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व्यापमं घोटाला: उमा भारती को सीबीआई ने दी क्लीनचिट, बिचौलियों की लिस्ट में दर्ज था उनका नाम

एसटीएफ ने व्यापमं के सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा से एक हार्ड डिस्क बरामद की थी. जिसमें बिचौलियों की एक्सेल शीट में 14 उम्मीदवारों के नाम के आगे उमा भारती लिखा था.

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापमं घोटाले के तहत हुई एक परीक्षा संबंधित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विशेष अदालत में आरोप-पत्र पेश किया है, जिसमें प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती को क्लीनचिट दे दी गई है.

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के जरिए अनुबंध पर ग्रेड-II शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई शाला संविदा शिक्षक वर्ग पात्रता परीक्षा 2011 में कथित अनियमितता के मामले में सीबीआई ने राज्य सरकार के तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, उनके विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) और 85 अन्य के खिलाफ नया आरोप-पत्र दायर किया.

इसी परीक्षा में अनियमितता के आरोप उमा भारती पर भी लगे थे. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, ‘आरोप पत्र में सीबीआई की ओर से लिखा गया कि उमा भारती का नाम व्यापमं की एक्सेल शीट में 14 उम्मीदवारों के नाम के आगे लिखा था. लेकिन जांच में कोई भी ऐसे प्रमाण नहीं पाए गए कि जो इशारा करते हों कि उम्मीदवारों ने चयन के लिए उमा भारती से संपर्क किया था.’

पत्रिका की खबर के अनुसार, ‘मामले के खुलासे के बाद एसटीएफ ने छापेमारी कर व्यापमं के सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा के कब्जे से कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क जब्त की थी. इसमें महिंद्रा द्वारा अलग से तैयार की गई एक्सेल शीट में सभी बिचौलियों के नाम दर्ज थे. उसमें उमा भारती का नाम भी शामिल था. सभी दर्ज नामों में से उमा को छोड़कर सब आरोपी बनाए गए हैं.’

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि भोपाल की विशेष अदालत में दायर आरोप पत्र में व्यापमं के तत्कालीन नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, व्यापमं के तत्कालीन प्रधान सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा, 72 अभ्यर्थियों, व्यापमं के दो अन्य कर्मचारियों, प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और 11 बिचौलियों को नामजद किया गया है.

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में तत्कालीन तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री शर्मा के ओएसडी ओपी शुक्ला को भी नामजद किया गया है.

अधिकारियों के मुताबिक, आरोप है कि महिंद्रा और त्रिवेदी ने अनुबंध पर ग्रेड-II शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के अंकों को बढ़ाने में मदद की.

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने पाया कि शर्मा ने त्रिवेदी को फर्जी तरीके से परीक्षा नियंत्रक नियुक्त कर दिया जबकि वह इस अहम पद के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की सूची में शामिल थे ही नहीं.

अधिकारियों ने बताया, ‘त्रिवेदी ने महिंद्रा के जरिए अभ्यर्थियों के अंकों में हेर-फेर करके यह एहसान चुकाया. उन्होंने अंकों में हेर-फेर इस तरह की जिससे अभ्यर्थियों का चयन तय हो जाए.’

अभ्यर्थियों की ओर से भरी गई ओएमआर शीटों की फॉरेंसिक जांच में पता चला कि आरोपी अभ्यर्थियों के असल अंक नतीजों में दिख रहे उनके अंकों से काफी कम थे.

अधिकारियों ने आगे बताया, ‘सीबीआई ने बदले गए अंक पत्रों का ब्योरा महिंद्रा के लैपटॉप से बरामद कर लिया है.’

सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने यहां एक बयान में कहा, ‘जांच में खुलासा हुआ कि लोक सेवक और अन्य निजी लोगों ने अभ्यर्थियों के क्रमांक, फॉर्म संख्या आदि से परीक्षा का ब्योरा कथित तौर पर इकट्ठा किया और वह ब्योरा व्यापमं के प्रधान सिस्टम एनालिस्ट को मुहैया करा दिया.’

उन्होंने कहा कि उक्त प्रधान सिस्टम एनालिस्ट द्वारा प्राप्त किए गए परीक्षा के ब्योरे को कंप्यूटर पर एक डिजिटल फाइल में कथित तौर पर डाला गया, जिसमें अभ्यर्थियों का पूरा ब्योरा और उन्हें प्रायोजित करने वाले बिचौलियों की जानकारी थी.

दयाल ने कहा कि नतीजे घोषित होने से ठीक पहले तत्कालीन प्रधान सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा ने उन उम्मीदवारों के बाबत एक अन्य डेटाबेस तैयार किया जिनके अंक उसे बढ़ाने थे.

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, चालान में लीलाधर पचौरी नामक एक उम्मीदवार का भी जिक्र है. पेशे से पुजारी लीलाधर का चयन आेपी शुक्ला के जरिए हो गया था, पर बीएड नहीं होने से नौकरी उसे नहीं मिली. जांच से पता चला कि नितिन महिंद्रा से जब्त एक्सेल शीट में लीलाधर के आगे उमा भारती लिखा था. उमा भारती के संपर्क में आए लीलाधर ने उनसे रहने के लिए जगह मांगी थी. उन्होंने बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में जगह दे दी थी, पर सीबीआई की जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे जाहिर हो कि लीलाधर के चयन की सिफारिश उमा भारती ने की.

गौरतलब है कि यह वही मामला था जिसके संबंध में प्रदेश के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी शामिल होने के आरोप लगाते हुए एसआईटी के दफ्तर में स्वयं जाकर दस्तावेज दिए थे और कहा था कि वास्तविक एक्सेल शीट में एसटीएफ ने छेड़छाड़ करके ‘सीएम’ शब्द की जगह उमा भारती, मंत्री और राजभवन जैसे नाम जोड़ दिए थे.

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