भारत

अनुशासनात्मक कार्रवाई झेल रहे अधिकारी गुजरात चुनाव में तैनात न किए जाएं: सुप्रीम कोर्ट

गुजरात चुनाव राउंडअप: ‘आप’ के कई नेता कांग्रेस में शामिल, अहमद पटेल ने राजनाथ से कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों को राजनीति का बंधक नहीं बना सकते.

फोटो: रॉयटर्स

फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्ली/अहमदाबाद: देश के उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग से उन अधिकारियों को आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव ड्यूटी के लिए अहम पदों पर नहीं तैनात करने का निर्देश दिया जिनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने यह बात तब कही, जब चुनाव आयोग ने उससे कहा कि वह किसी भी दागी अधिकारी को तैनात नहीं करेगा. आयोग के अनुसार उनमें वे अधिकारी भी शामिल हैं जिनके विरुद्ध अनुशानात्मक कार्रवाई पहले से ही शुरू कर दी गई है.

पीठ ने कहा, हम निर्देश देते हैं कि चुनाव आयोग ऐसे किसी अधिकारी को किसी जिले में अहम पद पर तैनात नहीं करे जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है. गुजरात विधानसभा चुनाव नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को दो चरणों में होंगे.

शीर्ष अदालत का आदेश कांग्रेस सचिव प्रकाश जोशी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया. याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग को किसी ऐसे अधिकारी को अनुबंध या सेवा काल विस्तार के आधार पर जिलों में अहम पदों पर तैनात नहीं करने का निर्देश दिया जाए जो जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना कर रहे हैं.

आप के कई नेता कांग्रेस में शामिल

गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) के कई नेताओं ने सोमवार को अपने 200 से अधिक समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया.

कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं में अहमदाबाद, खेड़ा, मेहसाणा और राजकोट के प्रभारी क्रमश: ऋतुराज मेहता, हंसमुख पटेल, लालूभाई लड़ीवाला, अंकुर धामेलिया और तुषार जानी के अलावा राज्य महिला शाखा की प्रमुख वंदना पटेल शामिल हैं. इन लोगों ने यहां स्थित पार्टी मुख्यालय में गुजरात इकाई के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की.

आईएसआईएस मामला: अहमद पटेल ने राजनाथ से जांच की मांग की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने गुजरात में गिरफ्तार किए गए इस्लामिक स्टेट के एक संदिग्ध सदस्य के साथ उनके कथित संबंधों और इस विवाद में उनका नाम घसीटे जाने की कोशिशों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है.

दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव पटेल सूरत से इस्लामिक स्टेट के दो संदिग्ध सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए राजनीतिक घमासान के केंद्र में हैं. इनमें से एक संदिग्ध कासिम टिम्बरवाला भरूच जिले में सरदार पटेल अस्पताल में काम करता था जहां पटेल एक ट्रस्टी थे.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में पटेल ने कहा कि भाजपा इस मामले में उनका नाम घसीटकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने पत्र में लिखा, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले पर संज्ञान लें और भारत का गृह मंत्री होने के नाते संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से इस जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने का निर्देश दें.

मामूली फायदे के लिए विरोधी की छवि धूमिल नहीं करनी चाहिए

पटेल ने लिखा, जो भी दोषी हो, उसे उसके धर्म या उसकी किसी संबद्धता पर ध्यान दिए बिना सजा देनी चाहिए. इस मामले में आपकी सरकार को मेरा पूर्ण समर्थन है. पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों को राजनीति का बंधक नहीं बना सकते और मामूली चुनावी फायदे के लिए राजनीतिक विरोधियों की छवि धूमिल नहीं करनी चाहिए.

पत्र में लिखा गया है, यह आतंकवाद के खिलाफ चल रही हमारी लड़ाई के साथ बड़ा अन्याय होगा. इसलिए मुझे यह काफी चिंताजनक लगता है कि गुजरात में सत्तारूढ़ पार्टी चुनावों के मद्देनजर बेबुनियादी और अप्रमाणित आरोप लगाकर एक गंभीर जांच को नुकसान पहुंचा रही है.

पटेल ने कहा कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो सभी को राजनीतिक मतभेदों से पर उठना चाहिए. कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका को आतंकवाद के आरोप तय करने चाहिए, ना कि पार्टी मुख्यालय से संवाददाता सम्मेलन में नेताओं को.

कोटा पर हार्दिक पटेल को रुख स्पष्ट करना चाहिए: रूपानी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने रविवार को कहा कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को ओबीसी कोटे तहत पाटीदारों को आरक्षण दिए जाने की मांग पर अपना रुख स्पष्ट करने की जरूरत है.

हार्दिक पटेल द्वारा कांग्रेस को आरक्षण के मुद्दे पर तीन नवंबर तक रुख स्पष्ट करने का अल्मीमेटम दिए जाने पर कटाक्ष करते हुए रूपानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पाटीदारों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण देने के बारे में कभी वादा नहीं किया, लेकिन पटेल ने अपने समुदाय से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने को कहा.

रूपानी ने कहा, कांग्रेस नहीं, हार्दिक को अपना रुख स्पष्ट करने की जरूरत है क्योंकि कांग्रेस का रुख पहले ही स्पष्ट है. हार्दिक का आंदोलन ओबीसी कोटे के बारे में है और कांग्रेस ने पहले ही कह दिया है कि वह पाटीदारों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण नहीं दे सकती.

पटेल ने एक दिन पहले कांग्रेस से कहा था कि वह तीन नवंबर तक यह स्पष्ट करे कि सत्ता में आने पर वह पाटीदार समुदाय को कैसे आरक्षण देगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)