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केंद्रीय सूचना आयोग में क़रीब 24 हज़ार आरटीआई अपील और शिकायतें लंबित: सरकार

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि सरकार राज्य सूचना आयोगों में लंबित अपील या शिकायतों से संबंधित कोई आंकड़ा नहीं रखती है.

RTI

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बताया कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में करीब 24 हजार आरटीआई द्वितीय अपील और शिकायतें लंबित हैं.

लोकसभा में डॉक्टर बंसीलाल महतो के एक प्रश्न के लिखित जवाब में कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘सीआईसी ने सूचित किया है 26 जुलाई, 2018 तक उसके पास 23,978 द्वितीय अपीलें/ शिकायतें लंबित हैं.’

वहीं, जितेंद्र सिंह ने 27 दिसंबर 2017 को लोकसभा में बताया था कि अभी तक छह ऐसी अपीलें लंबित हैं जिन्हें साल 2012 में दायर किया गया था. यह सबसे ज्यादा समय तक लंबित रहने वाले मामले हैं.

सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय सूचना आयोग के अलावा राज्य सूचना आयोगों में भी भारी संख्या में शिकायते लंबित हैं. हालांकि, बंसीलाल महतो के इससे संबंधित सवाल पर सिंह ने बताया कि राज्य सूचना आयोगों से संबंधित ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखा जाता है.

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे अपने यहां आरटीआई पोर्टल शुरू करने की व्यावहारिकता पर गौर करें. सिंह ने बताया कि फिलहाल केंद्र सरकार से जुड़े विभागों में ऑनलाइन आरटीआई दायर करने की व्यवस्था दी गई है.

इस समय केंद्र के 2200 सरकारी कार्यलयों में ऑनलाइन आरटीआई दाखिल करने और उसका जवाब देने की व्यवस्था है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) को यह कहा गया है कि वे ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल बनाने में राज्य सरकार की मदद करें.

आरटीआई आवेदन के जवाब में देरी और लगातार बढ़ती अपीलों/शिकायतों की संख्या पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए लोक सूचना अधिकारियों (पीआईओ) की ट्रेनिंग करा रही है. इससे उनकी क्षमता में बढ़ोतरी होगी.

उन्होंने कहा कि सरकार ने लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि वे अपने स्तर पर जल्द सूचना मुहैया कराएं ताकि सूचना आयोगों में पहुंच रहीं अपीलों की संख्या में कमी आए.

बता दें कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत केंद्रीय सूचना आयोग द्वितीय अपील और शिकायतों पर सुनवाई करता है. उचित मामलों में केंद्रीय सूचना आयोग लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाता है.

अगर आयोग को ये लगता है कि किसी लोक सूचना अधिकारी ने याचिकार्ता को जानबूझ कर परेशान किया है या जानकारी नहीं दी है तो सीआईसी उस पर 25000 रूपये तक का जुर्माना लगा सकता है.

जितेंद्र सिंह ने 27 दिसंबर 2017 को लोकसभा में बताया था कि साल 2014-15 में सीआईसी ने 44 मामलों में 7,39,000 रूपये का जुर्माना लगाया था. वहीं, साल 2015-16 में आयोग ने 54 मामलों में दोषी पाए गए लोक सूचना अधिकारियों पर 10,52,500 रूपये का जुर्माना लगाया था.

इससे पहले देश भर के सूचना आयोगों में सूचना आयुक्तों के खाली पदों को भरने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दो जुलाई को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया और उनसे इस पर अपनी बात रखने को कहा है.

याचिकर्ताओं ने मांग की थी कि कोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दे कि सूचना आयोगों में खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘ये बेहद गंभीर मामला है. देश के सभी संस्थानों की यही स्थिति है.’

देश के सूचना आयोगों की क्या है स्थिति

सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना आयोग सूचना पाने संबंधी मामलों के लिए सबसे बड़ा और आखिरी संस्थान है, हालांकि, सूचना आयोग के फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. सबसे पहले आवेदक सरकारी विभाग के लोक सूचना अधिकारी के पास आवेदन करता है. अगर 30 दिनों में वहां से जवाब नहीं मिलता है तो आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपना आवेदन भेजता है.

अगर यहां से भी 45 दिनों के भीतर जवाब नहीं मिलता है तो आवेदक केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना के आयोग की शरण लेता है. लेकिन देश भर के सूचना आयोग की हालात बेहद खराब है.

आलम ये है कि अगर आज के दिन सूचना आयोग में अपील डाली जाती है तो कई सालों बाद सुनवाई का नंबर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन आयोगों में कई सारे पद खाली पड़े हैं.

1. आंध्र प्रदेश के राज्य सूचना आयोग में एक भी सूचना आयुक्त नहीं है. ये संस्थान इस समय पूरी तरह से निष्क्रिय है.

2. महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग में इस समय 40,000 से ज्यादा अपील और शिकायतें लंबित हैं लेकिन यहां पर अभी भी चार पद खाली पड़े हैं.

3. केरल राज्य सूचना आयोग में सिर्फ एक सूचना आयुक्त है. यहां पर 14,000 से ज्यादा अपील और शिकायतें लंबित हैं.

4. कर्नाटक राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के 6 पद खाली पड़े हैं जबकि यहां पर 33,000 अपील और शिकायतें लंबित हैं.

5. ओडिशा सूचना आयोग सिर्फ तीन सूचना आयुक्तों के भरोसे चल रहा है जबकि यहां पर 10,000 से अधिक अपील/शिकायतें लंबित हैं. इसी तरह तेलंगाना के सूचना आयोग में सिर्फ 2 सूचना आयुक्त हैं और यहां पर 15,000 से ज्यादा अपील और शिकायतें लंबित हैं.

6. पश्चिम बंगाल की स्थिति बहुत ज्यादा भयावह है. यहां स्थिति यह है कि अगर आज वहां पर कोई अपील फाइल की जाती है तो उसकी सुनवाई 10 साल बाद हो पाएगी. यहां पर सिर्फ 2 सूचना आयुक्त हैं.

7. वहीं, गुजरात, महाराष्ट्र और नगालैंड जैसी जगहों पर मुख्य सूचना आयुक्त ही नहीं हैं. यहां पर सूचना आयुक्त मुख्य सूचना आयुक्त के बिना काम कर रहे हैं.

बता दें कि 25 मई 2018 को नागरिक संगठन और सूचना के जन अधिकार का राष्ट्रीय अभियान (एनसीपीआरआई)  ने आरटीआई संशोधन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. इससे पहले 5 जून 2017 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया था कि विभिन्न सूचना आयोगों में आयुक्तों की भर्तियां करने की दिशा में कदम उठाए जाएं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)