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मेडिकल कॉलेज रिश्वत घोटाला: दिल्ली-इलाहाबाद के ‘मंदिर’ में ‘प्रसाद’ चढ़ाने का खुलासा

मनचाहे फैसले के लिए ‘प्रसाद तो लगेगा. हम प्रसाद देंगे, प्रसाद तो देना ही है.’ सीबीआई द्वारा हासिल टेप में न्यायपालिका में बैठे सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने वालों को यह कहते सुना जा सकता है.

Medical Bribery Scam

Clockwise from top left: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच, प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट का कॉलेज, सीबीआई दफ्तर, सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई/pimslko.com)

नई दिल्ली: मेडिकल कॉलेज रिश्वत मामले में तीन आरोपियों- ओडिशा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज आईएम कुदुस्सी, दलाल विश्वनाथ अग्रवाल और प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के बीपी यादव के बीच की बातचीत से से यह बात उजागर हुई है कि कॉलेज अधिकारियों ने वास्तव में अनुकूल फैसला कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों को रिश्वत देने की योजना बनाई थी.

फोन पर हुई बातचीत की नकल (ट्रांस्क्रिप्ट) द वायर  के हाथ लगी है. यह ट्रांस्क्रिप्ट इस मामले की जांच कर रही सीबीआई के पास उपलब्ध है. भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जजों के बीच चल रहे संघर्ष के मद्देनजर यह मामला और ज्यादा अहमियत अख्तियार कर लेता है.

गौरतलब है कि इन चार जजों ने 12 जनवरी को जस्टिस मिश्रा पर ‘बिना किसी तर्क के चयनित/मनमाने तरीके से जजों को ‘उनकी पसंद की’ बेंचों में काम देने और इस प्रक्रिया में वरिष्ठ जजों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.

रिश्वत घोटाला में प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट पर वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारियों को रिश्वत देने की कोशिश करने का आरोप है. यह मामला न्यायपालिका में भ्रष्टाचार जैसे वर्जित विषय के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक बन गया है.

तीन आरोपियों के बीच की फोन पर की यह बातचीत 3 सितंबर और 4 सितंबर को यानी ऐसे समय में हुई, जब ट्रस्ट चालित मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने केंद्र के फैसले के खिलाफ (केंद्र सरकार ने इस कॉलेज पर मेडिकल छात्रों का दाखिला करने से रोक लगा दी थी, क्योंकि यह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा शर्तों को पूरा न करने का दोषी पाया गया था) सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट, दोनों जगह याचिका दायर की थी.

अगस्त 2017 से सितंबर 2017 के बीच चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट के अनुकूल कई फैसले किए गए. ये सारे फैसले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंचों द्वारा दिए गए.

मेडिकल कॉलेज रिश्वत घोटाले का इतिहास

केंद्र सरकार ने 46 संस्थानों पर 2017 से शुरू हो रहे अकादमिक सत्र से दो सालों तक छात्रों का दाखिला करने से रोक लगा दी थी. ग्लोकल मेडिकल कॉलेज उन 46 संस्थानों में से ही एक था. यह निर्णय घटिया बुनियादी सेवाओं और आवश्यक अहर्ताओं को पूरा करने में इनकी नाकामी को लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की उस रिपोर्ट के बाद किया गया. लेकिन, अगस्त, 2017 के बाद से कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट, दोनों द्वारा कई राहतें दी गई हैं.

1 अगस्त, 2017: चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच कॉलेज को लेकर एमसीआई द्वारा की गई सिफारिशों की पुनर्समीक्षा करने का आदेश दिया. 3 अगस्त को केंद्र सरकार ने अपनी निगरानी समिति (ओवरसाइट कमिटी) के जरिए एक बार फिर कॉलेज का पक्ष सुना और इस बार भी ग्लोकल मेडिकल कॉलेज पर छात्रों का दाखिला लेने पर लगे प्रतिबंध को बरकरार रखा गया. साथ ही एमसीआई को कॉलेज द्वारा जमा कराई गई 2 करोड़ की बैंक गारंटी को भुना लेने की इजाजत भी दे दी गई.

24 अगस्त, 2017:  प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट ने केंद्र के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जिसे उसने बाद में वापस ले लिया. चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच ने ट्रस्ट को अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत देते हुए उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी, जिसका दरवाजा ट्रस्ट पहले ही खटखटा चुका था. एक खास कॉलेज को दी गई राहत उस समय कइयों को असामान्य लगी थी, क्योंकि उसी समय भारत के मुख्य न्यायाधीश कई दूसरे कॉलेजों के मामलों की भी सुनवाई कर रहे थे, जिन्हें छात्रों का दाखिला करने की इजाजत देने से केंद्र ने इनकार कर दिया था.

25 अगस्त, 2017: अगले ही दिन, जस्टिस नारायण शुक्ला के नेतृत्व वाली इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने ट्रस्ट को एडमिशन काउंसलिंग आयोजित करने की इजाजत दे दी और एमसीआई से इसकी बैंक गारंटी को न भुनाने के लिए कहा.

29 अगस्त, 2017: जब एमसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की, जो जस्टिस मिश्रा की बेंच ने हाई कोर्ट में ट्रस्ट की रिट याचिका को समाप्त कर दिया, मगर ट्रस्ट को संवधिान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की शरण में आने में इजाजत दे दी. ट्रस्ट ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश का कोई फायदा नहीं उठा रहा है, सिवाय इसके कि एमसीआई बैंक गारंटी को नहीं भुनाए. हालांकि, याचिका का निपटारा करते हुए संभावित उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित करने की अनुमति देनेवाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द नहीं किया गया.

