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सरकार चुनावी मोड में, संसद सत्र संक्षिप्त और देर से होगा, कांग्रेस-भाजपा में वाकयुद्ध

गुजरात चुनाव राउंडअप: अपने दो सदस्यों को ही टिकट मिलने से पाटीदार अमानत आंदोलन समिति कांग्रेस से नाराज, सभी सीटों पर लड़ेगी राकांपा, कांग्रेस से बातचीत रही विफल.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वित्त मंत्री अरुण जेटली. (फोटो: रॉयटर्स/पीटीआई)

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वित्त मंत्री अरुण जेटली. (फोटो: रॉयटर्स/पीटीआई)

नई दिल्ली/अहमदाबाद: गुजरात चुनाव के चलते सरकार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि संसद का शीतकालीन सत्र कब से शुरू होगा. आम तौर पर यह सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है और दिसंबर के तीसरे सप्ताह तक चलता है. सूत्रों के अनुसार सरकार दिसंबर के दूसरे सप्ताह में तकरीबन 10 दिनों का संक्षिप्त शीतकालीन सत्र बुलाने पर विचार कर रही है.

संसद का शीतकालीन सत्र बुलाने को लेकर सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच वाकयुद्ध देखने को मिला.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कमजोर आधार पर संसद के शीतकालीन सत्र में व्यवधान पैदा करने की कोशिश कर रही है. वहीं, जेटली ने कहा कि कांग्रेस ने भी अतीत में ऐसा किया है.

सोनिया के आरोपों पर पलटवार करते हुए जेटली ने कहा कि चुनाव के समय में पहले भी कई बार संसद सत्र का कार्यक्रम पुनर्निर्धारित किया गया है. गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में नौ और 14 दिसंबर को होना है.

सोनिया ने पार्टी की निर्णय करने वाली सर्वोच्च इकाई सीडब्ल्यूसी की बैठक में कहा, मोदी सरकार ने कमजोर आधार पर संसद के शीतकालीन सत्र में व्यवधान पैदा करके अपने अहंकार में भारत के संसदीय लोकतंत्र पर काली छाया डाल दी है.

सोनिया के आरोपों का खंडन करते हुए जेटली ने कहा कि संसद सत्र का कार्यक्रम अक्सर पुनर्निर्धारित किया जाता रहा है ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि ये चुनावों से मेल नहीं खाएं और कांग्रेस ने खुद ऐसा कई बार किया है.

जेटली ने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी ने सत्ता में रहने के दौरान 2011 में एक सत्र को विलंबित किया था और ऐसा पहले भी किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसद सत्र की तारीख और चुनाव प्रचार एक ही वक्त में नहीं हों.

उन्होंने राजकोट में संवाददाताओं से कहा, यह परंपरा रही है और ऐसा कई बार हो चुका है जब चुनाव के दौरान संसद के सत्र पुनर्निर्धारित किए गए हैं. जेटली ने यह भी कहा कि सत्र का आयोजन निश्चित तौर पर होगा और कांग्रेस पूरी तरह बेनकाब हो जाएगी.

उन्होंने कहा, अपने 10 साल के शासन में कांग्रेस ने सबसे भ्रष्ट सरकार दी है, जबकि नरेंद्र मोदी ने सबसे ईमानदार सरकार दी है. जोर से बोलकर किसी सच को झूठ करार देने से वह झूठ नहीं बन जाता.

कांग्रेस की सूची में दो ही टिकट मिलने से पाटीदार अनामत आंदोलन समिति नाराज़

गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की पहली सूची से पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) को निराशा हुई है क्योंकि उसके सिर्फ दो सदस्यों को इसमें जगह दी गई है.

पास के दो सदस्यों-ललित वसोया और अमित ठुम्मर को रविवार को जारी सूची में जगह दी गई थी. हालांकि, हार्दिक पटेल नीत संगठन ने 20 सीटों की मांग की थी.

इस घटनाक्रम से नाराज पास नेतृत्व ने अपने दो सदस्यों (जिन्हें टिकट दिया गया था) को निर्देश दिया था कि वे विरोध स्वरूप अपना नामांकन पत्र दायर नहीं करें.

