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जम्मू कश्मीरः अनुच्छेद 370 हटने के बाद से आतंकी हमलों में मरने वाले नागरिकों की संख्या बढ़ी

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों अनुसार, मई 2014 और अगस्त 2019 के बीच आतंकी हमलों में जम्मू कश्मीर में 177 नागरिकों की मौत हुई थी लेकिन उसके बाद नवंबर 2021 तक 87 नागरिक मारे गए. इनमें से 40 से अधिक की इसी साल मौत हुई है.

Srinagar: Security personnel patrols a deserted street at Lal Chowk on the 33rd day of strike and restrictions imposed after the abrogration of Article of 370 and bifurcation of state, in Srinagar, Friday, Sept. 6, 2019. (PTI Photo) (PTI9_6_2019_000065B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बीते हफ्ते संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि पांच अगस्त 2019 के बाद से जम्मू एवं कश्मीर में हर महीने आतंकी हमले में औसतन 3.2 मौतें हुई हैं जबकि इसके पहले तक हर महीने 2.8 मौतें होती थीं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में पांच अगस्त 2019 के बाद से हर महीने आतंकी हमले में मारे गए सैन्यकर्मियों की संख्या 1.7 रही जबकि उससे पांच साल पहले यह संख्या 2.8 थी.

मई 2014 और पांच अगस्त 2019 के बीच (63 महीनों के दौरान) आतंकी हमलों में जम्मू कश्मीर में 177 नागरिक मारे गए थे जबकि उसके बाद नवंबर 2021 तक के 27 महीनों में 87 नागरिकों की मौत हुई थी. इनमें से 40 से अधिक की मौत अकेले इसी साल हुई है.

जम्मू एवं कश्मीर में 2019 में 255 आतंकी घटनाएं हुई थीं जबकि 2020 में 244 ऐसी घटनाएं हुईं. इस साल यह आंकड़ा अभी तक 200 पार कर चुका है.

राज्यसभा में एक दिसंबर को पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आंकड़े पेश करते हुए जोर देकर कहा कि जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं में हताहतों की संख्या कम हो रही है.

बीते कुछ महीनों में घाटी में अल्पसंख्यकों और प्रवासी कामगारों सहित नागरिकों पर हमले हुए हैं जिसके बाद सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत कर दिया गया है.

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस का दावा है कि इन हमलों के शुरू होने के बाद से 20 से अधिक संदिग्ध आतंकियों को मार गिराया गया है.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘खुफिया ब्यूरो और जम्मू कश्मीर पुलिस ने कुछ खुफिया जानकारी इकट्ठा की थी जिसके बाद कुछ सफल एनकाउंटर हुए. हम हमले और हत्याएं रोकने में भी सफल रहे.’

एक सुरक्षा प्रतिष्ठान अधिकारी ने बताया, ‘यह सब सीमापार से नियंत्रित किया जा रहा है. वास्तव में घाटी में कोई भी कमांडर किसी तरह के ऑपरेशन संचालित नहीं कर रहा है.’