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जब सांसदों का सामान चोरी हो रहा है तो आम रेल यात्रियों का क्या होता होगा?

महिला सांसदों ने ट्रेनों में उनके सामान की चोरी का मामला राज्यसभा में उठाया. सरकार ने स्वीकार किया कि शताब्दी और राजधानी ट्रेनों में खानपान संबंधी नौ हज़ार शिकायतें मिलीं.

Porters transport goods on a hand-pulled trolley to load onto a train at a railway station in Kolkata July 8, 2014.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: राज्यसभा में शुक्रवार को दो महिला सांसदों ने रेल गाड़ियों में चोरी की घटनाओं में हो रहे इजाफ़े का ज़िक्र करते हुए ख़ुद उनका सामान भी चोरी होने का मामला उठाया.

सांसदों का कहना था कि जब चोरों की नज़र से सांसदों का सामान नहीं बच रहा है तो आम रेल यात्री के साथ क्या होता होगा, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है.

प्रश्नकाल के दौरान माकपा की झरना दास ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से पूरक प्रश्न पूछते हुए कहा कि वह राजधानी ट्रेन के प्रथम श्रेणी कोच में दिल्ली से कोलकाता जा रही थीं. रास्ते में उनका सामान चोरी कर लिया गया.

उन्होंने कोलकाता जाकर इसकी रिपोर्ट लिखवाई. इसके बाद ही वह त्रिपुरा गईं. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद अब तक उनके सामान का कोई सुराग नहीं लगा.

उन्होंने कहा कि ट्रेनों में सुरक्षा के नाम पर मात्र दो सिपाही होते हैं. स्टेशनों पर भी रेलवे पुलिस के थानों में महज़ दो तीन सिपाही मिलते हैं. उन्होंने दावा किया कि रेलवे पुलिस थानों में पुलिस से ज़्यादा चूहे और कॉक्रोच दिखाई देते हैं.

इस पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सुरक्षा राज्य का विषय है. रेलवे पुलिस की ज़िम्मेदारी केवल रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा करना है. चोरी आदि के मामलों में रेलवे पुलिस राज्य पुलिस की मदद करती है. राज्य पुलिस ही चोरी आदि के मामलों में प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई करती है.

पीयूष गोयल ने कहा कि चोरी जिस राज्य में हुई, उससे पता चलता है कि वहां कानून व्यवस्था की क्या स्थिति है. उन्होंने कहा कि रेलवे सारी ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर सीसीटीवी लगाने की योजना बना रही है. इससे यात्रियों एवं रेलवे की बेहतर सुरक्षा में मदद मिलेगी.

इसके बाद बीजद की सरोजिनी हेम्ब्रम ने भी पूरक सवाल पूछते हुए कहा कि उनका भी ट्रेन यात्रा के दौरान प्रथम श्रेणी की बोगी से सामान चोरी हो गया.

उन्होंने कहा कि जब सांसदों का सामान ही ट्रेन में सुरक्षित न हो तो आम रेल यात्रियों की क्या स्थिति होगी इसकी कल्पना की जा सकती है. उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि ट्रेनों में यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा के लिए क्या प्रबंध किए जा रहे हैं.

सपा के रामगोपाल यादव ने कहा कि ऐसा देखने में आ रहा है कि दिल्ली एवं कानपुर के बीच ज़हरखुरानों के कुछ संगठित गिरोह चलते हैं जो लोगों को खाने के सामान में विषाक्त पदार्थ मिलाकर लूट लेते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को ट्रेनों में चलने वाले ग़ैरकानूनी सामान विक्रेताओं पर भी पाबंदी लगानी चाहिए.

इसके जवाब में गोयल ने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेल सुरक्षा बल आपस में सामंजस्य कायम कर रेलगाड़ियों में अपराधों को रोकने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं.

उन्होंने स्वीकार किया कि रेलगाड़ियों में अपराधों को अंजाम देने वाले अराजक तत्व यात्रा का वैध टिकट लेकर सवार होते हैं. ऐसे में सुरक्षाकर्मियों के लिए इन्हें सामान्य अपराधियों से अलग कर इनकी पहचान कर पाना मुमकिन नहीं होता है.

गोयल ने इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी सदस्यों से रेल यात्रा के दौरान किसी भी तरह की वारदात या साफ-सफाई सहित अन्य असुविधाओं की शिकायतें विभिन्न माध्यमों से करने की अपील की जिससे इन पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके. गोयल ने कहा कि इसके लिए सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप और पत्राचार को माध्यम बनाया जा सकता है.

