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उत्तराखंड में अब परचून की दुकानों पर बिकेगी शराब, भाजपा सरकार ने दी मंज़ूरी

उत्तराखंड में शराब बेचने का लाइसेंस पाने के लिए पांच लाख रुपये फीस भरनी होगी और इसके लिए दुकान का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये होना चाहिए.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: www.jaikrishangroup.com)

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: www.jaikrishangroup.com)

देहरादून: उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने आबकारी नीति में कई तरह के संशोधन कर दिए हैं. इसके तहत अब विदेशी शराब और वाइन मोहल्ले में परचून की दुकानों पर बेची जा सकेगी. शराब बेचने का लाइसेंस पाने के लिए पांच लाख रुपये फीस भरनी होगी और इसके लिए दुकान का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये होना चाहिए. लाइसेंस की समय सीमा भी अब एक साल की जगह 3 साल कर दी गई है .

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शुक्रवार शाम हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि आबकारी विभाग द्वारा पेश किए आबकारी संशोधन संबंधी प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है. नए संशोधन के बाद शराब की दुकानों के समूहों के आवंटन को रद्द कर दिया गया है .

अमर उजाला के अनुसार, सरकार ये संशोधन इसलिए लेकर आई है क्योंकि पिछले दिनों ही जारी हुई आबकारी नीति पर विवाद उत्पन्न हो गया था जिसमें बीस किमी के भीतर चार दुकानों के समूहों का आवंटन एक व्यक्ति या फर्म को देने का प्रावधान था.

कौशिक ने आगे बताया कि संशोधित आबकारी नीति के अनुसार बीस कमरों तक के होटल को दिए जाने वाले बार की लाइसेंस फीस को पांच लाख से घटाकर तीन लाख कर दिया गया है. लाइसेंस को अब हर साल की बजाय तीन साल में रिन्यू कराया जा सकेगा. तीन साल की लाइसेंस फीस एक साथ जमा करवाने पर पाॅलिसी में दस प्रतिशत छूट का प्रावधान दिया गया है. सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के पीछे लाभ का उद्देश्य नहीं है. इस कदम का उद्देश्य शराब की अवैध बिक्री पर नजर रखना है.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष की आबकारी नीति से रेस्टोरेंट और बार मालिक खुश नहीं थे और इसकी समीक्षा की मांग कर रहे थे.

विदेशी शराब की बिक्री करने वाले डिपार्टमेंटल स्टोर की लाइसेंस फीस तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई है. हालांकि, कारोबार के सालाना टर्नओवर की सीमा पांच करोड़ से घटाकर पचास लाख और होटल, रेस्टोरेंट और बार के लिए पके भोजन की सालाना बिक्री की सीमा बारह लाख से घटाकर दस लाख कर दी गई है .

गौरतलब है कि सरकार ने राजस्व में इजाफा करने के लिए बीस किमी के दायरे में एक स्थान पर चार शराब आउटलेट के क्लस्टर को मंजूरी दी थी. इस कदम का कांग्रेस ने विरोध किया था और भाजपा पर शराब माफिया के पक्षधर होने का आरोप लगाया था. जिसके बाद इस फैसले को वापस ले लिया गया था.

कांग्रेस के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने इससे पहले कहा था कि सरकार राज्य में शराब लाइसेंस वितरण प्रणाली के लिए क्लस्टर अप्रोच खास उद्देश्य से लेकर आई है जिसका काम शराब माफिया को सीधे फायदा पंहुचाना है क्योंकि सिर्फ बड़े खिलाड़ी ही इसमें भाग ले सकते हैं.

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