैं. बहरहाल वीडियो फुटेज और याचिकाकर्ता के कॉल रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता दोपहर करीब दो बजे घटनास्थल से चला गया था, जबकि सह-आरोपियों ने शाम करीब चार बजे मुख्य शब्द/नारे लगाए थे.’

सिंह को गिरफ्तार करने के बाद 10 अगस्त को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन पर आठ अगस्त को यहां जंतर मंतर पर एक रैली में विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता पैदा करने और धर्म विशेष के खिलाफ युवाओं को भड़काने का आरोप है.

वकील विष्णु शंकर जैन के जरिये दायर याचिका में सिंह ने दावा किया कि वह कोई भड़काऊ भाषण देने या किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नारेबाजी में शामिल नहीं थे.

उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र निर्माण की मांग करना भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (घृणा भाषण) के तहत नहीं आती तथा नारेबाजी के वक्त वह घटनास्थल पर मौजूद भी नहीं थे. दिल्ली पुलिस ने सिंह की जमानत का विरोध किया.

अभियोजन की ओर पेश वकील तरंग श्रीवास्तव ने जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी चल रही है और कथित सांप्रदायिक नारे लगाने के समय सिंह की अनुपस्थिति उसे किसी भी दायित्व से दोष मुक्त नहीं कर देती है क्योंकि सभी आरोपी मिलकर काम कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि यहां तक कि अपने साक्षात्कार में सिंह ने एक विशेष समुदाय का जिक्र किया था.

इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने बीते 27 अगस्त को सिंह को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि संविधान में सभा करने और अपने विचार व्यक्त करने के अधिकार दिए गए हैं, लेकिन ये अधिकार निरंकुश नहीं हैं और अंतर्निहित उपयुक्त प्रतिबंधों के साथ इनका उपयोग किया जाना चाहिए.

बता दें कि बीते आठ अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ नामक संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान समान नागरिक संहिता को लागू करने के पक्ष में रैली हुई थी.

आरोप है कि इस दौरान भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी नारेबाजी की गई थी. सोशल मीडिया पर वायरल कार्यक्रम के एक कथित वीडियो में प्रत्यक्ष तौर पर मुस्लिमों की हत्या का आह्वान किया गया था.

घटना के बाद 9 अगस्त को देर रात अश्विनी उपाध्याय के अलावा हिंदू सेना के अध्यक्ष दीपक सिंह हिंदू, विनीत क्रांति, प्रीत सिंह, दीपक कुमार और विनोद शर्मा, जो सुदर्शन वाहिनी के प्रमुख हैं, को गिरफ्तार किया गया था. उपाध्याय पर कार्यक्रम के आयोजन में शामिल होने का आरोप है.

रैली में सांप्रदायिक नारे लगाने के आरोपी हिंदू रक्षा दल के प्रमुख भूपिंदर तोमर उर्फ पिंकी चौधरी ने बीते 31 अगस्त को मंदिर मार्ग थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था.

भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने बीते नौ अगस्त को दावा किया था कि ये नारेबाजी उनके कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद हुआ था.

उन्होंने बताया था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि संबंधित वीडियो में दिखाई दे रहे शख्स कौन हैं और कहा था कि वह जंतर मंतर पर आयोजित कार्यक्रम के आयोजक नहीं हैं.

हालांकि ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ की मीडिया प्रभारी शिप्रा श्रीवास्तव ने बताया था कि प्रदर्शन उपाध्याय के नेतृत्व में हुआ. हालांकि, उन्होंने मुस्लिम विरोधी नारे लगाने वालों से किसी प्रकार के संबंध से इनकार किया. उपाध्याय ने भी मुस्लिम विरोधी नारेबाजी की घटना में शामिल होने से इनकार किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)