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चुनाव के दौरान निष्पक्ष और भेदभाव रहित कार्रवाई करें वित्त मंत्रालय की एजेंसियां: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय को यह सख़्त सलाह हाल में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में राजनीतिक नेताओं या उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर आयकर विभाग के मारे गए छापों के संबंध में दी है. आयोग ने कहा कि ऐसी कार्रवाई की जानकारी उसके अधिकारियों के संज्ञान में होनी चाहिए.

फोटो: पीटीआई

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नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग ने वित्त मंत्रालय को रविवार को सलाह दी कि चुनाव के दौरान उसकी प्रवर्तन एजेंसियों की कोई भी कार्रवाई ‘निष्पक्ष’ और ‘भेदभाव रहित’ होनी चाहिए तथा ऐसी कार्रवाई की जानकारी चुनाव आयोग के अधिकारियों के संज्ञान में होनी चाहिए.

आयोग की यह सलाह रविवार को मध्य प्रदेश में की गई आयकर विभाग की छापेमारी और हाल ही में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में राजनीतिक नेताओं या उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर मारे गए छापों की पृष्ठभूमि में आई है.

आदर्श आचार संहिता के 10 मार्च को लागू होने के बाद आयकर विभाग ने राजनीतिक नेताओं और उनके सहयोगियों पर कई छापे मारे हैं जिसे विपक्ष चुनावी मौसम में केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करार दे रहा है.

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसियों ने पिछले कुछ समय में 55 छापेमारी की हैं.

चुनाव आयोग की यह सलाह उन आरोपों के बीच आई है कि सरकार चुनावी मौसम में विपक्षी पार्टियों को निशाना बनाने के लिए इन एजेंसियों का प्रयोग कर रही है.

केंद्रीय राजस्व सचिव को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि वह, ‘सभी एजेंसियों को सख्त सलाह देते हैं कि चुनाव के दौरान सभी कानूनी कार्रवाइयां भले ही स्पष्ट रूप से चुनावी कदाचार को रोकने के लिहाज से की गई हों, पर वे पूरी तरह निष्पक्ष एवं भेदभाव रहित होनी चाहिए.’

वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व खुफिया निदेशालय राजस्व विभाग की कार्यकारी शाखाएं हैं.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के निजी सचिव (ओएसडी) प्रवीण कक्कड़ के आवास एवं अन्य परिसरों पर रविवार को आयकर विभाग ने छापेमारी की.

दिल्ली, भोपाल, इंदौर और गोवा स्थित 50 ठिकानों पर मारे गए इस छापे में अब तक नौ करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं. इस कार्रवाई में कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी, अमिरा और मोजर बीयर कंपनी भी शामिल हैं. हाल ही में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में भी छापेमारी की थी.

पत्र में कहा गया कि चुनावी मकसद के लिए अवैध धन के संदिग्ध इस्तेमाल के मामले में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान ‘उपयुक्त प्रकार से सूचित’ रखा जाना चाहिए.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ वर्षों में मतदाताओं का मत बदलने की मंशा से धनबल का इस्तेमाल निष्पक्ष, नैतिक एवं विश्वसनीय चुनाव कराने में बड़ी चुनौती के तौर पर उभरा है.