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उत्तर प्रदेश और झारखंड में दो किसानों ने की ख़ुदकुशी

गिरीडीह के मज़दूर बेटे ने पिता को भेजा पैसा, बैंक ने क़र्ज़ में एडजस्ट किया, आहत पिता ने फांसी लगाई. बांदा में क़र्ज़ से परेशान युवक ने ख़ुद को गोली मारी.

Farmers Draught India Reuters

प्रतीकात्मक फोटो (रॉयटर्स)

नई दिल्ली: देश भर में किसान आत्महत्याएं लगातार जारी हैं. उत्तर प्रदेश बांदा और झारखंड के गिरीडीह में कर्ज के चलते दो किसानों के आत्महत्या का मामला प्रकाश में आया है.

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बिसंड़ा थाना के पुनाहुर गांव में बुधवार शाम कर्ज में डूबे एक युवक ने कथित रूप से खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. युवक कर्ज माफी योजना ऋण मोचन में अपना नाम नहीं आने से परेशान था.

उपजिलाधिकारी प्रहलाद सिंह ने गुरुवार को यहां बताया, पुनाहुर गांव निवासी दीपू गौतम (23) ने बुधवार शाम अपने घर के भीतर ही तमंचे से गोली मार ली. उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई है.

उन्होंने बताया, उस पर बैंक का एक लाख अस्सी हजार रुपये का कर्ज बकाया था. ऋण मोचन योजना के लाभार्थियों की दूसरी सूची में उसका नाम था, लेकिन वह पहली बार नाम नहीं आने से परेशान था. मामले की जांच कराई जा रही है.

उधर, मृतक की दादी श्यामा ने बताया, मृतक की मां मुन्नी की मौत उसके बचपन में ही हो गई थी, उसका पिता भी गायब है. वह अकेले ही घर का खर्च चलाता था, सरकारी कर्ज के अलावा साहूकारों का भी 60 हजार रुपये का उस पर कर्ज था. जिससे वह बेहद परेशान रहता था, उसके नाम सिर्फ ढाई बीघे कृषि भूमि है. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिये भेज मामले की जांच आरंभ कर दी है.

उधर, झारखंड के गिरीडीह में भी एक किसान ने आत्महत्या कर ली. बिजनेस स्टैंडर्ड ने पुलिस के हवाले से लिखा है, ‘बैंक कर्ज के चलते किसान के खाते से पैसा निकालने पर रोक लगा दी गई थी, जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली.

हिंदी दैनिक प्रभात खबर के मुताबिक, ‘गिरीडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के छोटकी खरगडीहा के किसान कैलाशपति राणा (50) ने बुधवार की शाम को फांसी लगा ली. मृतक के बेटे नीतीश कुमार ने आरोप लगाया है कि बैंक में उसके पिता से दुर्व्यवहार किया गया.’

खबर के मुताबिक, ‘नीतीश का कहना है कि उसका बड़ा भाई ओड़िशा में मजदूरी करता है. दुर्गा पूजा के समय उसके भाई ने पिता के बैंक खाते में पैसा भेजा था. उसके पिता ने दो बार बैंक जाकर राशि निकालने का प्रयास किया, लेकिन शाखा प्रबंधक ने केसीसी लोन की बात बताते हुए राशि निकासी में व्यवधान की बात कही. इससे क्षुब्ध कैलाशपति राणा घर पहुंचे और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.’

हालांकि, ‘बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक दीपक वर्मा ने कहा कि प्रताड़ना का आरोप गलत है. खाताधारी का केसीसी लोन था. लोन की रिकवरी के लिए ऊपर से काफी दबाव रहता है. ऐसे में खाताधारी के खाते में जब पैसा आया तो उन्होंने कैलाशपति से लोन बंद कर नया लोन लेने का आग्रह किया था.’