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माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सहित 19 लोगों पर केस दर्ज

मध्य प्रदेश के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक और आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में पूर्व कुलपति बीके कुठियाला मुख्य आरोपी हैं. कुठियाला के अलावा बाकी 18 लोगों पर गलत तरीके से विश्वविद्यालय में नियुक्ति पाने का आरोप है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

(फोटो साभार: फेसबुक)

भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में कथित तौर पर हुई प्रशासनिक एवं आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में इस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बृज किशोर कुठियाला (बीके कुठियाला) सहित 19 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

ईओडब्ल्यू के अतिरिक्त महानिदेशक केएन तिवारी ने रविवार को बताया, ‘माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुई प्रशासनिक एवं आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में कुठियाला सहित 19 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. कुठियाला मुख्य आरोपी हैं.’

हालांकि, उन्होंने कहा, ‘अभी इस एफआईआर में कोई राजनेता नहीं है.’

उन्होंने कहा कि इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420, 409 एवं 120 (बी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

तिवारी ने बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पिछले करीब 15 सालों के दौरान प्रशासनिक एवं आर्थिक अनियमितताएं हुईं, जिनकी जांच चल रही है.

उन्होंने कहा कि पिछली जनवरी में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी गोपाल रेड्डी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पूर्व विशेष अधिकारी (ओएसडी) भूपेंद्र गुप्ता एवं संदीप दीक्षित की तीन सदस्यीय समिति गठित की थी. पिछले मार्च में इन्होंने रिपोर्ट दी थी.

उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दीपेंद्र सिंह बघेल से आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसमें विशेष तौर पर पिछले कुलपति बीके कुठियाला के 2010 से लेकर 2018 के आठ साल के कार्यकाल में उनके द्वारा प्रशासनिक एवं आर्थिक अनियमितताओं की विस्तार से बताया गया था. उसके आधार पर हमने रिपोर्ट दर्ज की है.

तिवारी ने बताया कि इसमें मुख्य आरोपी तत्कालीन कुलपति कुठियाला हैं और उनके साथ करीब 18 आरोपी और भी हैं. ये सभी उसी विश्वविद्यालय के ही लोग हैं, जो ग़लत तरीके से नियुक्त किए गए या जिन्होंने कुठियाला के संरक्षण में गलत तरीके से आर्थिक एवं प्रशासनिक अनियमितताएं की.

उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए उन्होंने अपने इलाज के दौरान कुछ मेडिकल बिल रीएम्बर्स कराए थे, जिनको वह नहीं ले सकते थे. तिवारी ने बताया कि इस मामले में उनकी गिरफ्तारियां हो सकती हैं. उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा. उनसे आगे पूछताछ की जाएगी.

हालांकि दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कुठियाला सहित 20 प्रोफेसरों पर एफआईआर दर्ज करने की बात कही है.

रिपोर्ट के अनुसार, एफआईआर में प्रो. बृजकिशोर कुठियाला के अलावा डॉ. अनुराग सीठा, डॉ. पी. शशिकला, डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, डॉ. अविनाश बाजपेयी, डॉ. अरुण कुमार भगत, प्रो. संजय द्विवेदी, डॉ. मोनिका वर्मा, डॉ. कंचन भाटिया, डॉ. मनोज कुमार पचारिया, डॉ. आरती सारंग, डॉ. रंजन सिंह, सुरेंद्र पॉल, डॉ. सौरभ मालवीय, सूर्यप्रकाश, प्रदीप कुमार डहेरिया, सत्येंद्र कुमार डहेरिया, गजेंद्र सिंह अवश्या, डॉ. कपिल राज चंदोरिया और रजनी नागपाल के नाम शामिल है.

रिपोर्ट के अनुसार, इसमें ऐसे भी नाम शामिल हैं जिनकी नियुक्ति दिग्विजय शासनकाल में हुई. इसमें डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, डॉ. आरती सारंग आदि थे.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ईओडब्ल्यू ने एफआईआर में ज़िक्र किया है कि 2003 से 2018 के बीच संस्थान में यूजीसी के नियमों के विपरीत अपात्र व्यक्तियों की नियुक्ति की गई है. कुठियाला ने विश्वविद्यालय के अकाउंट से संघ से जुड़ी संस्थाओं व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित अन्य संस्थाओं को मनमाने भुगतान किए हैं. इसके अलावा ख़ुद और परिवार के सदस्यों पर भी ख़र्च किया.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों व आर्थिक गड़बड़ियों की जांच के लिए कमेटी बनाई थी. इसकी जांच रिपोर्ट में कई अनियमितताएं सामने आई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, कुठियाला ने 2010 से 2018 के बीच एबीवीपी को 8 लाख रुपये, राष्ट्रीय ज्ञान संगम के लिए 9.50 लाख रुपये, जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा श्रीश्री रविशंकर के आश्रम में आयोजित राष्ट्रीय विद्वत संगम के लिए 3 लाख रुपये, भारतीय वेब प्राइवेट लिमिटेड नागपुर को 46.607 रुपये का भुगतान किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)