शताब्दी और राजधानी रेलगाड़ियों में खानपान संबंधी नौ हज़ार शिकायतें मिलीं: सरकार

सरकार ने स्वीकार किया कि रेलवे को राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में खानपान से जुड़ी गड़बड़ियों की पिछले साल 31 अक्टूबर तक नौ हज़ार से अधिक शिकायतें मिली हैं.

रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि साल 2014 से अक्टूबर 2017 के बीच दोनों प्रीमियम रेलगाड़ियों में भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी 9804 शिकायतें मंत्रालय को मिली हैं.

उन्होंने कहा कि इन पर कार्रवाई करते हुए पिछले तीन साल में 3486 केटरर पर अर्थदंड लगाया गया जबकि 3624 को चेतावनी दी गई, खानपान संबंधी 10 ठेके रद्द किए गए और 1134 केटरर को उचित परामर्श जारी किया गया.

गोहेन ने बताया कि 467 शिकायतें आधारहीन पाई गई जबकि 44 में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.

एक अन्य सवाल के जवाब में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार ने रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के मानकों को फिर से तय किया है.

उन्होंने बताया कि स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही, राजस्व उगाही और महत्व के आधार पर स्टेशनों को फिर से श्रेणीबद्ध किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में कई स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिह्नित किया गया है.

स्टेशन पुनर्विकास कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 23 स्टेशनों का क्षेत्रीय रेलमंडलों द्वारा पुनर्विकास किया जाएगा. इस दौरान सपा के रेवती रमण सिंह द्वारा स्टेशन और रेलगाड़ियों में गंदगी का मुद्दा उठाने पर गोयल ने कहा कि रेल विभाग ने सफाई की ज़िम्मेदारी निजी क्षेत्र को दी है.

उन्होंने बताया कि सेवाशर्तों में निजी ठेकेदारों की जवाबदेही तय की गई है. उन्होंने सदस्यों से यात्रा संबंधी परेशानियों और शिकायतों से विभिन्न माध्यमों से मंत्रालय को अवगत कराने की अपील की जिससे इस पर यथाशीघ्र कार्रवाई की जा सके और अन्य यात्री भी सेवा संबंधी शिकायतें बढ़-चढ़ कर करने के लिये प्रेरित हों.

एक अन्य प्रश्न के जवाब में गोहेन ने कहा कि भारतीय इस्पात निगम लिमिटेड रेलवे पटरियों की आपूर्ति में कमी के कारण सरकार ने चार लाख मीट्रिक टन पटरियों की आपूर्ति के लिए वैश्विक निविदा जारी की हैं.

रेलवे स्टेशनों पर विश्राम कक्ष की कमी पर संसदीय समिति ने चिंता जताई

देश में ए श्रेणी के करीब एक चौथाई रेलवे स्टेशनों पर विश्राम कक्ष की सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि विश्राम कक्ष स्टेशनों पर मुहैया करवाई जाने वाली आवश्यक सुविधाओं में से एक है, ऐसे में उन रेलवे स्टेशनों की पहचान की जानी चाहिए जहां इस सुविधा का विस्तार किया जा सके.

संसद में हाल में पेश रेल संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल 8495 स्टेशनों में से केवल 559 स्टेशनों पर ही विश्राम कक्ष की सुविधा है.

समिति का मानना है कि सभी स्टेशनों पर यह सुविधा न तो अपेक्षित है और न ही बाध्यकारी है लेकिन ए श्रेणी के सभी स्टेशनों पर विश्राम कक्ष की सुविधा मुहैया करवाई जानी चाहिए क्योंकि वर्तमान में लगभग एक चौथाई ए श्रेणी के स्टेशनों पर विश्राम कक्ष नहीं है.

इसके अतिरिक्त समिति यह भी महसूस करती है कि चूंकि विश्राम कक्ष स्टेशनों पर मुहैया करवाई जाने वाली आवश्यक सुविधाओं में से एक है, ऐसे में रेलवे को ऐसे स्टेशनों की पहचान करनी चाहिए जहां इस सुविधा का विस्तार इसकी उपयोगिता के आधार पर किया जा सकता है.

समिति ने सिफारिश की है कि सभी ए श्रेणी के स्टेशनों पर जल्द से जल्द विश्राम कक्ष की सुविधा मुहैया करवाई जानी चाहिए और शेष स्टेशनों पर जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां संबंधित जन प्रतिनिधियों के साथ परामर्श से स्टेशनों को चयनित करके उनकी पहचान की जानी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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