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महाराष्ट्र में जुलाई से अब तक कीटनाशक ने ली 50 से अधिक किसानों की जान

800 से ज़्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हुए. कीटनाशक कंपनी पर कार्रवाई के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाख़िल.

Farmer Pesticide Reuters

फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्ली: महाराष्ट्र का विदर्भ किसानों की आत्महत्या के लिए कुख्यात है. अब तक यहां के किसान कर्ज संकट के चलते कीटनाशक पीकर आत्महत्या करते थे, अब यही कीटनाशक इतना खतरनाक हो गया है कि इसका खेतों में छिड़काव करने वाले किसान इसकी चपेट में आकर जान गवां रहे हैं. संदिग्ध कीटनाशक की वजह से महाराष्ट्र में जुलाई से अब तक 50 से ज़्यादा किसानों की मौत हो चुकी है.

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में फसलों में छिड़के जाने वाले कीटनाशक की वजह से बड़ी संख्या में किसानों के बीमार होने और कइयों की मौत हो जाने का मामला सामने आया है. पूरे महाराष्ट्र में जुलाई से अब तक 50 से ज्यादा मौत हो चुकी है और इस दौरान 800 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं, जिसके बाद सरकार ने जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति बना दी है.

सिर्फ विदर्भ क्षेत्र में कीटनाशक की वजह से मरने वाले किसानों की संख्या 18 से लेकर 24 तक बताई जा रही है. अलग अलग खबरों में अलग अलग दावे किए गए हैं. जबकि फिलहाल 800 से ज्यादा कीटनाशक की चपेट में आकर या तो बीमार हैं या फिर अस्पताल में भर्ती हैं.

बीबीसी की वेबसाइट पर 6 अक्टूबर को छपे एक लेख के मुताबिक, ‘अधिकारियों और मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, पिछले जुलाई से महाराष्ट्र में संदिग्ध कीटनाशक ज़हर के कारण अबतक 50 किसानों की मौत हो चुकी है… सबसे अधिक 19 मौतें यवतमाल ज़िले में दर्ज की गई हैं. अधिकारियों के अनुसार, इसी दरम्यान 800 और किसानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.’

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि ‘यवतमाल जिले में पेस्टिसाइड की वजह से 18 किसानों की मौत हो गई, जबकि 800 से ज्यादा किसान अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालांकि, सरकार ने इसकी जांच का आदेश दे दिया है.

खबर के मुताबिक, 19 जुलाई के बाद पेस्टिसाइड की वजह से 17 किसानों की मौत हो चुकी है जबकि इसी तरह की 12 और मौतों की जांच की जा रही है. इनमें से अकोला जिले में पांच, अमरावती में दो, नागपुर में दो, भंडारा में दो और बुलडाना में एक मौत हुई है. 800 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं जिनमें डायरिया, उल्टी, सर्दी, पेटदर्द और आंख से कम दिखाई देने जैसी समस्याएं पाई गई हैं.

मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि किसान कपास समेत अन्य फसलों में जिस कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं, वह उनकी ही जान ले रहा है. इस बारे में सरकार ने जांच का आदेश दिया है और कीटनाशक से होने वाली मौतों को लेकर दो लाख के मुआवजे की घोषणा भी की है.

बीबीसी हिंदी के एक अन्य लेख के मुताबिक, ‘कीटनाशक रसायन किसानों की जानें ले रहा है. पिछले कुछ दिनों में विदर्भ कीटनाशक रसायन के छिड़काव के कारण हुई 24 में से 19 किसानों की मौत अकेले यवतमाल ज़िले मे हुई है…महाराष्ट्र सरकार ने इस दुर्घटना का कारण ढूंढने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. साथ ही कीटनाशक के छिड़काव के वक्त इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा साधन अनिवार्य कर दिए गए हैं.’

इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है कि पेस्टिसाइड फर्म के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए.

एनडीटीवी के मुताबिक, ‘पिछले महीने पेस्टिसाइड छिड़काव के चलते कम से कम 20 किसानों की मौत हुई है. पहली मौत अगस्त की शुरुआत में हुई थी, तब से अब तक करीब 600 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है. 100 से ज्यादा लोगों का अभी भी यवतमाल के जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. कुछ की आंख की रोशनी जा चुकी है. कुछ को आईसीयू में भी भर्ती कराना पड़ा है.’