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बिहार बालिका गृह: पीआईबी ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर की मान्यता रद्द की

ब्रजेश के स्वामित्व वाले अख़बार ‘प्रात: कमल’ की 300 से अधिक प्रतियां प्रकाशित नहीं होती हैं लेकिन प्रसारण संख्या 60,862 प्रति रोजाना दिखाकर बिहार सरकार से हर वर्ष क़रीब 30 लाख रुपये के विज्ञापन लिए जाते थे.

Brajesh Thakur Twitter

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बालिका गृह में बच्चियों से बलात्कार मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर की मान्यता रद्द कर दी. कुमार हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशित होने वाले अखबारों के मालिक हैं.

ब्रजेश ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने बड़े पैमाने पर सरकारी विज्ञापन पाने के लिए इन अखबारों के प्रसार का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया था.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले पीआईबी ने अपने आदेश में कहा है कि ‘प्रात: कमल’ हिंदी दैनिक के संवाददाता ब्रजेश ठाकुर को जारी कार्ड संख्या 2275 की पीआईबी प्रेस मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया गया है. कुमार की कथित आपराधिक संलिप्तता के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रजेश मुजफ्फरपुर से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्रात: कमल, पटना से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार न्यूज नेक्स्ट और समस्तीपुर जिला से उर्दू में प्रकाशित एक अखबार हालात-ए-बिहार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ा हुआ है.

कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ब्रजेश के स्वामित्व वाले हिंदी दैनिक की 300 से अधिक प्रतियां प्रकाशित नहीं होती हैं लेकिन प्रतिदिन इसकी 60,862 प्रतियां बिक्री दिखाया गया था जिसके आधार पर उसे बिहार सरकार से प्रति वर्ष करीब 30 लाख रुपये के विज्ञापन मिलते थे.

पीआईबी ने सभी मंत्रालयों और संबद्ध विभागों से भी यह कहा है कि कुमार की मान्यता के आधार पर उन्हें दी गई सारी सुविधाएं वापस ले ली जाएं. इनमें स्वास्थ्य सुविधाएं, ठहरने का सरकारी इंतजाम, रेलवे पास और अन्य फायदें शामिल हैं.

बिहार सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग (आईपीआरडी) ने 31 मार्च को कुमार के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उनकी प्रेस मान्यता रद्द कर दी थी. सरकार ने यह पता लगाने के लिए जांच भी शुरू कर दी है कि कुमार और उनके सहकर्मियों ने मान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्राप्त सुविधाओं का क्या कभी दुरूपयोग किया है.

अधिकारियों ने बताया कि कुमार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के एक पॉश इलाके में पीआईबी मान्यता प्राप्त पत्रकार कोटा के तहत एक सरकारी मकान भी मिला हुआ है, जहां उनका दिल्ली कार्यालय है.

कुमार के एनजीओ द्वारा संचालित एक स्वयं सहायता समूह के परिसर से 11 महिलाओं के लापता होने के सिलसिले में उनके खिलाफ मंगलवार को एक नई एफआईआर दर्ज की गई है.

मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथों में ले ली है और कुमार अभी न्यायिक हिरासत में हैं. यह मामला वहां रहने वाली लड़कियों के मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न से संबंधित है.

बालिका गृह में रह रहीं 42 लड़कियों में से 34 के साथ बलात्कार होने की पुष्टि हो चुकी है. बलात्कार की शिकार हुई लड़कियों में से कुछ 7 से 13 साल के बीच की हैं.

सीबीआई गहन फॉरेंसिक जांच कराएगी

मामले की जांच सीबीआई के पास आने के बाद उसने कहा है कि वह मामले की गहन फॉरेंसिक जांच कराएगी. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि सीएफएसएल की एक टीम जल्द ही मुजफ्फरपुर जाकर आश्रय गृह से फॉरेंसिक नमूने इकट्ठा करेगी.

अधिकारियों ने बताया कि पीड़िताओं के बयानों का इस्तेमाल कर समझने की कोशिश की जाएगी कि अपराध को कैसे अंजाम दिया गया और फिर इस ब्योरे का इस्तेमाल आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया जाएगा.

सीबीआई पीड़िताओं के बयान दर्ज करने के लिए मनोवैज्ञानिकों की मदद ले सकती है.

सीबीआई उन डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के भी बयान दर्ज करेगी और उनसे साक्ष्य इकट्ठा करेगी जिनकी सेवाएं पुलिस ने अपनी जांच के दौरान ली थीं.

मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) की ओर से अप्रैल में बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसमें पहली बार इस आश्रय गृह में रह रही लड़कियों से कथित दुष्कर्म की बात सामने आई थी.

मामले में बीते 31 मई को ब्रजेश ठाकुर सहित 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. अब सीबीआई ने इस मामले की जांच संभाल ली है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)