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लखीमपुर खीरी हिंसा: अब तक कोई गिरफ़्तारी नहीं, प्राथमिकी में आशीष मिश्रा पर हत्या समेत कई आरोप

किसान नेता राकेश टिकैत और संयुक्त किसान मोर्चा ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा मामले में आरोपी व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के पुत्र आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी की मांग की है. इस हिंसा के संबंध में दर्ज एफआईआर में आशीष पर हत्या, आपराधिक साज़िश सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

लखीमपुर खीरी में घटनास्थल पर पुलिस और प्रदर्शनकारी. (फोटो: पीटीआई)

बहराइच/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन कर रहे चार किसानों सहित आठ लोगों के मारे जाने के तीन दिन बाद अभी तक मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

किसान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के पैतृक गांव बनबीरपुर में आयोजित एक समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध कर रहे थे. किसानों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को एसयूवी से कुचला गया था.

मारे गए चार किसानों के अलावा अन्य पीड़ितों में से एक स्वतंत्र पत्रकार रमन कश्यप थे. द वायर  ने रिपोर्ट किया है, उनके परिवार की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कश्यप की गोली मारकर हत्या कर दी गई क्योंकि वह मौके पर मौजूद थे और ‘वीआईपी’ काफिले की गाड़ियों से किसानों को कुचले जाने का वीडियो शूट कर रहे थे.

रविवार की घटना में मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा व अन्य का नाम लेते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. लेकिन किसानों का आरोप है कि अधिकारी आरोपियों को गिरफ्तार न करके उनको बचा रहे हैं.

विपक्ष भी ऐसे ही आरोप लगा रहा है. प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव सहित लखीमपुर खीरी जाने की कोशिश करने वाले कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था.

माकपा ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार को आठ मौतों में उनके बेटे की कथित संलिप्तता को देखते हुए मिश्रा को उनके पद से हटाना चाहिए.

वहीं, भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत की घटना के आरोपी एवं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के पुत्र आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की गिरफ्तारी की मांग करते हुए मंगलवार को कहा कि मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी के लिए सरकार को एक हफ्ते का समय दिया गया है और अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे अगली रणनीति पर विचार करेंगे.

किसान नेता राकेश टिकैत ने यहां कहा कि गृह राज्य मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी के लिए सरकार को एक हफ्ते का समय दिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘मारे गए किसानों के भोग (क्रिया) के दिन हम सब यहां फिर इकट्ठा होंगे और तभी आगे की रणनीति पर चर्चा होगी.’

टिकैत ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में मारे गए किसान गुरविंदर सिंह के घर मंगलवार शाम पहुंचकर देर रात पत्रकारों से कहा कि मंत्री के पुत्र को कई लोगों ने घटनास्थल पर देखा है और लोगों के पास कई वीडियो हैं जो खीरी में इंटरनेट सेवा बहाल होते ही सामने आएंगे.

टिकैत ने कहा, ‘प्रशासन ने एक हफ्ते में मंत्री के पुत्र को गिरफ्तार करने की बात कही है और यदि ऐसा नहीं होगा, तो चारों किसानों के भोग वाले दिन हम एक जगह कार्यक्रम करेंगे और तभी अगली रणनीति पर विचार होगा.’

उन्होंने लोगों से मिली सूचना के हवाले से आरोप लगाया कि गृह राज्य मंत्री एवं उनका बेटा माफिया एवं अपराधी हैं और वे लोग डीजल चोरी में भी लिप्त हैं.

टिकैत ने कहा कि पीजीआई लखनऊ से पांच विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम द्वारा मृतक गुरविंदर सिंह का पोस्टमार्टम कराने पर सहमति बनी है.

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरा पोस्टमार्टम के बाद गुरविंदर के शव का बुधवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया.

इससे पहले बहराइच के मोहरिया गांव के 22 वर्षीय किसान के परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था, यह दावा करते हुए कि उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका कोई उल्लेख नहीं था.

