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‘बूचड़खानों की जगह चीनी मिलों से किसानों का बकाया दिलाने में ताक़त दिखाए योगी सरकार’

विपक्ष का आरोप: अमीर गोश्त निर्यात कर रहा, आम कारोबारी पर आफ़त ला रही सरकार.

फाइल फोटो (पीटीआई)

फाइल फोटो (पीटीआई)

उत्तर प्रदेश में किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने के चुनावी दावे को अमली जामा नहीं पहनाने के लिए भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए विपक्ष के नेताओं ने सवाल किया है कि राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार बूचड़खानों पर कार्रवाई के बजाय चीनी मिलों से किसानों का बकाया दिलाने में अपनी ताक़त क्यों नहीं दिखा रही है?

भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चूंकि भाजपा जीती है, उसे किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने सहित अपने वादों को पूरा करना चाहिए. यह उसके वादे हैं, किसी और के नहीं. यदि कोई और पार्टी जीतती तो भी भाजपा को केंद्र में होने के कारण चुनाव में किए गए अपने वादों को पूरा करना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि किसानों की क़र्ज़ माफ़ी और क़र्ज़ के कारण किसानों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही हैं. तमिलनाडु के किसान भी पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं.

सरकार मांस उद्योग को मान्यता देती है कि नहीं?

बूचड़खानों पर की जा रही कार्रवाई के बारे में राजा ने कहा, सरकार को यह बताना चाहिए कि वह मांस उद्योग को मान्यता देती है कि नहीं? यह क़ानून की दृष्टि से एक स्वीकृत पेशा है. भारत से मांस निर्यात स्वीकृत है. भारत में मांस खाना स्वीकृत है. ऐसा नहीं है कि मांस निर्यात या मांस खाने पर रोक हो.

उन्होंने कहा कि सवाल इस बात का है कि सरकार उन हज़ारों लोगों का जीवन-यापन क्यों तबाह करना चाहती है जो मांस उद्योग में काम कर रहे हैं. सरकार क्यों इस तरह बर्ताव कर रही है? हम एक लोकतांत्रिक देश हैं. सरकार यह तय नहीं कर सकती कि लोगों को क्या खाना चाहिए. क्या नहीं खाना चाहिए.

किसी एनपीए वाले ने किसानों की तरह आत्महत्या नहीं की

जदयू के अली अनवर अंसारी ने इस मुद्दे पर कहा कि उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ छल किया गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने इसी तरह का धोखा बिहार के लोगों के साथ किया था.

अंसारी ने कहा कि देश भर के किसानों की हालत ख़राब है. वे पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. उनकी ज़मीन एक तरह से बंज़र ज़मीन में बदल रही है. लेकिन सरकार में उनकी कहीं सुनवाई नहीं है. उत्तर प्रदेश के लोग तो अब ठगा महसूस कर रहे हैं.

बूचड़खानों के ख़िलाफ़ हो रही सख़्ती के बारे में जदयू सांसद ने कहा कि सरकार को यह सख़्ती चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादक किसानों का बकाया दिखाने के मामले में दिखानी चाहिए. यह सख़्ती करोड़ रुपये का एनपीए रखने वाले लोगों पर दिखानी चाहिए क्योंकि किसान तो देश भर में आत्महत्या कर रहा है, किसी एनपीए वाले ने आज तक आत्महत्या नहीं की है.

ग़रीबों को परेशान कर रही है कॉरपोरेट सरकार

अनवर अंसारी ने कहा कि देश में जो लोग जंगल काट रहे हैं, वे भी तो कसाई हैं. यह भी तो बूचड़खाना है. उनके ख़िलाफ़ सख़्ती दिखानी चाहिए. वे देश के पर्यावरण को ख़त्म कर रहे हैं. वे जंगल के बूचड़खानों को बंद करें. पहाड़ों के बूचड़खानों को बंद करें.

अंसारी ने कहा कि बड़े-बड़े लोग, जो गोश्त का निर्यात करते हैं, उन पर कोई पाबंदी नहीं है. किन्तु गली मोहल्ले के जो छोटे-छोटे कसाई हैं, उन पर आफ़त ला रहे हैं. यह बड़े लोगों की, कॉरपोरेट की सरकार है. इसीलिए ग़रीब लोगों को परेशान किया जा रहा है.

किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने के भाजपा के चुनावी वादे के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार कार्रवाई कर रही है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि वह देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के अपने गुप्त एजेंडे को आगे बढ़ा रही है.

सरकार को यह अन्याय बंद करना चाहिए

पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा की केंद्र और राज्य की सरकारें कभी किसानों का क़र्ज़ माफ़ नहीं करेंगी क्योंकि वह उसके गुप्त एजेंडे में नहीं है. उसके गुप्त एजेंडे में है कि लोगों को शाकाहारी बनाओ और वह उसी को लागू कर रही है. सवाल है कि अब देश के सभी लोग शाकाहारी क्यों बने.

उन्होंने कहा, मैं पश्चिम बंगाल से हूं और मैं मछली खाता हूं. सरकार के इस कदम से मीट का दाम बढ़ गया है. सरकार को यह अन्याय बंद करना चाहिए.

माकपा नेता नीलोत्पल बसु ने सवाल किया कि आख़िर भाजपा को किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने से कौन सी चीज़ रोक रही है क्योंकि अब तो केंद्र एवं उत्तर प्रदेश दोनों जगह उनकी सरकार है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो सहकारी बैंकों और भूमि विकास बैंकों से लिया गया किसानों का कर्ज़ तुरंत माफ़ कर सकती है.

उन्होंने कहा कि सरकार अपनी सारी ताक़त मांस की दुकानें बंद करवाने में लगा रही है. उसे यह ताक़त चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादक किसानों की बकाया राशि को लौटाने में लगानी चाहिए.

पूर्व सांसद बसु ने कहा कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस ने दशकों तक सत्ता में बने रहने के लिए तमाम झूठे वादे किये और वह आज कहां पहुंच गई. अब लगता है कि भाजपा भी पूरी तरह से कांग्रेस के रंग में रंग गई है.

उन्होंने कहा कि कृषि बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है. सरकार को किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने के लिए तुरंत क़दम उठाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि जल्द इस दिशा में क़दम नहीं उठाया गया तो यह न केवल कृषि बल्कि व्यापक तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल साबित होगा.