हालांकि, उनमें से एक (वसोया) ने सोमवार को कांग्रेस के टिकट पर धारोजी सीट से अपना नामांकन पत्र दायर किया. वसोया के नामांकन पत्र दायर करने के बाद पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियां ट्वीट कीं.

उन्होंने लिखा, ‘बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पांवों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा.’

टिकट विवाद के बाद हार्दिक ने राजकोट में होने वाली अपनी रैली रद्द कर दी. इस रैली में उन्हें कांग्रेस पार्टी को अपने समर्थन की घोषणा करनी थी. कांग्रेस ने रविवार रात 77 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी. इसमें पास के दो सदस्यों के अतिरिक्त 20 से अधिक अन्य पटेल उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था.

कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची जारी होने के तुरंत बाद आंदोलित पास सदस्यों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने दावा किया कि जारी सूची में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया. सूरत में पास सदस्यों ने कांग्रेस की नगर इकाई के कार्यालय में तोड़फोड़ की और पार्टी के खिलाफ नारेबाजी की.

सूरत शहर में पास के संयोजक धार्मिक मालवीय ने संवाददाताओं से कहा, हमारे समुदाय के सदस्यों को घोषित सूची में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है. हम राज्य में कांग्रेस के किसी भी कार्यालय को काम करने नहीं देंगे. अहमदाबाद में पास संयोजक दिनेश भंबानिया के साथ उनके समर्थकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के घर पर हंगामा किया था.

राकांपा-कांग्रेस की बातचीत विफल

कांग्रेस के साथ सभी तरह की बातचीत विफल रहने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का कहना है कि वह गुजरात विधानसभा चुनाव में सभी 182 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी.

शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी और कांग्रेस ने राज्य में 2007 और 2012 के चुनाव एक साथ लड़े थे. वर्तमान में गुजरात विधानसभा में राकांपा के दो विधायक हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गठबंधन राकांपा द्वारा अधिक सीटों की मांग करने के कारण टूटा है.

राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, हम सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. हम जल्द ही अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेंगे. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, मुझे लगता है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की बजाय हमारा सभी सीटों पर स्वयं चुनाव लड़ना बेहतर होगा.

कांग्रेस के राज्य प्रभारी अशोक गहलोत ने कहा, राकांपा को गुजरात में अपनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीटों की मांग करनी चाहिए थी. सीटों का बंटवारा तभी संभव हो पाता, अगर उन्होंने सीमित मांग रखी होती.

चुनाव अधिकारी के विवेकाधिकार पर कोई आदेश नहीं: न्यायालय

गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले उच्चतम न्यायालय ने वीवीपीएटी मशीन से निकली कागज की पर्ची की गणना से इंकार करने के चुनाव अधिकारी के विवेकाधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर कोई भी आदेश देने से इंकार कर दिया.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि इस मामले में पहले से कोई व्यवस्था नहीं दी जा सकती और यदि चुनाव के परिणाम को लेकर कोई विवाद होता है तो इसे चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती दी सकती है.

पीठ ने गुजरात जनचेतना पार्टी के अध्यक्ष की इस दलील से सहमत होने से इंकार किया कि वे चुनाव के नतीजों को लेकर किसी भी विवाद में चुनाव याचिका के माध्यम से चुनाव अधिकारी के विवेकाधिकार को चुनौती दे सकते हैं.

पीठ ने कहा, हम पहले से कोई व्यवस्था नहीं दे सकते. चुनाव के नतीजे को लेकर कोई विवाद होने पर आपके पास चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प है.

याचिकाकर्ता मनुभाई चावड़ा के वकील देवदा कामत ने चुनाव संचालन के नियम 1961 के विनियम 56 डी2 का विरोध किया जो वीवीपीएटी मशीन की पर्चियों की गणना से इंकार करने का चुनाव अधिकारी को विशेष अधिकार प्रदान करता है.

पीठ ने कहा कि आपके पास हमेशा ही चुनाव के नतीजे को लेकर कोई विवाद होने पर चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प उपलब्ध है. शीर्ष अदालत 10 नवंबर को चावड़ा की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई थी. याचिका में दावा किया गया था कि वीवीपीएटी में इस्तेमाल होने वाले कागज का जीवन कुछ महीने का ही होता है जिसके बाद इस पर मुद्रित सामग्री धूमिल हो जाती है या विलुप्त हो जाती है.