संयुक्त किसान मोर्चा ने आशीष मिश्रा को गिरफ्तार करने की मांग की

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने मंगलवार को लखीमपुर खीरी कांड में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग की.

केंद्र द्वारा पिछले सात सितंबर को पारित तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में लगातार प्रदर्शन जारी है. इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हो रहे प्रदर्शन में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. मरने वालों में चार किसान हैं.

एसकेएम ने एक बयान में आरोप लगाया कि मंत्री के वाहनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को कुचल दिया. एसकेएम ने आशीष मिश्रा और उनके साथियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की.

इसने दावा किया कि मुक्रोन्या नानपारा के एक प्रदर्शनकारी गुरविंदर सिंह (20) की गोली लगने से मौत हो गई. पहले पोस्टमॉर्टम ने इसकी पुष्टि नहीं हुई. हालांकि, एम्स, बीएचयू, पीजीआई के डॉक्टरों की एक टीम और बहराइच में एक वरिष्ठ फॉरेंसिक डॉक्टर द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग के तहत और एसकेएम प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दोबारा पोस्टमॉर्टम किया जाएगा.

लखीमपुर खीरी कांड में गंभीर रूप से घायल हुए एसकेएम नेता तजिंदर विर्क का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित होने के बाद न्यूरो-सर्जरी प्रक्रिया के साथ ऑपरेशन किया गया. एसकेएम ने कहा कि उन्हें अब खतरे से बाहर बताया जा रहा है.

एसकेएम ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को हिरासत में लिए जाने की निंदा की. इसने पंजाब के लोगों को लखीमपुर खीरी आने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों की भी निंदा की.

बयान में आरोप लगाया गया है, ऐसी खबरें आ रही हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने बहराइच जिले के लखीमपुर खीरी में मारे गए दो युवकों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के इच्छुक किसानों को अन्य जगहों से रोका और परेशान किया.

एसकेएम ने मांग की है कि यूपी सरकार को अपने ‘अलोकतांत्रिक व्यवहार’ को रोकना चाहिए और नागरिकों के मूल अधिकारों को नहीं छीनना चाहिए.

एफआईआर में आशीष मिश्रा के ख़िलाफ़ आरोप- किसानों को कुचला, उन पर फायरिंग की

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के संबंध में दर्ज एफआईआर में हत्या, आपराधिक साजिश सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आशीष मिश्रा उर्फ ​​मोनू उस कार में बैठा था जिसने विरोध कर रहे किसानों को कुचल दिया था और उसने उन पर गोलियां भी चलाई थी.

बहराइच जिले के मूल निवासी जगजीत सिंह की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, यह घटना पूर्व नियोजित थी जिसके लिए मंत्री और उनके बेटे द्वारा साजिश रची गई थी.

इसने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के भड़काऊ बयानों के कारण यहां किसानों का विरोध हुआ, जिस दौरान हिंसा हुई और आठ लोगों की जान चली गई.

प्राथमिकी में कहा गया है कि किसान रविवार को महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के खेल मैदान में जमा हुए थे और वे बनबीरपुर का दौरा कर रहे मिश्रा और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को शांतिपूर्वक काले झंडे दिखाना चाहते थे.

पीटीआई द्वारा देखी गई प्राथमिकी में कहा गया है, ‘अपराह्न करीब 3 बजे आशीष मिश्रा तीन तेज रफ्तार चार पहिया वाहनों में 15-20 हथियारबंद लोगों के साथ बनबीरपुर में धरना स्थल पर पहुंचे. मोनू मिश्रा ने गोलियां चलाईं जबकि वो उस महींद्रा थार के अंदर बांई तरफ बैठे थे, जिसने भीड़ को कुचल दिया और तेजी से निकल गया.’

