भारत

नेहरू मेमोरियल से प्रताप भानु मेहता का इस्तीफ़ा मंज़ूर, अर्णब गोस्वामी समेत चार नियुक्त

केंद्र सरकार ने नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की कार्यकारी समिति के सदस्यों- अर्थशास्त्री नितिन देसाई, पूर्व नौकरशाह बीपी सिंह, प्रताप भानु मेहता और प्रो. उदयन मिश्रा की जगह पत्रकार राम बहादुर राय, पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर, अर्णब गोस्वामी और भाजपा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे को नियुक्त किया है.

अर्णब गोस्वामी और प्रताप भानु मेहता. (फोटो साभार: फेसबुक)

अर्णब गोस्वामी और प्रताप भानु मेहता. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने राजधानी नई दिल्ली के तीन मूर्ति इस्टेट स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय (एनएमएमएल) सोसाइटी के नए सदस्यों के रूप में समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्णब गोस्वामी समेत चार लोगों को नियुक्त किया है.

केंद्र सरकार नेहरू मेमोरियल संग्रहालय की जगह सभी प्रधानमंत्रियों के लिए एक संग्रहालय बनाने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला भी रख दी है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, तीन मूर्ति इस्टेट में ‘सभी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्रहालय’ की आधारशिला रखने के कुछ दिन बाद ही केंद्र ने नेहरू मेमोरियल के सदस्यों- अर्थशास्त्री नितिन देसाई, प्रो. उदयन मिश्रा और पूर्व नौकरशाह बीपी सिंह को हटा दिया है.

बीते 29 अक्टूबर को संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी अध्यादेश में नए सदस्यों की नियुक्ति के बारे में जानकारी दी गई है. नए सदस्यों में अर्णब गोस्वामी के अलावा भाजपा सांसद और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर और पत्रकार व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय शामिल हैं.

नए सदस्यों का कार्यकाल 26 जुलाई 2020 तक या फिर अगले आदेश तक बना रहेगा.

मंत्रालय के अध्यादेश में यह भी कहा गया है कि मेमोरियल के सदस्य प्रताप भानु मेहता का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. इसके अलावा बताया गया है कि नितिन देसाई, प्रो. उदयन मिश्रा और बीपी सिंह अब नेहरू मेमोरियल के सदस्य नहीं हैं.

नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं लाइब्रेरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं लाइब्रेरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

मालूम हो कि प्रताप भानु मेहता नेहरू मेमोरियल के कार्यकारी समिति के सदस्य थे. उन्होंने राजनीति दबाव का कारण बताकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अर्णब गोस्वामी मेहता की जगह लेंगे.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेहरू मेमोरियल के संबंध में केंद्र सरकार के रवैये को लेकर तीनों पूर्व सदस्य- नितिन देसाई, प्रो. उदयन मिश्रा और बीपी सिंह काफी आलोचनात्मक रुख़ रखते थे. देसाई और सिंह ने नेहरू मेमोरियल की जगह सभी प्रधानमंत्रियों के लिए बनाए जा रहे संग्रहालय के विरोध में खुलकर अपने विचार रखे थे.

रिपोर्ट के अनुसार पिछली जनरल मीटिंग में बीपी सिंह ने कहा था, ‘सभी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्रहालय के नाम और अवधारणा से मुझे समस्या है. अगर सभी प्रधानमंत्रियों के लिए संग्रहालय बनाया जाएगा तो राज्यों से सभी मुख्यमंत्रियों का संग्रहालय बनाने की मांग उठ सकती है, क्योंकि वे सभी राज्य के नेता हैं.’

नितिन देसाई भी तीन मूर्ति इस्टेट स्थित संग्रहालय में बदलाव से सहमत नहीं थे. उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या इस परियोजना का नेहरू संग्रहालय में बनाया जाना ज़रूरी है. उन्होंने कहा था कि नेहरू मेमोरियल में सभी प्रधानमंत्रियों का संग्रहालय बनाया जाना बिन बुलाए विवादों को जन्म देना है.

संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी आदेश पत्र.

संस्कृति मंत्रालय की ओर से जारी आदेश पत्र.

जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड को तीन मूर्ति परिसर ख़ाली करने को मिले नोटिस पर रोक 

दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन मूर्ति एस्टेट परिसर को ख़ाली करने के लिए जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड (जेएनएमएफ) को दिए गए नोटिस पर गुरुवार को रोक लगा दी.

अदालत ने जेएनएमएफ की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. जेएनएमएफ ने उसे इस परिसर को ख़ाली करने के 15 अक्टूबर को संपदा अधिकारी से मिले नोटिस को रद्द करने की मांग की है.

जस्टिस अनु मल्होत्रा ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर तय की.

जेएनएमएफ ने इन दावों से इनकार किया है कि संबंधित संपत्ति पर उसका अवैध क़ब्ज़ा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने परिसर ख़ाली करने के आदेश के ख़िलाफ़ रोक लगाने की याचिका दायर करते हुए कहा था कि यह संपत्ति नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की है.

1964 में स्थापित यह फंड 1967 से तीन मूर्ति इस्टेट परिसर में स्थापित है. तीन मूर्ति भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का आवास हुआ करता था.

सिब्बल ने यह भी कहा है कि प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू से जुड़ीं बहुत सारी किताबें और लिपि यहां के लाइब्रेरी में रखी हुई हैं, जो बेहद महत्वपूर्ण हैं.

जेएनएमएफ के कार्यालय मुख्य बिल्डिंग का हिस्सा नहीं हैं बल्कि पूर्वी हिस्से में बैरकों में है. उसका प्रवेश भी तीन मूर्ति मार्ग पर अलग से है.

कांग्रेस का मानना है कि मौजूदा केंद्र सरकार तीन मूर्ति को प्रधानमंत्रियों के लिए संग्रहालय बनाकर पंडित नेहरू की विरासत को ख़त्म करना चाहती है. 65 सालों से चल रहे जेएनएमएफ को तीन मूर्ति इस्टेट परिसर से बाहर निकालने का मौजूदा सरकार का निर्णय सिर्फ़ राजनीतिक दुश्मनी है.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

Comments