4 सितंबर, 2017: चीफ जस्टिस मिश्रा ने ट्रस्ट द्वारा दायर नई रिट याचिका पर नोटस जारी किया.

18 सितंबर, 2017: (आदेश को 21 सितंबर, 2017 को अपलोड किया गया): चीफ जस्टिस मिश्रा की बेंच ने 2017-18 के अकादमिक सत्र के लिए कॉलेज की मान्यता को बहाल करने से इनकार कर दिया, मगर एमसीआई को बैंक गारंटी को भुनाने से रोक दिया. साथ ही यह भी कहा कि ‘मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया समय सारणी के हिसाब से 2018-19 के अकादमिक सत्र के लिए एलओपी (लैटर ऑफ परमिशन) (छात्रों का दाखिला लेने के लिए अनुमति पत्र) देने को लेकर विचार करने के लिए संस्थान में जांच दल भेजेगा.’  गौरतलब है कि केंद्र का प्रतिबंध मूल रूप से 2017-18 और 2018-19 के लिए था.

सीबीआई द्वारा कुदुस्सी, यादव और अग्रवाल और अन्यों के खिलाफ वरिष्ठ लोक पदाधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में एफआईआर दायर करने के दो दिन बाद 18 सितंबर का फैसला कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया. सीबीआई ने कुदुस्सी और अन्यों को गिरफ्तार कर लिया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जज- जस्टिस नारायण शुक्ला और जस्टिस वीरेंद्र कुमार इसकी जांच का सामना कर रहे हैं. इस सिलसिले में की गई छापेमारी में जांच एजेंसी को 2 करोड़ नकद और कई दोष साबित करने वाले दस्तावेज मिले.

क्या है टेलीफोन बातचीत में

3 और 4 सितंबर की तारीख की आरोपियों के बीच टेलीफोन बातचीत की सीबीआई रिकॉर्ड से यह साफ पता चलता है कि इस ट्रस्ट का मुख्य बिचौलिया, कुदुस्सी और अग्रवाल से कॉलेज को पुनः मान्यता दिलाने और एमसीआई को बैंक गारंटी की राशि भुनाने से रोकने के लिए सौदेबाजी कर रहा था.

विश्वनाथ अग्रवाल और कुदुस्सी के बीच 3 सितंबर की इस बातचीत का उदाहरण देखिए:

विश्वनाथ: हां उसमें, उनका कहां  कौन सा मंदिर में है. इलाहाबाद का मंदिर में है, दिल्ली का मंदिर में है. 

कुदुस्सी: नहीं-नहीं मंदिर में किसी का नहीं है. अभी तो होना है. 

विश्वनाथ: हां हां हां! तो उसका अब कर लीजिए बात वो तो कर देंगे, वो तो मेरा बात हुआ था वहां पर.

कुदुस्सी: कहा है पक्का 

विश्वनाथ: हां हां, उसमें आप एक काम अभी देखिये न. 100 % ये लो, जो हमारा कैप्टेन है कैप्टेन का थ्रू (जरिए) में हो रहा है, तो प्रॉब्लम क्या है बोलिए.

यह बातचीत कथित तौर पर 3 सितंबर को हुई. ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका को इसके एक दिन बाद, 4 सितंबर, 2017 को स्वीकार किया गया. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसे संविधान की धारा 32 के तहत स्वीकृत किया गया. वह व्यक्ति जिसकी पहचान उजागर नहीं है, जिसके पास कोर्ट से अनुकूल आदेश दिलवाने की जिम्मेदारी थी, उसे इस बातचीत में ‘कप्तान’ कह कर संबोधित किया जा रहा है.

‘मुश्किल यह है कि चायवाले की सरकार की सब पर नज़र है’

3 और 4 तारीख को कुदुस्सी और विश्वनाथ अग्रवाल के बीच फोन पर हुई बातचीत से पता चलता है कि ये दोनों सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट की अपील के बारे में बात कर रहे थे और यादव से बड़ी रकम के भुगतान को लेकर सौदेबाजी कर रहे थे. रिश्वत देने वाले और जो उस रिश्वत को लेनेवाले हैं, दोनों ही ‘चायवाले की सरकार’ से डरे हुए नजर आते है, क्योंकि ‘मुसीबत यह है कि उसकी नजर सब पर है.’

यादव: तो उस दिन हम हाईकोर्ट इसलिए गए थे कि भाई देखिये उस समय उसपे पैसे फंसे थे नहीं. मैने क्लियर कट बात करी. है न तो इसलिए चले गए थे तो अब वहां से तो उन्होंने आदेश किया, आप पे आके इन्होंने ख़ारिज कर दिया तो हम फिर से ख़ारिज कर दिया इन्होंने कहा फ्रेश पिटीशन डालो. आर्टिकल 32 में फ्रेश पिटीशन डाला है उसकी डेट थी. उसको उन्होंने बढ़ा के 11 तारीख कर दिया है. तो हम का चाहिए हैं कि कल हम आपका टिकट बनवा देते हैं और उस बार का सॉरी विश्वनाथ जी दूंगा मैं आपको. हूं. अब ये काम हमारा करा दोगे आप.

विश्वनाथ: नहीं काम तो 100 क्या 500% गारंटी है लेकिन सामान तो पहले देना होगा और वो मिलने को मना कर रहे हैं क्योंकि जो सरकार चल रहा चाय वाले का वो सबको नजर रखा है. प्रॉब्लम हो जायेगा.

