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यूपी चुनाव: चार साल बाद भी निर्भया के गांव को वादों के सिवा कुछ न मिल सका

निर्भया बलात्कार कांड के चार साल बाद भी उनके गांव मेदौरा कलां की हालत जस की तस है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और दूसरे नेताओं की ओर से किए गए वादे अभी भी ज़मीन पर नहीं उतरे हैं.

Nirbhaya Parents

निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्री सिंह. निर्भया के माता-पिता और भाई अब दिल्ली में रहते हैं, जबकि दादा और बाकी रिश्तेदार पैतृक गांव में ही रहते हैं. (फाइल फोटो: पीटीआई)

विधानसभा चुनाव के छठे चरण में चार मार्च को पूर्वांचल के बलिया ज़िले के लोग मतदान करेंगे. ये वही ज़िला है जिसमें निर्भया का गांव मेदौरा कलां पड़ता है. निर्भया बलात्कार कांड के बाद उनके गांव की सूरत बदलने की बात कही गई थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं.

साल 2012 में निर्भया बलात्कार कांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला सुरक्षा पर बहस छिड़ गई थी. निर्भया मामले के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का मेदौरा कलां गांव भी चर्चा का विषय बन गया था. यह गांव निर्भया का गांव है.

निर्भया के अंतिम संस्कार के बाद जनवरी 2013 में कई राजनीतिज्ञों जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शामिल थे, ने निर्भया के गांव आकर उनके परिवार को सांत्वना दी थी.

इन राजनीतिज्ञों ने गांव को संवारने के लिए कई वादे भी किए थे. जैसे- गांव में इंटर कॉलेज का निर्माण, सड़क निर्माण. साथ ही निर्भया के परिवार के कुछ सदस्यों को नौकरी देने का वादा किया गया था.

उस ख़ौफनाक हादसे को बीते अब चार साल हो चुके हैं लेकिन आज भी गांव की छात्राओं को नज़दीकी स्कूल के लिए 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. गांव में एक इंटर कॉलेज के निर्माण का भी वादा किया गया था पर अभी तक यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है.

निर्भया की 13वीं के एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मेदौरा कलां पहुंचे थे. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में निर्भया के दादा लाल सिंह का कहना है, ‘मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और इंटर कॉलेज खोलने का वादा किया था. साथ ही परिवार के चार लोगों को सरकारी नौकरी देने का भी वादा कर गए थे.’

गांव के निवासी अजय कुमार पांडेय का कहना है, ‘प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुला तो है लेकिन ज़रूरत के समय यहां से कोई मदद नहीं मिलती है.’ गांव की नैना देवी कहती हैं, ‘पीएचसी से सिर्फ छोटी-मोठी बीमारियों की ही दवा मिल पाती है. अक्सर हमें वहां से निराश लौटना पड़ता है.’

जिला स्कूल निरीक्षक रमेश कुमार सिंह का कहना है, ‘इंटर कॉलेज के निर्माण के लिए ज़मीन का चुनाव कर लिया गया है. कॉलेज निर्माण की योजना भेजी जा चुकी है पर अब तक सरकार की तरफ से इसे मंज़ूरी नहीं मिल सकी है.’

निर्भया के माता-पिता और भाई अब दिल्ली में रहते हैं, जबकि दादा और बाकी रिश्तेदार पैतृक गांव में ही रहते हैं.

(यह रिपोर्ट मूल से टाइम्स आॅफ इंडिया में प्रकाशित हुई)