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‘वसुंधरा सरकार पद्मावत को कर मुक्त करे, राजस्थान की संस्कृति को बढ़ावा देती है फिल्म’

सुप्रसिद्ध मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट ने कहा कि फिल्म में घूमर गीत से राजस्थान के लोकसंगीत को बढ़ावा मिलता है. फिल्म पद्मावत की रिलीज़ के ख़िलाफ़ राजस्थान और मध्य प्रदेश की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, फिल्म पद्मावत का पोस्टर और वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक/विकिपीडिया)

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, फिल्म पद्मावत का पोस्टर और वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक/विकिपीडिया)

भोपाल/नई दिल्ली/मुंबई/अहमदाबाद/जयपुर: संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर प्रतिबंध लगाने के लिए कुछ राज्यों में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्ध मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट ने कहा है कि राजस्थान सरकार को फिल्म पद्मावत को कर मुक्त करना चाहिये, क्योंकि यह फिल्म राजस्थान की संस्कृति को बढ़ावा देती है.

उच्चतम न्यायालय ने 25 जनवरी को फिल्म प्रदर्शित करने के लिए हरी झंडी दे दी थी, लेकिन इसके ख़िलाफ़ राजस्थान और मध्य प्रदेश की सरकारों ने एक बार फिर शीष अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है. सोमवार को फिल्म पर प्रतिबंध लगाने संबंधी दोनों राज्यों की याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई की मंजूरी दे दी.

बहरहाल, जयपुर से ताल्लुक़ रखने वाले 67 वर्षीय मोहन वीणा वादक ने कहा कि संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म में घूमर गीत से राजस्थान के लोकसंगीत को बढ़ावा मिलता है.

मध्य प्रदेश की यात्रा पर आए भट्ट ने कहा, ‘कम से कम राजस्थान सरकार को इस फिल्म को कर मुक्त करना चाहिए, क्योंकि यह संस्कृति विशेषकर राजस्थान की संस्कृति को विश्वस्तर पर बढ़ावा देती है. जिस घूमर गीत पर विवाद हो रहा है, वह राजस्थान का लोकसंगीत को बढ़ावा देता है. ईमानदारी से कहूं, तो मैंने फिल्म नहीं देखी है, लेकिन मुझे इसके निर्देशक संजय लीला भंसाली पर पूरा विश्वास है. मैं उन्हें अच्छे से जानता हूं, उनका काम शानदार है और वह अपना काम पूरी जवाबदारी से करते हैं.’

भट्ट ने कहा कि भंसाली एक अच्छे निर्देशक हैं, इसके साथ ही विचारक भी हैं और उनका मानना है कि फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं होगा.

उन्होंने कहा, ‘वास्तव में फिल्म से राजस्थान और इसके शानदार राजमहलों को समूची दुनिया में अच्छा प्रचार मिलेगा.’ उन्होंने कहा कि जो इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं उन्हें पहले यह फिल्म देखनी चाहिए, उसके बाद प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

गौरतलब है कि इतिहास पर बनी यह फिल्म विवादों में फंस गई है. करणी सेना इस फिल्म की रिलीज का विरोध कर रही है. उसका आरोप है कि फिल्म में इतिहास के तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया है और यह राजपूत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है.

करणी सेना के सदस्यों ने पिछले साल इस फिल्म की शूटिंग के दौरान जयपुर और कोल्हापुर में सेट पर तोड़-फोड़ की थी और भंसाली के साथ दुर्व्यवहार किया था.

फिल्म पद्मावत पर चार राज्यों में लगे प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने बीते 18 जनवरी को हटा दिया था. हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान सरकार ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके खिलाफ फिल्म के निर्माता वायाकॉम 18 ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाई थी.

न्यायालय ने अपने 18 जनवरी के आदेश के ज़रिये पूरे देश में 25 जनवरी को फिल्म रिलीज करने का रास्ता साफ़ कर दिया था. अपने आदेश में उसने गुजरात और राजस्थान में फिल्म के प्रदर्शन पर लगी रोक को स्थगित कर दिया था.

इस संबंध में हालांकि हरियाणा और मध्य प्रदेश ने कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की है, लेकिन उन्होंने कहा है कि राज्यों में फिल्म का प्रदर्शन नहीं होगा.

यह फिल्म 13वीं सदी में मेवाड़ के महाराजा रतन सिंह और उनकी सेना तथा दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलजी के बीच हुए ऐतिहासिक युद्ध पर आधारित है. इस फिल्म के सेट पर दो बार जयपुर और कोल्हापुर में तोड़फोड़ की गई और इसके निदेशक संजय लीला भंसाली के साथ करणी सेना के लोगों ने हाथापाई भी की थी.

फिल्म में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं.

लगातार विवादों में रहने की वजह से पिछले साल दिसंबर में रिलीज़ होने जा रही इस फिल्म की रिलीज़ को टाल दिया गया था.