यादव: हम मिलेंगे नहीं हम मिलना नहीं चाहते

विश्वनाथ: हां मिलाने कि नहीं कि वो घर में जायेंगे. वो बोले कि वो सब दिखने का विश्वास नहीं कि काम 100% कर देंगे तब बात हुआ था. तो तभी तो हम दौड़ के गया था दौड़ के आया था जी.

यादव: नहीं नहीं. ठीक है अग्रवाल जी, तो हम आपकी टिकट भिजवा देते हैं कल आप आ जायेंगे. हां, आप बताये तो कल हम आपको

यादव: अरे मैं पहले से ही चाहता हूं कन्फर्म हो जाए. बहुत सारे लोग हैं तो मैं चाहता हूं कि जज साहब से हमारे संबंध अच्छा है तो जज साहब की बातों पे हम ज्यादा भरोसा करते हैं.

विश्वनाथ: नहीं नहीं. हम तो कन्फर्म कर देंगे नहीं तो हम बोलते भी नहीं. क्योंकि हम लोग यह काम रेस्टो जी देखिये ये माने कि ट्रेड के लिए जरूरत ही जरूरत है मेडिकल का आदमी की जरूरत. तो इसमें करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन कुछ क्या है, वहां पर कुछ वो लोग उनका वहां बिना प्रसाद लगाए कुछ नहीं होगा.

यादव: नहीं प्रसाद तो लगेगा, प्रसाद तो देंगे, प्रसाद तो देना ही है.

विश्वनाथ: काम तो 100% हो जाएगा लेकिन हम कल परसों बोलने नहीं जाएंगे. वो आप सामान तैयार कीजिये… दे देंगें तो हम लोग करवा देंगे… 100% करवा देंगे.. कोई प्रॉब्लम नहीं है माल व तभी तो बोलेंगे.

 

…कुदुस्सी: वो कह रहे हैं उन्होंने अपना पिटीशन डाला था आज, तो सोमवार की डेट लगाई है उन्होंने, तो ये कह रहे है कि कितना क्या होगा और कैसे होगा और दूसरी चीज़ कि हमें कैसे विश्वास होगा कि हां हमारा काम पक्का-पक्का होगा. ये भी बात है.

विश्वनाथ: ये मेडिकल  वाले हैं क्या?

कुदुस्सी: हां हां.

विश्वनाथ: हां तो वो आने वाले सोमवार को लगा है.

विश्वनाथ: हां वो रिव्यू है न.

कुदुस्सी: न न वो पिटीशन है ,आर्टिकल 32 का.

विश्वनाथ: हां हां हां! विश्वास तो मिलता नहीं है सामान देंगे तो काम 100 % हो जाएगा.

कुदुस्सी: नहीं वो कह रहे हैं कि पैसा हो तो साथ जाए कि घर के बाहर जाए, कोई घर के अंदर जाए, कोई घर के अंदर जाए कोई बात करे.

विश्वनाथ: नहीं वो सही बात है, लेकिन वो ठीक नहीं है, वो जब आपका विश्वास नहीं कर रहा है हमको तो

कुदुस्सी: नहीं नहीं. हमारा विश्वास तो कर रहा है लेकिन वो कह रहा है न कि दूसरा थर्ड पर्सन के पास मामला होगा तो कैसे होगा क्योंकि वो कह रहे हैॆ कि अगर हमारा काम नहीं हुआ तो तब तो बिलकुल ही एकदम ही ख़राब हो जायेगा स्थिति हमारी.

विश्वनाथ: नहीं नहीं. काम तो होगा नहीं तो हम लोग क्या हम लोग को क्यों माने आग में कूदने के लिए इच्छा हो रहा है क्या बोलिए. काम 100% होगा तभी तो इसका मदद कर रहा है.

कुदुस्सी: हां देखिए देख लो आप ये बात, हा हा हा.

विश्वनाथ: हां हां, काम 100% हो जायेगा वहां पर हम लोग का अभी क्या बोलते हैं जो उनसे कुछ बात हुआ है, तभी तो आप लोग को बोल रहे हैं, नहीं तो क्यों बोलते हम लोग.

यहां वे दोनों 4 सितंबर के बाद के ‘सोमवार’ यानी 11 सितंबर के बारे में बात कर रहे थे, जिस दिन ट्रस्ट का मामला सुनवाई के लिए लगा हुआ था. 11 सितंबर को, जस्टिस मिश्रा के नेतृत्व वाली बेंच ने मामले को 18 सितंबर को लगाने का निर्देश दिया, जब उन्होंने अंतिम आदेश दिया.

धनराशि को लेकर हुई सौदेबाजी

पूरी बातचीत के दौरान, तीनों आरोपियों को दिए जाने वाले पैसे को लेकर सौदेबाजी करते हुए सुना जा सकता है. मिसाल के लिए, यादव, विश्वनाथ अग्रवाल और कुदुस्सी के बीच बातचीत के इस हिस्से में, वे इस बारे में बात कर रहे थे कि एक जज को पैसा किस तरह से देना है और इसे कहां दिया जाना चाहिए. ऐसा लगता है कि पैसे के लिए बही, गमला और प्रसाद जैसे कई शब्दों का प्रयोग किया गया.

यादव: बताइये क्या देना पड़ेगा. मेरा एक ही कॉलेज है मैं दूसरे का भरोसा नहीं कर सकता हूं.

