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मेजर गोगोई के ख़िलाफ़ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश

यह फैसला सेना प्रमुख बिपिन रावत के इस बयान के शीघ्र बाद आया कि यदि मेजर गोगोई किसी अपराध के दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी.

जनरल बिपिन रावत और मेजर लीतुल गोगोई (फोटो: पीटीआई)

जनरल बिपिन रावत और मेजर लीतुल गोगोई (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सेना ने शुक्रवार को मेजर नितिन लीतुल गोगोई के खिलाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया है. गोगोई को बुधवार को तब हिरासत में ले लिया गया था, जब वे एक युवती के साथ किसी होटल में घुसने की कोशिश कर रहे थे जहां उनकी होटल स्टाफ के साथ कहासुनी हो गई थी. जिसके बाद वे हिरासत में लिए गए.

सेना के अधिकारियों ने बताया कि आगे की कार्रवाई के बारे में इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर फैसला किया जाएगा. कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का फैसला सेना प्रमुख बिपिन रावत के इस बयान के शीघ्र बाद आया कि यदि मेजर गोगोई किसी अपराध के दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी.

रावत ने कहा था, ‘यदि भारतीय सेना का कोई भी अधिकारी किसी भी अपराध का दोषी पाया जाता है तो हम कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे.’  उन्होंने कहा, ‘यदि मेजर गोगोई ने कुछ गलत किया है तो मैं आपको आश्वासन देता हूं कि उन्हें जल्द से जल्द सजा दी जाएगी. यह सजा एक मिसाल कायम करेगी.’

जम्मू कश्मीर पुलिस पहले से ही 23 मई की घटना की जांच कर रही है जब मेजर गोगोई को एक व्यक्ति और बडगाम की एक युवती के साथ पुलिस को सौंपा गया था.

गौरतलब है कि मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के बीरवाह में सेना के 53 आरआर में तैनात गोगोई पिछले साल तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने 9 अप्रैल, 2017 को जिले के चिल-ब्रास गांव के निवासी फ़ारूक़ अहमद डार को सेना की जीप पर बांधा था.

यह घटना श्रीनगर-बडगाम लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव के दिन की है. गोगोई ने डार को इस तरह से जीप से बांध कर करीब पांच घंटे तक कई गांवों में घुमाया. उन्होंने ऐसा कश्मीरियों को यह चेतावनी देने के लिए किया कि सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने वालों का यही अंजाम होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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