राजस्थान की राजपूत करणी सेना और तमाम हिंदूवादी के साथ कुछ राजपूत समुदाय ने फिल्म पर आरोप लगाया है कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है. लोग आरोप लगा रहे है कि फिल्म में अलाउद्दीन ख़िलजी और रानी पद्मावती के बीच ड्रीम सीक्वेंस फिल्माया गया है. हालांकि फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है.

इन लोगों का आरोप है कि भंसाली ने रानी पद्मावती की छवि को ‘ख़राब करने के लिए’ फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को ग़लत तरीके से पेश किया गया है जिससे लाखों लोगों की भावनाएं आहत होंगी.

बीते दिसंबर महीने में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने इस फिल्म यू/ए सर्टिफिकेट देने का फैसला किया और फिल्म के निर्देशक को इसका नाम ‘पद्मावती’ से बदलकर ‘पद्मावत’ करने का सुझाव दिया था, जिसके बाद फिल्म का नाम बदलकर पद्मावत कर दिया गया.

इसके अलावा फिल्म के दृश्यों में 26 कट्स लगाए गए थे. सीबीएफसी के समक्ष भी पेश हो चुके भंसाली ने बताया था कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बनी उनकी फिल्म मलिक मोहम्मद जायसी रचित 16वीं सदी के ऐतिहासिक काव्य पद्मावत पर आधारित है.

फिल्म की रिलीज के ख़िलाफ़ राजस्थान और मध्य प्रदेश की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा न्यायालय

राजस्थान और मध्य प्रदेश ने उच्चतम न्यायालय में अर्ज़ी दायर कर सोमवार को उससे अनुरोध किया है कि विवादित फिल्म पद्मावत की रिलीज़ से जुड़े अपने 18 जनवरी के फैसले को वह वापस ले ले.

न्यायालय के 18 जनवरी के फैसले के आधार पर 25 जनवरी को पूरे देश में फिल्म प्रदर्शित करने की अनुमति मिल गई है.

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े न्यायालय के आदेश में संशोधन की मांग करने वाली दोनों राज्यों की अंतरिम अर्ज़ी पर सुनवायी के लिए मंगलवार की तारीख़ मुकर्रर की है.

(फोटो साभार: फेसबुक/पद्मावती)

(फोटो साभार: फेसबुक/पद्मावती)

राज्यों ने दावा किया है कि सिनेमैटोग्राफ क़ानून की धारा छह उन्हें कानून-व्यवस्था के संभावित उल्लंघन के आधार पर किसी भी विवादित फिल्म के प्रदर्शन को रोकने का अधिकार देता है.

फिल्म के निर्माता वायकॉम18 की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने ऐसे मामले में अंतरिम अर्ज़ी पर त्वरित सुनवाई का विरोध किया.
हालांकि न्यायालय ने मामले की सुनवाई मंगलवार को करने को मंज़ूरी दे दी है.

उत्तर गुजरात में बस सेवा रोकी

गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) ने फिल्म पद्मावत की रिलीज़ के ख़िलाफ़ राजपूत समुदाय के सदस्यों द्वारा हिंसक प्रदर्शनों के बाद आज उत्तर गुजरात में अपनी बस सेवा पर रोक लगा दी.

एक अधिकारी ने बताया कि बस सेवा मेहसाणा, पाटन, गांधीनगर, साबरकांठा और बनासकांठा ज़िलों में स्थिति सुधरने तक रोकी गई है. उत्तर गुजरात के लिए दो रास्ते हैं. इनमें एक रास्ता गांधीनगर से साबरकांठा में हिम्मतनगर तक जाता है और दूसरा मेहसाणा से पाटन होते हुए बनासकांठा ज़िले तक जाता है.

जीएसआरटीसी सचिव केडी देसाई के अनुसार, अहमदाबाद और उत्तर गुजरात क्षेत्र के बीच चलने वाली सभी बसें शनिवार रात से रोक दी गई हैं. बस सेवा इस आशंका के बीच रोकी गई है कि उपद्रवी तत्व इन वाहनों को आसान निशाना बना सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘शनिवार को उत्तर गुजरात के कुछ हिस्सों में राज्य बसों पर हमलों को देखते हुए हमने गांधीनगर, हिम्मतनगर, मेहसाणा और बनासकांठा के लिए अपनी बस सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं. मध्य और दक्षिण गुजरात जैसे अन्य स्थानों के लिए बस सेवाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित हो रही हैं.’

उन्होंने कहा कि हमने सुबह में गांधीनगर के लिए बस सेवा बहाल करने का प्रयास किया लेकिन कुछ लोगों ने ज़िला स्थित एक गांव में एक बस पर हमला किया.’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए हमने सेवाएं रोकने का निर्णय किया है. हम पुलिस के साथ लगातार संपर्क में हैं और बस सेवा स्थिति सामान्य होते ही बहाल करेंगे.’

देसाई ने कहा कि यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया क्योंकि उपद्रवी अपनी मोटरसाइकिलों पर आ रहे हैं और बसों पर जलती चीज़ें फेंककर फ़रार हो जा रहे हैं.

