भारत

कर्नाटक: मुस्लिम युवक को पीटने और पेशाब पिलाने के आरोप में पुलिसकर्मी निलंबित

मामला बेंगलुरु का है, जहां तौसीफ़ पाशा नाम के एक युवक को पिछले सप्ताह झगड़ा करने के आरोप में थाने ले जाया गया था. उनका आरोप है कि वहां पुलिस ने उन्हें बर्बर तरीके से पीटा, उनकी दाढ़ी काट दी और उनकी रिहाई के लिए पैसे मांगे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: बेंगलुरु सिटी पुलिस ने एक पुलिस थाने में 23 वर्षीय मुस्लिम युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट करने और उसे पेशाब पीने के लिए मजबूर करने के आरोप में एक पुलिस उप-निरीक्षक को निलंबित कर दिया है.

निलंबित पुलिस सब-इंस्पेक्टर हरीश केएन को ब्यातारायानापुरा थाने से अटैच किया गया है.

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) संजीव एम. पाटिल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीते सोमवार को एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसके आधार पर हरीश को ड्यूटी में लापरवाही, पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट न करने और मामला दर्ज नहीं करने के लिए निलंबित कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं.

तौसीफ पाशा (23) को पिछले हफ्ते गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे पड़ोसी से झगड़ा करने के मामले में थाने ले जाया गया था. तौसीफ के पिता असलम पाशा ने कहा कि उनके बेटे के साथ मारपीट की गई और पुलिस ने तौसीफ की रिहाई के लिए पैसे की मांग की.

पिता ने कहा, ‘लेकिन हम तौसीफ के थाने से बाहर आने तक ये नहीं जानते थे कि उसे बर्बर तरीके से टॉर्चर किया गया है.’

तौसीफ ने कहा कि हरीश और दो अन्य पुलिस कॉन्स्टेबल, जिनमें एक क्राइम टीम का भी व्यक्ति शामिल है, ने उसके पेट पर बैट से हमला किया, जबरन उसकी दाढ़ी काट दी और उसे पेशाब पीने के लिए मजबूर किया.

पीड़ित ने कहा, ‘उन्होंने मुझे कम से कम 30 बार क्रिकेट के बल्ले से मारा और जब मैंने उनसे पीने के लिए पानी मांगा, तो उन्होंने मुझे पेशाब पिलाया. उन्होंने मेरी दाढ़ी भी काट दी. मैंने उनसे ऐसा न करने की भीख मांगी क्योंकि यह मेरी आस्था का हिस्सा था, लेकिन उन्होंने कहा कि यह (पुलिस स्टेशन) कोई धार्मिक केंद्र नहीं है. उन्होंने मुझसे थाने की सफाई भी कराई.’

असलम ने कहा कि विधायक ज़मीर अहमद खान के हस्तक्षेप के बाद तौसीफ को रिहा किया गया. पीड़ित परिवार ने कहा कि तौसीफ को विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था और सोमवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई.

उन्होंने उनकी पीठ, जांघों और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान भी दिखाए.

उपमंडल के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) से रिपोर्ट मांगने वाले डीसीपी पाटिल ने बीते सोमवार शाम को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी थी.

कर्नाटक में हाल ही में पुलिस प्रताड़ना की यह तीसरी घटना है. इस महीने की शुरुआत में बेंगलुरु का वरथुर पुलिस स्टेशन हिरासत में प्रताड़ना की एक घटना सामने आई थी.

इस मामले में एक 22 वर्षीय युवक सलमान, जिसे कथित तौर पर चोरी के एक मामले में तीन दिनों के लिए अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था, को पुलिस द्वारा कथित रूप से बेरहमी से पीटा गया था, जिसके चलते उन्हें अपना दाहिना हाथ कटवाना पड़ा.

इस लेकर एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल और दो पुलिस कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया.

इससे पहले सितंबर महीने में कर्नाटक पुलिस के आपराधिक जांच विभाग ने गोनिबीडु पुलिस स्टेशन के एक पुलिस उप-निरीक्षक अर्जुन होराकेरी को एक दलित व्यक्ति को पेशाब पीने के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.