प्राथमिकी के अनुसार, ‘गोलीबारी में नानपारा के मैट्रोनिया निवासी सुखविंदर के पुत्र किसान गुरविंदर सिंह की मौत हो गई. सड़कों के दोनों ओर खड़े किसानों को बेरहमी से कुचलने वाले तेज रफ्तार वाहनों की संख्या यूपी 31 एएस 1000 और यूपी 32 केएम 0036 है, जबकि तीसरा वाहन (जिसका नंबर पक्की नहीं है) महिंद्रा स्कॉर्पियो था.’

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘आशीष का तेज रफ्तार वाहन सड़क के किनारे पलट गया, जिससे कई अन्य लोग घायल हो गए. आशीष मिश्रा कार से भाग निकले, गोलियां चलाईं और गन्ने के खेत में छिप गए.’

प्राथमिकी में आशीष मिश्रा के पिता का नाम नहीं है.  आशीष मिश्रा और 15-20 अज्ञात लोगों को आरोपी के रूप में उल्लेख किया गया है. उन पर हत्या, आपराधिक साजिश, लापरवाही से गाड़ी चलाने, दंगा करने का आरोप लगाया गया है.

विरोध के दौरान एसयूवी द्वारा कथित तौर पर कुचले जाने के बाद चार किसानों की मौत हो गई, जिसमें आशीष मिश्रा रविवार को अपने काफिले का नेतृत्व करने वाले वाहन में सवार थे. बाद में भीड़ ने भाजपा कार्यकर्ताओं सहित चार अन्य लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

मृतक किसानों की पहचान गुरविंदर सिंह (22), दलजीत सिंह (35), नक्षत्र सिंह और लवप्रीत सिंह (दोनों की उम्र का उल्लेख नहीं) के रूप में की गई है.

प्राथमिकी में कहा गया है, ‘एक वीडियो वायरल होने के बाद किसान अपना विरोध दर्ज कराने के लिए एकत्र हुए थे, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने एक जनसभा के दौरान टिप्पणी की थी और (तीन अक्टूबर) घटना से पहले राज्य से किसानों को खदेड़ने की धमकी दी थी.’

शिकायतकर्ता ने मंत्री और उनके बेटे की गिरफ्तारी की मांग की.

प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 (तीनों दंगों से संबंधित धाराएं), 279 (रैश ड्राइविंग), 338 (किसी भी व्यक्ति को जल्दबाजी या लापरवाही से गंभीर चोट पहुंचाना, जिससे मानव जीवन को खतरा हो) 304ए (लापरवाही से मौत), 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक साजिश का पक्ष) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में बीते रविवार को वहां के आंदोलित किसानों ने उनके (टेनी) पैतृक गांव बनबीरपुर में आयोजित एक समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध किया और इसके बाद भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई.

घटना लखीमपुर खीरी ज़िले के तिकोनिया-बनबीरपुर मार्ग पर हुई, जहां प्रदर्शनकारी किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बनबीरपुर दौरे का विरोध कर रहे थे. किसानों का आरोप है कि इसी बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा ने किसानों को अपनी गाड़ी से कुचला.

हालांकि मिश्रा ने आरोप को खारिज करते हुए रविवार को एक चैनल से कहा कि दुर्घटना के वक्त उनका बेटा दूसरी जगह किसी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहा था.

मिश्रा ने कहा था कि कार्यक्रम में शिरकत करने आ रहे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को साथ लाने के लिए कुछ कार्यकर्ता जा रहे थे. रास्ते में तिकोनिया में धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कार्यकर्ताओं की गाड़ी पर पथराव कर दिया, जिससे वह गाड़ी पलट गई. उसकी चपेट में आकर कुछ लोग घायल हो गए.

हालांकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का ये दावा सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से पूरी तरह झूठा साबित होता है. करीब 29 सेकंड के इस वीडियो का एक-एक फ्रेम रोंगटे खड़े कर देने वाला है, जिसमें ये स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे थे और पीछे से आ रही दो गाड़ियों ने उन्हें कुचल दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)