जीएसआरटीसी के निर्णय के बाद कई यात्री शहर स्थित परिवहन डिपो में फंसे हुए हैं क्योंकि उत्तर गुजरात के लिए बस सेवा रोके जाने के निर्णय के बारे में उन्हें डिपो आने पर पता चला.

शनिवार रात प्रदर्शनकारियों ने फिल्म रिलीज़ के खिलाफ बनासकांठा, मेहसाणा, सुरेंद्रनगर और भुज में कुछ स्थानों पर टायर जलाकर सड़कें बाधित करने का प्रयास किया.

रविवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने गांधीनगर के पास उनावा गांव और बनासकांठा के अंबाजी नगर में सड़कें बाधित करने का प्रयास किया.

पूर्ण प्रतिबंध को लेकर चित्तौड़गढ़ में महिलाओं ने जौहर रैली निकाली

जयपुर: फिल्म पद्मावत पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर राजस्थान के चित्तौडगढ़ में सैंकड़ों महिलाओं ने रविवार को जौहर स्वाभिमान रैली निकाली.

रैली के दौरान कुछ महिलाओं ने हाथों में तलवारें थाम रखी थीं. उन्होंने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के विरोध में और रानी पद्मावती के सम्मान में नारे लगाए.

रैली चित्तौड़ क़िले के जौहर स्थल से शुरू हुई और करीब आठ किलोमीटर पर शहर में जौहर भवन पर समाप्त हुई. इसमें अनेक युवा भी शामिल हुए.

प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं के अनुसार, रानी पद्मावती ने चित्तौड़ क़िले पर अलाउद्दीन ख़िलजी के आक्रमण के दौरान आत्मसम्मान की रक्षा के लिए 16 हजार अन्य महिलाओं के साथ जौहर किया था.

रैली के दौरान महिलाओं ने फिल्म पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने की मांग की है.
इधर श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह ने पूर्व राजघरानों से आग्रह किया है कि वे अपने अधीन स्मारक एवं किले फिल्म के प्रतिबंध होने तक पर्यटकों के लिए बंद रखे.

नोएडा में डीएनडी फ्लाईओवर टोल नाके को किया क्षतिग्रस्त

नोएडा: फिल्म पद्मावत की रिलीज़ को लेकर विरोध कर रहे करणी सेना और अन्य राजपूत संगठनों के सदस्यों ने रविवार को डीएनडी फ्लाईओवर के टोल प्लाज़ा के काउंटरों पर तोड़-फोड़ की और एक बैरियर को आग के हवाले कर दिया.

नगर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि डीएनडी टोल फ्री है, इसलिए काउंटरों पर कोई काम नहीं हो रहा था. केवल उनकी कांच की खिड़कियों और कंप्यूटरों को तोड़ा गया.

अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद करीब एक दर्जन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और मामला दर्ज किया गया.

उन्होंने बताया कि गौतम बुद्ध नगर, गाज़ियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ और आस पास के इलाकों से आए ये प्रदर्शनकारी करणी सेना, राजपूत उत्थान समिति, क्षत्रीय सभा के सदस्य हैं.

शांति भंग नहीं करने दिया जाएगा: हरियाणा पुलिस महानिदेशक

चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस ने रविवार को कहा कि फिल्म पद्मावत को राज्य में शांतिपूर्ण ढंग से दिखाया जा सके इसके लिए सुरक्षा के पर्याप्त क़दम उठाए जाएंगे.

हरियाणा पुलिस के महानिदेशक बीएस संधु ने गुरुग्राम में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की एक इमारत का उदघाटन करते हुए कहा, ‘फिल्म पद्मावत की स्क्रीनिंग के दौरान किसी को भी राज्य में शांति भंग करने की इज़ाज़त नहीं दी जाएगी.’

उम्मीदों और भय के बीच ‘पद्मावत’ की रिलीज़ की उल्टी गिनती शुरू

प्रदर्शनों और हिंसा की धमकियों ने भले ही संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हों, लेकिन कारोबारी पंडित, सिनेमा मालिक तथा यहां तक कि दर्शक भी इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को थियेटरों में देखने के लिए उत्सुक हैं.

सिनेमा ओनर्स एंड एक्ज़िबिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष नितिन धर ने कहा, ‘हम उनके (प्रदर्शनकारियों) अगले क़दम के बारे में नहीं जानते हैं. इसलिए हमने सिनेमाघर मालिकों से कहा है कि वे हालात का जायज़ा लें और इसके मुताबिक ही अपने यहां फिल्म रिलीज़ करने के बारे में फैसला करें.’

उन्होंने कहा, ‘देश के कुछ हिस्सों में समस्याएं आ सकती हैं. ऐसे में हमने वितरकों से आग्रह किया है और सिनेमाघर मालिकों को सलाह दी है कि अपनी संपत्ति और दर्शकों की सुरक्षा के लिए वे पुलिस से संपर्क करें.’

वितरक और सिनेमाघर मालिक अक्षय राठी को देश के 4000 स्क्रीन में 75 फीसदी बुकिंग होने की उम्मीद है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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