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मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में दो और लोगों के ख़िलाफ़ केस

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच आयोजित ‘धर्म संसद’ में  हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में 23 दिसंबर को दर्ज प्राथमिकी में जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. अब उसमें स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा के नाम जोड़े गए हैं.

उत्तराखंड पुलिस. (प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

देहरादून: उत्तराखंड के हरिद्वार में हाल में आयोजित एक धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में दो और लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

हरिद्वार कोतवाली थाना प्रभारी (एसएचओ) रकिंदर सिंह ने सोमवार को बताया कि कार्यक्रम की उपलब्ध फुटेज खंगालने के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में बीते 25 दिसंबर को बिहार निवासी स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडेय के नाम जोड़े गए.

पूजा शकुन पांडेय निरंजिनी अखाड़े की महामंडलेश्वर और हिंदू महासभा के महासचिव हैं.

पिछले 23 दिसंबर को दर्ज की गई प्राथमिकी में शुरूआत में सिर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने से पहले त्यागी का नाम वसीम रिजवी था.

वसीम रिजवी उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष थे, जिन्होंने हाल ही में हिंदू धर्म अपनाने का दावा करते हुए अपना नाम बदला है.

प्राथमिकी, भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच धर्म, नस्ल, जन्म स्थान,निवास, भाषा के आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देने) के तहत दर्ज की गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, हरिद्वार कोतवाली थाने के एसएचओ ने कहा, ‘दो नामों के जुड़ने के साथ मामले में नामित आरोपियों की कुल संख्या अब तीन हो गई है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और मामले में इसे जोड़ा जाएगा.’

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार ने कहा, ‘इस तरह की घटनाओं और अभद्र भाषा को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’ साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ हर संभव कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया.

मामले की जांच कोतवाली थाने के सब-इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी कर रहे हैं.

द हिंदू के मुताबिक, उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों को मौजूदा मामले में जोड़ने पर कानूनी रूप से जांच की जा रही है.

एक वीडियो क्लिप में आरोपी अन्नपूर्णा सभा को यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि हिंदुओं को किताबें छोड़ देनी चाहिए और मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाना चाहिए.

अन्य आरोपी धर्मदास महाराज ने कहा था कि भारत में 500 पाकिस्तान थे, जहां हिंदू अनुष्ठान नहीं किए जा सकते थे और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हत्या का आह्वान किया था.

बता दें कि हिंदू कट्टरपंथी यति नरसिंहानंद द्वारा हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया था, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों को खिलाफ खुलकर नफरत भरे भाषण (हेट स्पीच) दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था.

कार्यक्रम में नरसिंहानंद ने मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए कहा था कि वह ‘हिंदू प्रभाकरण’ बनने वाले व्यक्ति को एक करोड़ रुपये देंगे.

19 दिसंबर को इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, ‘जब हमें मदद की जरूरत थी, तो हिंदू समुदाय ने हमारी मदद नहीं की, लेकिन अगर कोई युवा कार्यकर्ता हिंदू प्रभाकरण बनने के लिए तैयार है, तो किसी और से पहले मैं उसे 1 करोड़ रुपये दूंगा. यदि वह एक साल तक ऐसे ही काम करता रहा तो मैं कम से कम 100 करोड़ रुपये जुटाऊंगा.’

प्रभाकरण के साथ, नरसिंहानंद ने खालिस्तानी अलगाववादी आंदोलन के दो नेताओं- जरनैल सिंह भिंडरावाले और शाबेग सिंह का भी उल्लेख किया. सिंह भिंडरावाले के सैन्य सलाहकार थे और साल 1971 के युद्ध के दौरान बांग्लादेश का सहयोग करने वाली ‘मुक्ति वाहिनी सेना’ के गठन में बड़ी भूमिका निभाई थी.

द वायर  ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट्स में बताया था कि किस तरह नरसिंहानंद द्वारा दी गई हेट स्पीच के चलते फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भयानक दंगे भड़के थे. नरसिंहानंद और उनके तथाकथित शिष्यों को आए दिन मुस्लिमों के खिलाफ नियमित तौर पर हिंसक और भड़काऊ भाषण देते हुए देखा जा सकता है.

नरसिंहानंद के खिलाफ उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कई एफआईआर दर्ज हैं. इस साल की शुरुआत में, दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पैगंबर मुहम्मद के बारे में उनकी टिप्पणियों के कारण दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.

हरिद्वार के ‘धर्म संसद’ में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने भी भाग लिया, जिन्हें कुछ समय पहले जंतर मंतर पर मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इस विवादित कार्यक्रम में भाजपा महिला मोर्चा की नेता उदिता त्यागी ने भी हिस्सा लिया था.

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के 76 वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर दिल्ली और हरिद्वार में हुए हालिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समाज के खिलाफ भड़काऊ बयान देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)