रूपाणी ने नामांकन-पत्र दायर किया

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अगले महीने होने जा रहे राज्य विधानसभा चुनावों के लिए सोमवार को अपना नामांकन-पत्र दायर किया और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी ने राज्य में खुद को तीन प्रमुख कार्यकर्ताओं को आउटसोर्स कर दिया है, क्योंकि उसके पास अपना कुछ भी नहीं है.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की मौजूदगी में भाजपा नेता ने दोपहर 12:39 बजे राजकोट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन-पत्र दायर किया. पार्टी के नेताओं ने नामांकन दाखिल करने के समय को विजय मुहूर्त करार दिया.

रूपाणी राजकोट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक हैं. इस सीट पर पहले चरण के चुनाव के तहत नौ दिसंबर को मतदान होगा. अपना नामांकन दाखिल करने से पहले रूपाणी ने एक सभा को संबोधित किया जिसमें उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भाजपा शासित गुजरात में खुद को बचाने के लिए पार्टी तीन कार्यकर्ताओं पर भरोसा कर रही है.

मुख्यमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन वह संभवत: हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी की तरफ इशारा कर रहे थे. उन्होंने कहा, कांग्रेस आउटसोर्सिंग कर रही है, क्योंकि उसके पास अपना कुछ भी नहीं है. पार्टी की हालत ऐसी है कि तीन लोग कांग्रेस को बचाने के लिए सामने आए हैं. कांग्रेस टूट चुकी है और कांग्रेस मुक्त भारत का अर्थ गरीबी, भ्रष्टाचार एवं बेरोजगारी से मुक्त भारत है.

भाजपा उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी

भाजपा ने गुजरात चुनाव के लिए सोमवार को अपनी तीसरी सूची जारी कर दी जिसमें 28 उम्मीदवारों के नाम हैं. इसके साथ ही पार्टी अब तक 134 उम्मीदवार घोषित कर चुकी है.

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की. भाजपा इससे पहले अपनी पहली सूची में 70 और दूसरी सूची में 36 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है.

गुजरात में दो चरणों में 9 एवं 14 दिसंबर को मतदान होने हैं. इसमें पहले चरण में 19 जिलों के 89 निर्वाचन क्षेत्रों और दूसरे चरण में 14 जिलों के 93 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होना है. मतगणना 18 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ की जाएगी.

युवा कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में वरिष्ठ सदस्यों को उतारा

भारतीय युवा कांग्रेस ने चुनावी राज्य गुजरात में अपनी पार्टी के व्यापक प्रचार में ताकत झोंक दी है और युवा मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 50 विधानसभा क्षेत्रों पर वरिष्ठ पदाधिकारियों को प्रभारी के तौर पर तैनात किया है.

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह बरार भी राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों की यात्रा करेंगे. भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक अमरीश रंजन पांडे ने कहा, भारतीय युवा कांग्रेस (आईवीईसी) गुजरात में व्यापक प्रचार अभियान कर रही है. इन 50 सीटों के अलावा, हमने गुजरात विधानसभा चुनावों में प्रचार अभियान में मदद के लिए 500 से ज्यादा पदाधिकारी और विभिन्न राज्यों के कार्यकर्ताओं को तैनात किया है.

युवा कांग्रेस ने गुजरात की 50 विधानसभा सीटों पर प्रभारी के तौर पर अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को तैनात किया है ताकि युवा शहरी मतदाताओं से संपर्क हो सके.

बरार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा युवाओं के बारे में बात करते हैं लेकिन बेरोजगारी और नोटबंदी की वजह से उन्हें होने वाली परेशानियों को नहीं समझते हैं.

शहरी युवा मतदाताओं में भाजपा की अपील को ध्यान में रखते हुए आईवाईसी ने उन्हें अलग करने की कोशिश की जिनके बारे में इसका मानना है कि उनका गुजरात में बेरोजगारी और नोटबंदी के बाद नौकरी चले जाने से पार्टी मोहभंग हो गया है.

