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महाराष्ट्र: महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध पर मृत्युदंड देने वाले विधेयक को विधान परिषद की मंज़ूरी

आंध्र प्रदेश के ‘दिशा क़ानून’ पर आधारित शक्ति आपराधिक क़ानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक में महिलाओं व बच्चों से बलात्कार, सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के मामलों में मौत की सज़ा या आजीवन कारावास का प्रावधान है. ऐसे अपराधों की जांच घटना की तारीख से 30 दिनों में पूरे किए जाने का प्रावधान दिया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मुंबई: महाराष्ट्र विधान परिषद ने शुक्रवार को शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया जिसमें महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध के लिए मौत की सजा समेत कड़े दंड के प्रावधान किये गए हैं.

राज्य विधानसभा ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश के ‘दिशा कानून’ पर आधारित इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी. अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

विधेयक में अपराध के ऐसे मामलों की जांच घटना की तारीख से 30 दिनों में पूरे किए जाने का प्रावधान है और जांच अधिकारियों द्वारा आवश्यक होने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के लिए जानकारी साझा करना अनिवार्य किया गया है.

राज्य के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने इसे विधानसभा के उच्च सदन में पेश किया. उन्होंने कहा, ‘मैं यह दावा नहीं करूंगा कि यह एक पुख्ता कानून है, लेकिन यह जांच में तेजी लाएगा और एक प्रतिरोधक के रूप में काम करेगा. कानून में न केवल महिलाओं की रक्षा, बल्कि यदि कोई इसका दुरुपयोग करने की कोशिश करता है और (झूठी शिकायत दर्ज करके) किसी व्यक्ति की छवि खराब करता है तो तीन लाख रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है.’

बलात्कार के लिए मौत की सजा के प्रावधान पर उन्होंने कहा, ‘हर दोषी व्यक्ति को मौत की सजा नहीं मिलेगी. फैसला अपराध की गंभीरता पर निर्भर करेगा. जरूरत पड़ने पर जांच पूरी करने के लिए 30 दिन का समय दिया जा सकता है.’

परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दारेकर ने कहा, ‘फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं और साइबर सेल मानव श्रम, बुनियादी ढांचे और फंडिंग की कमी का सामना कर रहे हैं. राज्य सरकार को उनके लिए आवश्यक प्रावधान करना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘मैं जिला स्तर पर ऐसे अपराधों की जांच के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के प्रावधान का स्वागत करता हूं. लेकिन उन्हें पर्याप्त बुनियादी ढांचा, नए न्यायाधीश और कर्मचारी मिलने चाहिए.’

वालसे पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि साइबर और फॉरेंसिक सुरक्षा पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों को इंटर्नशिप की पेशकश की जाएगी. मंत्री ने कहा, ‘इससे साइबर सुरक्षा कक्षों और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में कर्मचारियों की कमी दूर होगी.’

विधान परिषद की पीठासीन अध्यक्ष नीलम गोरे ने कहा, ‘मैं उन सभी को बधाई देती हूं जिन्होंने शक्ति अधिनियम के निर्माण में मदद की. मैं विपक्ष के नेता दारेकर से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करती हूं कि विधेयक पर जल्द से जल्द हस्ताक्षर हो जाएं ताकि अधिनियम लागू हो सके.’ दारेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, विधेयक में 16 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार, सामूहिक बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के मामलों में मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान है. इसके अलावा महिला की गरिमा भंग करने, किसी भी माध्यम से महिला को डराने धमकाने के मामलों में पुरुषों, महिलाओं और ट्रांसजेंडरों को सजा का प्रावधान है.

अन्य प्रावधानों में पुलिस जांच के लिए डेटा साझा करने में विफलता के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंटरनेट या मोबाइल टेलीफोन डेटा प्रदाताओं के खिलाफ तीन महीने तक की कैद और 25 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों दंड शामिल हैं.

झूठे मामले दर्ज करने या किसी व्यक्ति को झूठी जानकारी प्रदान करने के मामले में कम से कम तीन साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने जैसी सजा का प्रावधान है.

एसिड अटैक के मामलों में कम से कम 15 साल की कैद की सजा का प्रावधान है जो एक दोषी के बाकी जीवन तक बढ़ सकती है, और उसे पीड़ित को जुर्माना देना होगा. साथ ही, पीड़िता के लिए प्लास्टिक सर्जरी और चेहरे के पुनर्निर्माण का खर्च आरोपी पर लगने वाले आर्थिक जुर्माने से लिया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य विधेयक, महाराष्ट्र एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट (शक्ति कानून के तहत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ कुछ अपराधों के लिए) को राज्य विधानमंडल की संयुक्त चयन समिति को भेजा जाएगा.

गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा, ‘समिति संशोधनों का सुझाव देने के लिए विचार-विमर्श करेगी और हम इसे अगले सत्र के अंत तक पूरा कर लेंगे.’

इस विधेयक में समर्पित अदालतों, विशेष लोक अभियोजकों और विशेष पुलिस टीमों के प्रावधान होंगे, जिनमें कम से कम एक महिला अधिकारी होगी. इस विधेयक के तहत पीड़ितों को चिकित्सा या मनोरोग सहायता और देखभाल, मनोचिकित्सा परामर्श सहित सेवाएं प्रदान करने के लिए संस्थानों की स्थापना करना, कानूनी और वित्तीय सहायता और पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाएगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)