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राफेल सौदे की जांच से बचने के लिए आलोक वर्मा को हटाया, ये मोदी का सीबीआईगेट है: प्रशांत भूषण

सीबीआई विवाद: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का कहना है कि सीबीआई नवनियुक्त अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव के ख़िलाफ़ गंभीर शिकायतें हैं. निदेशक आलोक वर्मा ने उन्हें सीबीआई से हटाने के लिए और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की सिफ़ारिश की थी.

Prashant Bhushan, a senior lawyer, speaks with the media after a verdict on right to privacy outside the Supreme Court in New Delhi, India August 24, 2017. REUTERS/Adnan Abidi

प्रशांत भूषण (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सीबीआई के दो वरिष्ठतम अधिकारियों के बीच का विवाद काफी बढ़ गया है. केंद्र की मोदी सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है.

हालांकि आलोक वर्मा ने केंद्र सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. कोर्ट आने वाले शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करेगा.

वहीं सीबीआई के संयुक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है. राव की नियुक्ति होते ही राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच कर रहे सीबीआई के 13 अधिकारियों का तबादला कर दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने नागेश्वर राव की नियुक्ति पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि नागेश्वर राव के खिलाफ काफी गंभीर शिकायतें हैं. सीबीआई डायरेक्टर ने कुछ महीने पहले उनके खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की थी.

एनडीटीवी के मुताबिक प्रशांत भूषण ने कहा कि ‘सीबीआई डायरेक्टर को गलत तरीके से हटाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था कि सीबीआई डायरेक्टर का टर्म दो साल के लिए फिक्स होगा और सिर्फ सेलेक्शन कमेटी ही सीबीआई डायरेक्टर को हटा सकता है. हमारी याचिका संभवत: कल तक दायर हो जाएगी.’

प्रशांत भूषण गुरुवार को इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘राफेल डील की जांच सीबीआई नहीं कर सके, इसलिए शायद सीबीआई डायरेक्टर को हटाया गया है. हमने, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने सीबीआई डायरेक्टर से राफेल डील की जांच की मांग की थी. सीबीआई डायरेक्टर ने राफेल डील से जुड़ी कुछ फाइलें सरकार से मांगी थी.’

मालूम हो कि हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मीट कारोबारी मोईन क़ुरैशी को क्लीनचिट देने में कथित तौर पर घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने बीते दिनों अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है और सीबीआई ने अपने ही दफ़्तर में छापा मारकर अपने ही डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है.

डीएसपी देवेंद्र कुमार को सात दिन की हिरासत में भेज दिया गया हैं. देवेंद्र ने अपनी गिरफ़्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर तक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया. 29 अक्टूबर को मामले की सुनवाई होगी जहां पर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को अस्थाना के ख़िलाफ़ लगे आरोपों का जवाब देना होगा.

अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने मीट कारोबारी मोईन कुरैशी भ्रष्टाचार मामले में हैदराबाद के एक व्यापारी से दो बिचौलियों के ज़रिये पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी. सीबीआई का आरोप है कि लगभग तीन करोड़ रुपये पहले ही बिचौलिये के ज़रिये अस्थाना को दिए जा चुके हैं.

कहा जा रहा है कि सीबीआई के दोनों वरिष्ठतम अधिकारियों के बीचे मचे इस घमासान से जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है.

दरअसल कार्मिक मंत्रालय के अधीन ही सीबीआई काम करती है और अभी इस मंत्रालय के प्रभारी नरेंद्र मोदी हैं.

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