राजनीति

तीन तलाक़ विधेयक पास हुए बिना ही राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

शीतकालीन सत्र की 13 बैठकों के दौरान 41 घंटे से अधिक समय तक उच्च सदन की कार्यवाही चली तो हंगामे के कारण कामकाज के 34 घंटों का नुकसान हुआ.

New Delhi: Parliament during the first day of budget session in New Delhi on Tuesday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI2_23_2016_000104A)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राज्‍यसभा शुक्रवार को अनिश्चितकाल तक के लिए स्‍थगित हो गई है. इसके चलते तीन तलाक बिल लटक गया है. पिछले साल 15 दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र के दौरान उच्च सदन में हंगामे के कारण कामकाज के 34 घंटों का नुकसान हुआ.

यही नहीं जीएसटी संशोधन बिल भी राज्‍यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक के लिए स्‍थगित होने के चलते लटक गया है. सभापति ने गतिरोध खत्‍म करने के लिए सरकार और विपक्ष की बैठक बुलाई थी जो बेनतीजा रही.

सभापति एम वेंकैया नायडू ने हंगामे पर चिंता जताते हुए कहा कि बाधायें लोकतंत्र का हिस्सा नहीं हैं.

नायडू ने सदन में कामकाज के घंटों में इजाफे पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए काम की गति को आगे भी जारी रखने का भरोसा जताया. उन्होंने कहा हम सभी के लिए यह समीक्षा, स्मरण और आत्मावलोकन करने का विषय है कि हमने सदन की कार्यवाही का संचालन कैसे किया.

उन्होंने सभी सदस्यों को राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा आप मुझसे इस बात से सहमत होंगे कि भले ही संसद राजनीति का एक महत्वपूर्ण संस्थान है, किन्तु यह विशिष्ट अर्थों में राजनीति का विस्तार नहीं हो सकता, जो गहरे विभाजन और विद्वेष से भरी होती है.

नायडू ने इस सत्र के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ समूचे सदन ने प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के उच्च पदों की गरिमा और सम्मान को बरकरार रखने की प्रतिबद्धता का पालन किया, वहीं कार्यवाही के दौरान बाधायें उत्पन्न होने के कारण कामकाज का बहुमल्य समय नष्ट भी हुआ.

उन्होंने सभी सदस्यों से सदन में बहस के दौरान लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि सभी को इस बारे में आत्म अवलोकन करना चाहिए.

शीतकालीन सत्र की कार्यवाही का ब्योरा पेश करते हुए सभापति ने कहा कि इस सत्र में 13 बैठकें हुईं. इन बैठकों में बाधाओं और स्थगन के बावजूद नौ सरकारी विधेयकों को पारित करने के अलावा जनहित से जुड़े विशेष उल्लेख के 28 मामले उठाये गए.

नायडू ने बताया कि इस सत्र में 19 निजी विधेयक पेश करने के साथ रोजगार के अधिकार को संविधान के तहत मूल अधिकार बनाने की मांग वाले निजी विधेयक पर लंबी चर्चा भी हुई.

शीतकालीन सत्र की 13 बैठकों के दौरान 41 घंटे से अधिक समय तक सदन की कार्यवाही चली, जबकि राज्यसभा से दो सदस्यों की अयोग्यता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में प्रधानमंत्री की कथित टिप्पणी सहित अन्य मामलों पर सदन में उत्पन्न गतिरोध के कारण लगभग 34 घंटों तक कामकाज बाधित रहा.

इस दौरान वायु सेना के मार्शल एवं राज्यसभा के 12 पूर्व सदस्यों के निधन पर सदन में शोक व्यक्त किया गया. वहीं, मंत्रिमंडल में शामिल किए गए 12 नए मंत्रियों का सदन में परिचय कराया गया. जबकि राज्यसभा की सदस्यता का कार्यकाल पूरा कर सेवामुक्त हो रहे तीन सदस्यों डा कर्ण सिंह, जनार्दन द्विवेदी और परवेज हाशिमी को सदन में विदाई दी गई. तीनों सदस्यों का कार्यकाल आगामी 27 जनवरी को समाप्त हो रहा है.

इस सत्र में कंपनी संशोधन विधेयक, भारतीय प्रबंध संस्थान और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधि विशेष उपबंध संशोधन विधेयक सहित नौ सरकारी विधेयक पारित किए गए. इसके अलावा जनहित से जुड़े 28 विशेष उल्लेख के मामले सदन में पेश किए गए.

इस दौरान सभापति की अनुमित से 51 अन्य मामले भी उठाये गए. इस सत्र में अल्पकालिक चर्चा के दौरान देश की आर्थिक स्थिति और दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या पर छह घंटे तक बहस हुई.

सत्र के दौरान 19 निजी विधेयक पेश किए गए. इनमें से काम के अधिकार को संविधान के तहत मूल अधिकार घोषित करने की मांग वाले निजी विधेयक पर चर्चा हुई हालांकि इसे विचारार्थ स्वीकार किये जाने का प्रस्ताव मतविभाजन में गिर गया.

इस सत्र में विभिन्न संसदीय समितियों की 110 रिपोर्ट और वक्तव्य सदन पटल पर पेश की गईं. जबकि पूरे सत्र में 210 तारांकित प्रश्न, 2239 अतारांकित प्रश्न पूछे गये और इनके उत्तर सदन पटल पर दिए गए. इनमें से 46 तारांकित प्रश्नों के मौखिक जवाब भी दिए गए.

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