विश्वनाथ: एक का करवा दूंगा.

यादव: साफ से बता दो क्या देना पड़ेगा, हमारी ज्यादा कैपेसिटी तो नहीं है. बात करवाओ. अब साहब है तो बात कराओ, बात करते हैं साहब से.

विश्वनाथ: नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं है. हम करवा देंगे काम.

विश्वनाथ: नहीं वो तो एक का बोले! एक का तो हम बात किये थे. वो तो बोले तीन, 2.5 वहां देना है 50 अपना रखना है.

कुदुस्सी: तो एडवांस कितना देना है.

विश्वनाथ: एडवांस तो अब… वो रिव्यू पिटीशन का उस समय बोले कि 100 आदमी दे दो. रिव्यू हो जायेगा तो आपको भी मालूम हो जायेगा! फिर हम…

कुदुस्सी: तो एक काम करलो न आप! आप एक बात कर लो.  इनका सोमवार का लगा है! 3-4 दिन की डेट आगे बढ़ा दो.

विश्वनाथ: तो कुछ आदमी भेज देंगे तो 3-4.. 2 आदमी दे दे तो 3-4 दिन का डेट बढ़ा देंगे.

विश्वनाथ: सोमवार को फाइनल ही करवा देंगे. ये आपने को दे सामान कुछ 2-2.5 प्रॉब्लम नहीं है, कुछ आर्डर करवा देंगे. पापा देखिये न इधर का.. न आपको प्रॉब्लम में डालेंगे न मेरे को… क्योंकि वहां सामान का बात कर लेंगे नहीं पहुंचेगा न तो हमको बहुत प्रॉब्लम में फंस जायेगा. काम अगर नहीं कर पाएंगे तो इधर का सामान लौटा देंगे. काम नहीं करने का कोई चांस नहीं! हमारा क्लियर बात हुआ है कि अलग कर देंगे.

कुदुस्सी: लो बात करो इनसे

विश्वनाथ: हां क्लियर बात हुआ है वो 3 का हिसाब से. वो 3 से कम में करेंगे नहीं.

यादव: हेलो

विश्वनाथ: हां जी. वो हम लोग का लास्ट टाइम भी बात सर वो एक के लिए 3 मांग रहे थे देने से टोटल अलग कर देंगे जो प्रेयर मांगेंगे… मैं उनको बोला था कि 5 का उसी टाइम बात कर रहे थे. कि 15 का बात वो कर रहे थे. लास्ट टाइम भी वही बात कर रहे थे.

यादव: तो पूरा पैसा एडवांस में जाएगा.

विश्वनाथ: सर मैं वहां पे कोई रिस्क नहीं लेना चाहता हूं क्योंकि वो 100% गारंटी काम है आप वहां दे देंगे न आपका काम 100% गारंटी हो जायेगा… किन्तु परन्तु कुछ नहीं न, काम हो जायेगा तो उसके बाद न सर 10-15 महीने बैठेंगे, 14-15 काम करवाइये आपको भी विश्वास हो जायेगा वो 101% कर देंगे.

यादव: वो कब मैं दे दूं बताओ.

विश्वनाथ: 11 तारीख को है तो हम अभी 7-8 तारीख को पहुंच सकता हूं, करवा देंगे आपका 11 तारीख को काम ही ख़त्म हो जायेगा.

यादव: 2.5 तक करवा दो न यार 2.5 तक मेरी कैपेसिटी है करवा दो.

विश्वनाथ: सर आपको हम झूठ नहीं बोलते 5 का 18 से बात हुआ था, फिर लास्ट में 3 के हिसाब से 15 से बात हुआ था वो हम उनको कन्विंस करके करवाए कि और चार आएंगे.

यादव: सुनिए आप हमसे 2 अभी ले लीजिये और जैसे ही आर्डर मिल जायेगा एडमिशन कर लेंगे हम जज साहब के यहां 1 करोड़ पहुंचा देंगे. आपके यहां, कुदुस्सी साहब के यहां इस तरह से करवा दीजिये.

विश्वनाथ: सर मैं बात करके सुबह आपको कन्फर्म करता हूं. उनसे बात करके हम नहीं बोलेंगे.

सीबीआई के पास मौजूद बातचीत की नकल से पता चलता है कि रिश्वत देने और मामले के परिणाम को प्रभावित करने के लिए सौदेबाजी चल रही थी. यह साफ नहीं है कि क्या यह योजना सफल हुई या फिर इन सबका नतीजा क्या निकला? जो बात पता है, वह यह कि इस मामले में हर कदम पर प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के पक्ष में फैसला हुआ.

सीबीआई की प्राथमिक जांच रिपोर्ट

लेकिन, सीबीआई ने साफतौर पर यह आरोप लगाया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने ‘गैरकानूनी घूस’ ली.

8 सितंबर, 2017 को सीबीआई द्वारा दायर प्राथमिक रिपोर्ट में- जिसका एक हिस्सा द वायर  के पास है- कुदुस्सी से ‘गैरकानूनी घूस’ लेने के लिए इलाहाबाद के एक जज के नाम का उल्लेख किया गया है.