पांडे ने कहा, युवाओं की बड़े पैमाने पर नौकरियां गई हैं. कारोबार और व्यापार प्रभावित होने की वजह से बेरोजगारी व्याप्त है और मोदी सरकार द्वारा दिए गए नोटबंदी के झटके के एक साल बाद भी उबर नहीं पाए है.

कांग्रेस को ज़िम्मेदारी से निभानी होगी अपनी भूमिका: शरद यादव

वरिष्ठ सांसद व समाजवादी नेता शरद यादव ने गुजरात विधानसभा चुनाव में विपक्ष की एकजुटता को ही भाजपा को हराने का एकमात्र तरीका बताते हुए कहा है कि चुनाव में कांग्रेस को जिम्मेदारी से अपनी भूमिका का निर्वाह करना होगा.

यादव ने कहा कि है कि गुजरात में चूंकि विपक्ष की ओर से कांग्रेस ड्राइविंग सीट पर बैठी है, लिहाजा उसकी यह जिम्मेदारी है कि वह राज्य में राजनीतिक कौशल और उदारता के साथ अलग-अलग सामाजिक ताकतों को एकजुट करे. उन्होंने कहा कि कोई कारण नहीं है कि कांग्रेस अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने से पीछे हटेगी.

गुजरात में सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद की खबरों के बीच यादव ने कहा कि चूंकि कांग्रेस लंबे समय तक अकेले सत्ता में रही है इसलिए पहले वह गठबंधन की राजनीति में ज्यादा माहिर नहीं थी. लेकिन अब वह गठबंधन राजनीति के तकाजों और उसकी संवेदनशीलता को समझने लगी है.

हालांकि, उन्होंने कहा भाजपा हर चुनाव वजूद का सवाल बना कर लड़ती है और इसके लिए किसी भी तरह के उपायों से परहेज नहीं करती. भाजपा किसी भी दल के साथ सहजता से गठबंधन करती है जबकि कांग्रेस अनमने मन से गठजोड़ करती है.

यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बाद देश में आम आदमी की सोच में बदलाव आया है. यादव ने कहा, चार बड़ी घटनाओं- नोटबंदी, जीएसटी, बिहार में महागठबंधन की टूट और गुजरात में राज्यसभा की एक सीट के लिए मची अफरातफरी- ने आमजन को सोचने पर मजबूर किया है. पिछले तीन वर्ष से देश में घूम फिर कर हिंदू-मुसलमान के इर्द-गिर्द ही चर्चा होती रही है. लोग अब सोच रहे हैं कि 2014 में क्या इसलिए ही उन्होंने बदलाव किया था.

यादव ने कहा, लोगों में यह बेचैनी हिमाचल में भी थी और गुजरात में भी है… और यह बेचैनी स्थानीय परिस्थितियों के कारण नहीं बल्कि समूचे देश में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर मची अफरातफरी की वजह से है.

विपक्ष के पास मोदी के मुकाबले का कोई चेहरा नहीं होने के प्रश्न पर यादव ने कहा कि दुनिया कभी विकल्पहीन नहीं होती. पिछले लोकसभा चुनाव में 67 प्रतिशत मतदाताओं ने भाजपा को नकारा था. इसमें 15 फीसदी अल्पसंख्यक वोट हटा दें तो भी 52 प्रतिशत हिंदू मतदाता भाजपा के विरोध में थे. इसलिए यह कहना गलत होगा कि कांग्रेस अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की वजह से हारी थी.

उन्होंने कहा, इस गलत धारणा के लिए कि अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की वजह से हिंदुओं ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया, कांग्रेस के नेता एके एंटनी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने कथित तौर पर अपनी रिपोर्ट में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को कांग्रेस की हार का एक कारण बताया था. यादव ने कहा कि 2014 में भी हार का मुख्य कारण भाजपा विरोधी मतों का बिखराव था.

विपक्ष की एकजुटता में अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भाजपा की अगुवाई वाले राजग गठबंधन में शामिल होने के विरोध में अपनी अलग राह बनाकर उन्होंने साझा विरासत बचाओ अभियान शुरू किया है. इसे विपक्ष की एकजुटता का कारगर मंच बताते हुए यादव ने इसके देशव्यापी विस्तार की प्रतिबद्धता व्यक्त की.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)