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यूपी: दलित महिला अधिकारी को पानी देने से किया मना, छह के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में विकास कार्यों की समीक्षा करने गईं उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दलित होने के चलते कथित तौर पर गांव के प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया.

A women uses a hand-pump to fill drinking water on the outskirts of Amritsar in Punjab, India, November 15, 2015. REUTERS/Munish Sharma

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कौशांबी: यूपी में एक महिला अधिकारी को दलित होने के कारण पानी नहीं देने का मामला सामने आया है. विकास कार्यों की समीक्षा करने एक गांव में गईं जिले की उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के दलित होने के चलते कथित तौर पर गांव के प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने बर्तन में पानी देने से इंकार कर दिया.

घटना से आहत उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जिलाधिकारी से इस संबंध में शिकायत की है. उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर सीमा ने बताया कि डीपीआरओ के निर्देश पर वह मंगलवार को मंझनपुर विकास खंड के अंबावां पूरब गांव गईं थीं.

वहां उनकी बोतल का पानी खत्म हो गया था. इस पर उन्होंने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान से पानी मांगा. दोनों ने उनके दलित होने के कारण बर्तन में पानी देने से इंकार कर दिया. जब उन्होंने ग्रामीणों से पानी मांगा तो प्रधान और वीडीओ ने उन्हें भी इशारा कर पानी देने से मना कर दिया. अधिकारी ने बताया कि पानी मांगने पर एक क्षेत्र पंचायत ने यहां तक कह दिया कि बर्तन में पानी देने से बर्तन अशुद्ध हो जाएगा.

अमर उजाला की खबर के मुताबिक इस मामले में छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. आरोपियों में तीन ग्राम प्रधान, सचिव, वीडीओ और कोटेदार शामिल हैं. पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बाद जांच शुरू कर दी है. इस संबंध में जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया है.

अमर उजाला के मुताबिक डीएम के निर्देश पर एसपी प्रदीप गुप्ता ने अंबावां पूरब ग्राम प्रधान शिवसंपत, सेक्रेटरी रविदत्त मिश्र, बीडीसी झल्लर तिवारी, कोटेदार राजेश सिंह, भइला मकदूमपुर प्रधान पति पवन यादव और संइबसा प्रधान अंसार अली के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति निश्पृश्यता अधिनियम के तहत नगर कोतावली में केस दर्ज करा दिया है.

इस मामले में एसपी ने कहा कि जांच कराई जा रही है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक महिला अधिकारी इसलिए नाराज हो गईं क्योंकि उन्हें पीने के लिए मिनरल वॉटर नहीं दिया गया. इसलिए उन्होंने कई लोगों पर दलित अपमान का आरोप लगाया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)