CBI Report Medical Bribery Scam

मेडिकल कॉलेज घूस मामले में 8 सितंबर 2017 को जारी सीबीआई की प्राथमिक जांच रिपोर्ट का अंश

प्राथमिक रिपोर्ट का कहना है, ‘सूत्रों ने यह जानकारी दी है कि श्री आईएम कुदुस्सी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस नारायण शुक्ला को इस मामले को रफा-दफा कराने के लिए संपर्क किया. सूत्रों ने यह भी बताया है कि श्री आईएम कुदुस्सी और श्री बीपी यादव ने इस मामले को लेकर जस्टिस श्री नारायण शुक्ला से 25.08.2017 की सुबह लखनऊ में उनके आवास पर मुलाकात की और गैरकानूनी घूस दी.’

इसमें यह भी कहा गया है:

‘सूत्रों ने आगे यह भी जानकारी दी है कि 25.08.2017 को प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका Misc.Bench No. 19870 of 2017 पर जस्टिस श्री नारायण शुक्ला की सदस्यता वाली एक बेंच द्वारा एक आदेश दिया गया. इस आदेश में याचिकाकर्ता के कॉलेज को लिस्टिंग की अगली तारीख यानी 31.08.2017 तक काउंसलिंग के लिए नोटिफाई (अधिसूचित) किए गए कॉलेजों की सूची नहीं हटाने का निर्देश दिया गया. साथ ही लिस्टिंग की अगली तारीख तक बैंक गारंटी को भुनाने के आदेश पर भी रोक लगा दी गई.’

इससे भी ज्यादा दिलचस्प ये है कि 29 अगस्त, 2017 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका को समाप्त कर दिए जाने के बाद जस्टिस शुक्ला से ‘घूस’ वापस दिलाने के लिए यादव, कुदुस्सी पर दबाव बनाते हुए दिखाई देता है.

सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार:

‘सूत्रों ने यह जानकारी भी दी है कि उपरोक्त घटनाक्रम के बाद ‘[यानी हाईकोर्ट की याचिका को समाप्त करने के बाद] श्री बीपी यादव, श्री आईएम कुदुस्सी और श्रीमती भावना पांडेय पर जस्टिस श्री नारायण शुक्ला को दिए गए गैरकानूनी घूस को वापस दिलाने के लिए मना रहे हैं.

सूत्रों ने यह भी बताया है कि श्री आईएम कुदुस्सी ने जस्टिस श्री नारायण शुक्ला को उपहार के तौर पर गैरकानूनी ढंग से दिए गए पैसे को लौटाने के लिए संपर्क किया. सूत्रों ने बताया कि जस्टिस श्री नारायण शुक्ला ने श्री आईएम कुदुस्सी को यह भरोसा दिलाया कि वे उन्हें मिली घूस का एक हिस्सा जल्दी ही लौटा देंगे.’

हाईकोर्ट जज के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत से मुख्य न्यायाधीश का इनकार

सूत्रों ने द वायर  को इस बात की पुष्टि की है कि सीबीआई ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट 8 सितंबर, 2017 को दायर की. उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई के अधिकारियों ने 6 सितंबर को जस्टिस शुक्ला के खिलाफ एफआईआर करने की इजाजत के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के सामने बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट्स और अन्य कागजात पेश किए.

लेकिन, उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने एजेंसी को एफआईआर दर्ज करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया और इस तरह से उन्होंने संभवतः जांच एजेंसी को उस समय जस्टिस शुक्ला को रंगे हाथों पकड़ने से रोक दिया, जब 7 सितंबर को उन्होंने कुदुस्सी को कथित तौर पर कुछ पैसे वापस किए थे.

सूत्रों ने यह दावा किया कि सीबीआई के लीगल ऑफिसर ने मुख्य न्यायाधीश द्वारा एजेंसी को जस्टिस शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की इजाजत न देने को लिखित रूप में दर्ज किया है. यहां यह गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश ने एक अलग मेडिकल कॉलेज से संबंधित मिलते-जुलते मामले में जस्टिस शुक्ला द्वारा दिए गए फैसलों के आधार पर उनके खिलाफ आंतरिक जांच का आदेश दिया है.

लेकिन, ऐसा लगता है कि प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट से जुड़े मामले में उनके खिलाफ किसी कार्रवाई की शुरुआत नहीं की गई है.

जस्टिस शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दायर करने के सीबीआई के आग्रह के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके कार्यालय की तरफ से कोई जवाब आने पर द वायर  द्वारा इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

सीबीआई की प्राथमिक जांच की रिपोर्ट सिर्फ किसी सूत्र पर आधारित है या विस्तृत जांच का नतीजा है, इसको लेकर अभी पूरी जानकारी नहीं है. लेकिन, यह स्पष्ट है कि मेडिकल कॉलेज ने कोर्ट में अपने अनुकूल फैसला कराने के लिए रिश्वत देने की पूरी कोशिश की.

पिछले साल नवंबर में, सुप्रीम कोर्ट तब जबरदस्त कोर्टरूम बहस का गवाह बना, जब जस्टिस जे. चेलमेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर द्वारा न्यायिक भ्रष्टाचार से जुड़ी एक याचिका, जिसमें मेडिकल कॉलेज रिश्वतखोरी का मामला भी शामिल था, की (सुनवाई के लिए) संवैधानिक पीठ से जस्टिस मिश्रा को अलग रखने के फैसले को चीफ जस्टिस द्वारा गठित एक पांच सदस्यीय बेंच ने रद्द कर दिया.

जस्टिस चेलमेश्वर और नज़ीर की बेंच ने अभूतपूर्व तरीके से याचिकाकर्ता कामिनी जायसवाल के इस आग्रह को मान लिया था कि मर्यादा की रक्षा के लिए जस्टिस मिश्रा उस बेंच के हिस्सा न हों, क्योंकि प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के मामले की सुनवाई की अध्यक्षता अब तक वे ही कर रहे थे.

