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सनातन संस्था कैंसर की तरह, इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए: साहित्यकार दामोदर माऊजो

73 वर्षीय साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता साहित्यकार दामोदर माऊजो ने कहा कि 2009 के मारगाओ ब्लास्ट के बाद सनातन संस्था पर कार्रवाई हुई होती तो गौरी लंकेश, नरेंद्र दाभोलकर, एमएम कलबुर्गी और गोविंद पानसरे जैसे लोगों की हत्या नहीं होती.

दामोदर माऊजो (फोटो: फेसबुक)

दामोदर माऊजो (फोटो: फेसबुक)

पणजी: गोवा में रहने वाले साहित्यकार दामोदर माऊजो का कहना है कि सनातन संस्था जैसे दक्षिणपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगना चाहिए क्योंकि वे राज्य के लिए कैंसर की तरह हैं.

उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि वह ऐसे संगठनों के खिलाफ लगातार लिखते और बोलते रहेंगे. माऊजो ने कहा कि गोली विचार को नहीं मार सकती.

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही कर्नाटक पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) से, माऊजो की जान को खतरा होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद गोवा पुलिस ने हाल ही में 73 वर्षीय साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता को सुरक्षा मुहैया कराई है.

माऊजो ने कहा कि 2009 में जब गोवा के मारगाओ में एक बम विस्फोट में इसके कार्यकर्ताओं की संलिप्तता साबित हुई थी तब अगर सनातन संस्था के खिलाफ कार्रवाई की गई होती तो गौरी लंकेश, तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर, एमएम कलबुर्गी और गोविंद पानसरे जैसे लोगों की हत्या नहीं होती.

नवंबर 2009 में गोवा के मारगाओ शहर में बम ले जाने के दौरान दुर्घटनावश इसमें विस्फोट के कारण सनातन संस्था के दो कार्यकर्ता मलगोंडा पाटिल और योगेश नाईक की मौत हो गई थी.

मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार लोगों के दक्षिणपंथी सनातन संस्था से संबंध थे.

माऊजो ने कहा, ‘मैं हमेशा कहता आया हूं कि सनातन संस्था एक कट्टरवादी संगठन है. कलबुर्गी, लंकेश, दाभोलकर और पानसरे हत्या मामले में आरोपी सनातन संस्था से संबंध रखते हैं. यह साबित करता है कि ये संस्था ऐसे मामलों का प्रशिक्षण केंद्र है.

सनातन संस्था पर हमला करते हुए माऊजो ने कहा, ‘हमें क्यों राज्य में ऐसी संस्था की ज़रूरत है? ये एक कैंसर है और इसका इलाज यह है कि इसे राज्य से बाहर कर देना चाहिए, जिससे गोवा में शांति बहाल हो जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि अगर सनातन संस्था के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो उसके साथी संगठन भी डर जाएंगे.

माऊजो ने कहा, ‘हम गोअन लोगों के लिए शांति बहुत ज़रूरी है और हम उसकी कीमत जानते हैं. गोवा में समुदायों के बीच जो विश्वास है, वो कायम रहना चाहिए.

जब उनसे उनकी विचारधारा पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वे मानवतावादी हैं और हमेशा रहेंगे.

माऊजो ने 1967 में हुए एक जनमत संग्रह में अहम किरदार निभाया था, जिसमें इस पर राय ली गई थी कि क्या गोवा को पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के साथ विलय कर देना चाहिए.

लेखक ने आगे कहा, ‘यह पहली दफा है कि गोवा में लेखकों को धमकाया गया है. सभी गोवावासियों को एक साथ आकर ऐसी सभी संस्थाओं के खिलाफ खड़ा होना चाहिए, जो हमारी शांति भंग करना चाहते हैं.’

माऊजो ने कहा कि सनातन संस्था ने गोवा में किसी जुर्म को अंजाम नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया है कि सनातन संस्था हत्यारों को तैयार करने के लिए जमीन दे रही है.

उन्होंने कहा, ‘वक्त आ गया है कि सरकार को यह साबित करना चाहिए कि वे गोवा और गोवावासियों के लिए काम कर रही है. गोली किसी चीज़ का जवाब नहीं है. गोली किसी के विचारों को नहीं मार सकती.’

उपन्यास लिखने के अलावा माऊजो अभी भी अखबारों में अपने लेख लिखते हैं. वाचना साहित्य पर काम करते हुए उन्होंने कलबुर्गी के साथ दो साल काम किया था.

जब उनसे पूछा गया कि वे क्यों दक्षिणपंथी संगठन के निशाने पर हैं तो उन्होंने कहा, ‘मुझे कलबुर्गी की वजह से निशाना नहीं बनाया जा रहा है. मुझे इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि में खुलकर अपना पक्ष रखता हूं. मैंने गुवाहाटी में हुए साहित्य समारोह में भी सनातन संस्था का जिक्र किया था, जिसमें असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी मौजूद थे.

माऊजो ने गुवाहाटी के साहित्य समारोह में बहुसंस्कृतिवाद की बात की थी. उन्होंने कहा, ‘मैं बहुसंस्कृतिवाद के खिलाफ काम कर रहे लोगों के खिलाफ बोलता रहा हूं. मैंने दिल्ली में लेखकों के एक कार्यक्रम में सनातन संस्था के खिलाफ बोला था, जिससे संस्था के लोगों को बुरा लगा होगा और लगा होगा कि मुझे ख़त्म कर देना चाहिए.’

माऊजो ने कहा, ‘मैं आगे भी इन चीज़ों के खिलाफ लिखता और बोलता रहूंगा. मैंने अगर लिखना बंद कर दिया तो लोगों को लगेगा कि मैं डर गया और वे लोग सफल हो जाएंगे. मैंने कहा मुझे सुरक्षा दें, लेकिन मेरी आज़ादी की हानि नहीं होनी चाहिए.

माऊजो गोवा आर्ट एंड लिटरेरी फेस्टिवल के सह-संस्थापक और सह-क्यूरेटर हैं, जो 2010 में शुरू हुआ एक वार्षिक जलसा है. माऊजो को 1983 में उनके उपन्यास कर्मेलिन के लिए साहित्य अकादमी अवार्ड से नवाज़ा गया था. माऊजो कोंकणी भाषा के उपन्यासकार, आलोचक और स्क्रिप्ट राइटर है. उन्हें उनकी शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए जाना जाता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)