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तेलुगू कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव को पुणे पुलिस ने हिरासत में लिया

वरवर राव पर माओवादियों से संपर्क रखने का आरोप है. पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा के संबंध में बीते 28 अगस्त को पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. वरवर राव उनमें से एक थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राव अब तक हैदराबाद के अपने घर में नज़रबंद थे.

कवि वरवर राव. (फोटो साभार: फेसबुक/@VaraVaraRao)

कवि वरवर राव. (फोटो साभार: फेसबुक/@VaraVaraRao)

पुणे: माओवादियों से संपर्क रखने के आरोपी तेलुगु कवि वरवर राव को पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव में हुए एलगार परिषद सम्मेलन के मामले में हैदराबाद से शनिवार को हिरासत में ले लिया.

राव अब तक हैदराबाद के अपने घर में नज़रबंद थे.

पुणे पुलिस के संयुक्त आयुक्त शिवाजी बोडखे ने कहा कि हैदराबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनकी नज़रबंदी की बढ़ाई गई मियाद 15 नवंबर को समाप्त हो गई.

इससे पहले पुणे पुलिस ने 26 अक्टूबर को सह-आरोपी अरुण फरेरा और वर्नान गोनसालविस को हिरासत में लिया था जबकि सुधा भारद्वाज को अगले दिन हिरासत में लिया गया था.

मालूम हो कि पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एलगार परिषद के सम्मेलन के बाद दर्ज की गई एक प्राथमिकी के सिलसिले में बीते 28 अगस्त को महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर पांच कार्यकर्ताओं- कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस को गिरफ़्तार किया था.

पुलिस का आरोप है कि इस सम्मेलन के बाद राज्य के भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़की थी. पुलिस ने आरोप लगाया है कि इस सम्मेलन के कुछ समर्थकों के माओवादियों से संबंध हैं.

उनकी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी जिसके बाद कोर्ट ने इन्हें नज़रबंद रखने का फैसला सुनाया था.

इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले साल पुणे में आयोजित एलगार परिषद की ओर से आयोजित कार्यक्रम से माओवादियों के कथित संबंधों की जांच करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को जून में गिरफ्तार किया था.

78 वर्षीय वरवर राव तेलुगू भाषा के कवि और लेखक होने के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता भी है. उन्हें तेलुगू साहित्य के सर्वश्रेष्ठ वामपंथी आलोचकों में एक माना जाता है. वह वर्ष 1957 से कविताएं लिख रहे हैं.

वरवर राव विपलव रचयिताला संगम (रिवोल्यूशनरी राइटर्स एसोसिएशन) के संस्थापकों में से एक हैं. इस संगठन को ‘विरासम’ के नाम से जाना जाता है.

आपातकाल के दौरान कई तरह के आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में उन्हें आरोपमुक्त कर कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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