जायसवाल की याचिका ने इस कथित घोटाले की जांच करने के लिए कोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच दल का गठन करने मांग की थी. उन्होंने बिचौलियों, एक अवकाश प्राप्त जज और वरिष्ठ लोक-पदाधिकारियों के बीच बातचीत के ब्यौरों को उजागर करनेवाली सीबीआई की एफआईआर के बाद यह याचिका दायर की थी

लेकिन, मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित बेंच ने यह कहा कि सिर्फ उनके पास ही किसी मामले का आवंटन करने का अधिकार है और कोई दूसरा जज इस बारे में फैसला नहीं कर सकता है. इसने उस समय बड़े विवाद को जन्म दिया था.

सीबीआई के पास मौजूद बातचीत कॉपी ऐसे समय में बाहर आई है, जब चार वरिष्ठ जजों ने मुख्य न्यायाधीश मिश्रा के अधीन कोर्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं. यह उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए मुद्दों पर और बहसों को जन्म देगा.

§

03.09.2017 को कुदुस्सी और विश्वनाथ के बीच हुई पूरी बातचीत

कुदुस्सी: हां, हम कह रहे हैं कि वो तो बात छोड़ो, उसको तो अभी रहने दो, बताएंगे लेकिन महत्वपूर्ण ये है कि उससे हमारी बात हुई थी, जिसका तुम बता रहे थे दूसरा.

विश्वनाथ: हां जी.

कुदुस्सी: दूसरे वाले की बात हुई थी हमारी.

विश्वनाथ: यादव वाला.

कुदुस्सी: हां.

विश्वनाथ: हां उसमें, उनका कहां  कौन सा मंदिर में है. इलाहाबाद का मंदिर में है, दिल्ली का मंदिर में है. 

कुदुस्सी: नहीं-नहीं मंदिर में किसी का नहीं है. अभी तो होना है. 

विश्वनाथ: हां हां हां! तो उसका अब कर लीजिए बात वो तो कर देंगे, वो तो मेरा बात हुआ था वहां पर.

कुदुस्सी: कहा है पक्का .

विश्वनाथ: हां हां, उसमें आप एक काम अभी देखिये न. 100 % ये लो, जो हमारा कैप्टेन है कैप्टेन का थ्रू (जरिए) में हो रहा है, तो प्रॉब्लम क्या है बोलिए.

विश्वनाथ: नहीं नहीं नहीं नहीं! हम लोग कोई एक्सपेरिमेंट लेंगे क्या आपके उमर, ये उमर में भी एक्सपेरिमेंट लूंगा न, मैं लूंगा आपको तकलीफ में डालूंगा, हमारा ऐसा नहीं है. न न! वो आप ले लीजिए सामान वो तुरंत करवा देंगे, उसमें तो भी कोई प्रॉब्लम नहीं है.

कोई प्रॉब्लम है भी तो वो खुद ही बोल रहे हैं कि अभी कल वो ये जो इसका बात किए थे वो बोल रहे कि 100 आदमी दे देंगे. रिव्यू अलॉव (allow) कर देंगे, फिर बाकी का एक कंपनी का ढाई दे देंगे, तीन आप ले जायेगे, 50 आप लोग रखिए, ऐसा बोल रहे थे, जितना दो- तीन कंपनी है कर देंगे.

कुदुस्सी: ठीक है ठीक है.

विश्वनाथ: 100 आदमी पहले दे देंगे तो वो जो रिव्यू अलॉव (allow) हो जाएगा. इनका जो है दूसरा वाला जो बोल रहे थे.

कुदुस्सी: कितनी-कितनी बुक्स होगी करीब अंदाजा?

विश्वनाथ: कितना बेईमान है वो आप उनका अंदाजा, यहां पर 100 बही देंगे बाकी बही आपके पास रखेंगे, होने के बाद फॉरवर्ड करेंगे.

कुदुस्सी: अच्छा.

विश्वनाथ: ये आपका कितना बही में राजी हो रहे हैं देखिये 500 बही 400 बही

कुदुस्सी: आप बताये ना तो उसको बात करे फिर

विश्वनाथ: उन्हें पता है वह हम लोग 200 बही बोलते हैं 500 बही इनको बोल दीजिये, 500 गमला, हम लोग 200 गमला बोलेंगे वहां पर, 100 गमला देंगे 100 गमला बाद में देंगे.

विश्वनाथ: 500 कहिये कीजिये वो जो काम है बहुत ही मुश्किल है काम है हम लोगों को भी मिलना चाहिए, आपको हमको

कुदुस्सी: ठीक है ठीक है ठीक है.

विश्वनाथ: हां वो पक्का होगा पूरा बात हुआ है कोई प्रॉब्लम नहीं है.

कुदुस्सी: ठीक है तो कल हमारी मुलाकात

विश्वनाथ: अभी एक ही चीज़ पापा बोल रहे है एक ही चीज़ वो बोल रहे कि अभी जो हमारा कैप्टेन है न उनका… ऑल ओवर इंडिया है जो भी काम है वो जो भी कर दे, करना के लिए तैयार है.

विश्वनाथ: हां हां हां पक्का करवाएंगे हम.

§

04.09.2017 को कुदुस्सी, विश्वनाथ और यादव के बीच हुई पूरी बातचीत

कुदुस्सी: हम कह रहे हैं हमारे पास एक है आए हैं पहले से ही जान पहचान.

