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गढ़चिरौली में 40 कथित नक्सलियों के मारे जाने की घटना की जांच का कलेक्टर ने दिया आदेश

प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने उनके काडरों को ज़हर देकर मारा है. संगठन ने इसकी न्यायिक जांच की मांग की है.

एनकाउंटर करने के बाद मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए सुरक्षा बल (फोटो: पीटीआई)

एनकाउंटर करने के बाद सुरक्षाबलों ने घटना की जानकारी देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. (फोटो: पीटीआई)

गढ़चिरौली: गढ़चिरौली के ज़िला कलेक्टर शेखर सिंह ने पिछले माह हुई उन दो मुठभेड़ों की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं जिनमें सुरक्षा बलों ने 40 नक्सलियों को मारने का दावा किया था.

दोनों मुठभेड़ 22 और 23 अप्रैल को हुई थीं, जिनमें सुरक्षा बलों ने क्रमश: 34 और 6 नक्सलियों के मारे जाने की बात कही थी. सिंह ने बताया कि आपराधिक दंड संहिता की धारा 176 के प्रावधान के अनुसार जांच के आदेश दिए गए हैं.

एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘मुठभेड़ एटापल्ली और अहेरी तहसीलों में हुई थीं. दोनों तहसीलों के उप संभागीय मजिस्ट्रेट जांच करेंगे और अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे. मुठभेड़ के बाद यह नियमित प्रक्रिया है.’

ऐसे आरोप लग रहे हैं कि सुरक्षा बलों ने खाने में ज़हरीली चीज मिला कर बेकसूर लोगों को मार डाला है. कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मुठभेड़ पर ये कहते हुए सवाल उठाया है कि कैसे दोनों मुठभेड़ों में एक भी जवान घायल नहीं हुआ?

वहीं प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) ने मुठभेड़ों की न्यायिक जांच की मांग की है. इसके अलावा प्रख्यात तेलुगू लेखक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता वरवरा राव ने भी मुठभेड़ों की सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की तेलंगाना स्टेट कमेटी ने बीते 28 अप्रैल को दावा किया था कि सुरक्षा बलों ने उनके काडरों को ज़हर देकर मारा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, तेलुगू में जारी प्रेस रिलीज़ में माओवादियों ने आरोप लगाया है कि मुखबिरों की मदद से सुरक्षा बलों ने उनके काडरों को खाने में ज़हर दिया था. उनका दावा था कि जहर से माओवादियों के मरने के बाद पुलिस ने उन्हें गोली मारी और उन्हें इंद्रावती नदी में फेंक दिया. यह घटना 22 अप्रैल से कुछ दिनों पहले की है.

इस बारे में जब गढ़चिरौली एसपी अभिनव देव से इंडियन एक्सप्रेस ने संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ‘ये आधारहीन बात है. इतने सारे लोगों को ज़हर कैसे दिया जा सकता है. अगर किसी को ज़हर दिया जाता है तो उसका असर होने में समय लगता है, जिसमें बाकियों को कम से कम इस बात का पता चल जाता कि कुछ गड़बड़ है. इस वजह से हमने उनका विसरा सुरक्षित रखा है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ) 

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