राजनीति

नरोदा पाटिया नरसंहार के दोषी बाबू बजरंगी को मिली ज़मानत

साल 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में बाबू बजरंगी दोषी क़रार दिए जाने के बाद 21 साल की सजा काट रहे हैं. दंगे भड़कने के बाद अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में 28 फरवरी 2002 को भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी थी.

बाबू बजरंगी, (फोटो: पीटीआई)

बाबू बजरंगी, (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: साल 2002 में गुजरात दंगों के दोषी बाबू बजरंगी को सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को ज़मानत मिल गई है. उन्हें यह ज़मानत स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दी गई है. इससे पूर्व इस साल जनवरी में इसी केस में मामले में चार दोषियों राजकुमार, हर्षद, उमेश भाई भारवाड और प्रकाशभाई राठौड़ को सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत दी थी.

बाबू बजरंगी नरोदा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद 21 साल की सजा काट रहे हैं.

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार, ज़मानत के लिए बाबू बजरंगी ने आंखों की रोशनी चली जाने का हवाला दिया था. बाबू बजरंगी को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, मगर बाद में गुजरात हाईकोर्ट ने सजा घटाकर 21 साल कर दी थी. हालांकि इस मामले में बजरंगी की एक अपील सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है. फिलहाल बाबू बजरंगी अब तक पांच साल जेल में गुजार चुका है.

इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के नरोदा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार दिए गए चार लोगों को ज़मानत दे दी थी. गुजरात हाईकोर्ट ने इन चारों आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाई थी. 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े इस मामले में 28 फरवरी, 2002 को भीड़ ने 97 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था.

नरोदा पाटिया मामला

साल 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के एक दिन बाद भड़के दंगों में अहमदाबाद के नरोदा पाटिया क्षेत्र में 28 फरवरी, 2002 को भीड़ ने 97 लोगों की हत्या कर दी. इस घटना में मारे गये ज्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय के थे.

इसके बाद 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच पुलिस के बजाय कोर्ट द्वारा गठित किया गया विशेष जांच दल (एसआईटी) करे. इसके बाद अगस्त 2009 में नरोदा पाटिया में हुए दंगे पर मुकदमा शुरू हुआ और 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए.

इस मामले की सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए गए. अगस्त 2012 को कोर्ट ने नरोदा पाटिया दंगों के मामले में बाबू बजरंगी और गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री कोडनानी समेत 32 लोगों को दोषी ठहराया, जबकि 29 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया.

निचली अदालत ने कोडनानी को 28 साल कैद की सजा सुनाई थी, जबकि बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा और बाकी दोषियों को 21 सालों की सजा दी गई.

20 अप्रैल 2018 को गुजरात हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए इस मामले में 29 आरोपियों में से 12 को दोषी ठहराया था. कोर्ट ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी समेत 18 लोगों को बरी कर दिया था, जबकि बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी समेत 13 लोगों को कोर्ट ने दोषी माना था और बाबू बजरंगी की उम्रकैद की सजा कम करते हुए 21 साल कर दी थी.