कुदुस्सी: वो कह रहे हैं उन्होंने अपना पिटीशन डाला था आज, तो सोमवार की डेट लगाई है उन्होंने, तो ये कह रहे है कि कितना क्या होगा और कैसे होगा और दूसरी चीज़ कि हमें कैसे विश्वास होगा कि हां हमारा काम पक्का-पक्का होगा. ये भी बात है.

विश्वनाथ: ये मेडिकल  वाले हैं क्या?

कुदुस्सी: हां हां.

विश्वनाथ: हां तो वो आने वाले सोमवार को लगा है.

विश्वनाथ: हां वो रिव्यू है न.

कुदुस्सी: न न वो पिटीशन है ,आर्टिकल 32 का.

विश्वनाथ: हां हां हां! विश्वास तो मिलता नहीं है सामान देंगे तो काम 100 % हो जाएगा.

कुदुस्सी: नहीं वो कह रहे हैं कि पैसा हो तो साथ जाए कि घर के बाहर जाए, कोई घर के अंदर जाए, कोई घर के अंदर जाए कोई बात करे.

विश्वनाथ: नहीं वो सही बात है, लेकिन वो ठीक नहीं है, वो जब आपका विश्वास नहीं कर रहा है हमको तो

कुदुस्सी: नहीं नहीं. हमारा विश्वास तो कर रहा है लेकिन वो कह रहा है न कि दूसरा थर्ड पर्सन के पास मामला होगा तो कैसे होगा क्योंकि वो कह रहे हैॆ कि अगर हमारा काम नहीं हुआ तो तब तो बिलकुल ही एकदम ही ख़राब हो जायेगा स्थिति हमारी.

विश्वनाथ: नहीं नहीं. काम तो होगा नहीं तो हम लोग क्या हम लोग को क्यों माने आग में कूदने के लिए इच्छा हो रहा है क्या बोलिए. काम 100% होगा तभी तो इसका मदद कर रहा है.

कुदुस्सी: हां देखिए देख लो आप ये बात, हा हा हा.

विश्वनाथ: हां हां, काम 100% हो जायेगा वहां पर हम लोग का अभी क्या बोलते हैं जो उनसे कुछ बात हुआ है, तभी तो आप लोग को बोल रहे हैं, नहीं तो क्यों बोलते हम लोग.

यादव: हां अच्छा भाई साहब वैरी वैरी सॉरी मैं उस दिन चला गया. मैं हाईकोर्ट चला गया था.

विश्वनाथ: हां जी जी जी.

यादव: मुझे पहचाना मैं डीपी यादव बोल रहा हूं.

यादव: तो उस दिन हम हाईकोर्ट इसलिए गए थे कि भाई देखिये उस समय उसपे पैसे फंसे थे नहीं. मैने क्लियर कट बात करी. है न तो इसलिए चले गए थे तो अब वहां से तो उन्होंने आदेश किया, आप पे आके इन्होंने ख़ारिज कर दिया तो हम फिर से ख़ारिज कर दिया इन्होंने कहा फ्रेश पिटीशन डालो. आर्टिकल 32 में फ्रेश पिटीशन डाला है उसकी डेट थी. उसको उन्होंने बढ़ा के 11 तारीख कर दिया है. तो हम का चाहिए हैं कि कल हम आपका टिकट बनवा देते हैं और उस बार का सॉरी विश्वनाथ जी दूंगा मैं आपको. हूं. अब ये काम हमारा करा दोगे आप.

विश्वनाथ: नहीं काम तो 100 क्या 500% गारंटी है लेकिन सामान तो पहले देना होगा और वो मिलने को मना कर रहे हैं क्योंकि जो सरकार चल रहा चाय वाले का वो सबको नजर रखा है. प्रॉब्लम हो जायेगा.

यादव: हम मिलेंगे नहीं हम मिलना नहीं चाहते

विश्वनाथ: हां मिलाने कि नहीं कि वो घर में जायेंगे. वो बोले कि वो सब दिखने का विश्वास नहीं कि काम 100% कर देंगे तब बात हुआ था. तो तभी तो हम दौड़ के गया था दौड़ के आया था जी.

यादव: नहीं नहीं. ठीक है अग्रवाल जी, तो हम आपकी टिकट भिजवा देते हैं कल आप आ जायेंगे. हां, आप बताये तो कल हम आपको

यादव: अरे मैं पहले से ही चाहता हूं कन्फर्म हो जाए. बहुत सारे लोग हैं तो मैं चाहता हूं कि जज साहब से हमारे संबंध अच्छा है तो जज साहब की बातों पे हम ज्यादा भरोसा करते हैं.

विश्वनाथ: नहीं नहीं. हम तो कन्फर्म कर देंगे नहीं तो हम बोलते भी नहीं. क्योंकि हम लोग यह काम रेस्टो जी देखिये ये माने कि ट्रेड के लिए जरूरत ही जरूरत है मेडिकल का आदमी की जरूरत. तो इसमें करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन कुछ क्या है, वहां पर कुछ वो लोग उनका वहां बिना प्रसाद लगाए कुछ नहीं होगा.

यादव: नहीं प्रसाद तो लगेगा, प्रसाद तो देंगे, प्रसाद तो देना ही है.

विश्वनाथ: काम तो 100% हो जाएगा लेकिन हम कल परसों बोलने नहीं जाएंगे. वो आप सामान तैयार कीजिये… दे देंगें तो हम लोग करवा देंगे… 100% करवा देंगे.. कोई प्रॉब्लम नहीं है माल व तभी तो बोलेंगे.

यादव: मतलब एडवांस रखना पड़ेगा.

विश्वनाथ: हां एडवांस उनको देना पड़ेगा. नहीं तो क्यों करेंगे आप बोलिये इसका तो कोई लिखा-पढ़ी भी नहीं होती. ये सब विश्वास पर चलता है, वो करेंगे 100%.

यादव: बताइये क्या देना पड़ेगा. मेरा एक ही कॉलेज है मैं दूसरे का भरोसा नहीं कर सकता हूं.

विश्वनाथ: एक का करवा दूंगा.

यादव: साफ से बता दो क्या देना पड़ेगा, हमारी ज्यादा कैपेसिटी तो नहीं है. बात करवाओ. अब साहब है तो बात कराओ, बात करते हैं साहब से.

विश्वनाथ: नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं है. हम करवा देंगे काम.

विश्वनाथ: नहीं वो तो एक का बोले! एक का तो हम बात किये थे. वो तो बोले तीन, 2.5 वहां देना है 50 अपना रखना है.

कुदुस्सी: तो एडवांस कितना देना है.

विश्वनाथ: एडवांस तो अब… वो रिव्यू पिटीशन का उस समय बोले कि 100 आदमी दे दो. रिव्यू हो जायेगा तो आपको भी मालूम हो जायेगा! फिर हम…

कुदुस्सी: तो एक काम करलो न आप! आप एक बात कर लो.  इनका सोमवार का लगा है! 3-4 दिन की डेट आगे बढ़ा दो.

विश्वनाथ: तो कुछ आदमी भेज देंगे तो 3-4.. 2 आदमी दे दे तो 3-4 दिन का डेट बढ़ा देंगे.

विश्वनाथ: सोमवार को फाइनल ही करवा देंगे. ये आपने को दे सामान कुछ 2-2.5 प्रॉब्लम नहीं है, कुछ आर्डर करवा देंगे. पापा देखिये न इधर का.. न आपको प्रॉब्लम में डालेंगे न मेरे को… क्योंकि वहां सामान का बात कर लेंगे नहीं पहुंचेगा न तो हमको बहुत प्रॉब्लम में फंस जायेगा. काम अगर नहीं कर पाएंगे तो इधर का सामान लौटा देंगे. काम नहीं करने का कोई चांस नहीं! हमारा क्लियर बात हुआ है कि अलग कर देंगे.

कुदुस्सी: लो बात करो इनसे

विश्वनाथ: हां क्लियर बात हुआ है वो 3 का हिसाब से. वो 3 से कम में करेंगे नहीं.

यादव: हेलो

विश्वनाथ: हां जी. वो हम लोग का लास्ट टाइम भी बात सर वो एक के लिए 3 मांग रहे थे देने से टोटल अलग कर देंगे जो प्रेयर मांगेंगे… मैं उनको बोला था कि 5 का उसी टाइम बात कर रहे थे. कि 15 का बात वो कर रहे थे. लास्ट टाइम भी वही बात कर रहे थे.

यादव: तो पूरा पैसा एडवांस में जाएगा.

विश्वनाथ: सर मैं वहां पे कोई रिस्क नहीं लेना चाहता हूं क्योंकि वो 100% गारंटी काम है आप वहां दे देंगे न आपका काम 100% गारंटी हो जायेगा… किन्तु परन्तु कुछ नहीं न, काम हो जायेगा तो उसके बाद न सर 10-15 महीने बैठेंगे, 14-15 काम करवाइये आपको भी विश्वास हो जायेगा वो 101% कर देंगे.

यादव: वो कब मैं दे दूं बताओ.

विश्वनाथ: 11 तारीख को है तो हम अभी 7-8 तारीख को पहुंच सकता हूं, करवा देंगे आपका 11 तारीख को काम ही ख़त्म हो जायेगा.

यादव: 2.5 तक करवा दो न यार 2.5 तक मेरी कैपेसिटी है करवा दो.

विश्वनाथ: सर आपको हम झूठ नहीं बोलते 5 का 18 से बात हुआ था, फिर लास्ट में 3 के हिसाब से 15 से बात हुआ था वो हम उनको कन्विंस करके करवाए कि और चार आएंगे.

यादव: सुनिए आप हमसे 2 अभी ले लीजिये और जैसे ही आर्डर मिल जायेगा एडमिशन कर लेंगे हम जज साहब के यहां 1 करोड़ पहुंचा देंगे. आपके यहां, कुदुस्सी साहब के यहां इस तरह से करवा दीजिये.

विश्वनाथ: सर मैं बात करके सुबह आपको कन्फर्म करता हूं. उनसे बात करके हम नहीं बोलेंगे.

यादव: क्योंकि हमारे पास अभी पैसे का तकलीफ है 2 हम अभी दे देंगे और 1 रुपये 5-7 दिन 8 दिन का समय दे दीजिये एडमिशन शुरू हो जायेगा हम पहुंचा देंगे साहब के यहां हम इतनी गारंटी ले लेंगे आप 5 लीजिए.

विश्वनाथ: मैं उनसे बात कर लेता हूं. सुबह आपको कन्फर्म कर दूंगा.

यादव: हां हेलो

विश्वनाथ: हां पापा मैं उसको बोला कि सुबह आप से बात करता हूं वहां बोले कि 2 सभी दे देंगे और एक कुछ नहीं तो हम बोले कि…

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