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महाराष्ट्र: वर्जिनिटी टेस्ट का विरोध करने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार

महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले का मामला. गृह राज्य मंत्री ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट को यौन उत्पीड़न का एक रूप माना जाएगा. कानून और न्यायपालिका विभाग के साथ विचार-विमर्श के बाद इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया जाएगा.

ठाणे, महाराष्ट्र (फोटो: गूगल मैप)

ठाणे, महाराष्ट्र (फोटो: गूगल मैप)

ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कंजरभट समुदाय के एक परिवार ने महिलाओं के वर्जिनिटी टेस्ट (कौमार्य परीक्षण) की प्रथा का विरोध करने पर सामाजिक बहिष्कार किए जाने को लेकर पुलिस से संपर्क किया है. एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी.

अधिकारी ने कहा कि पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर ठाणे पुलिस ने अंबरनाथ कस्बे के 4 लोगों के खिलाफ बुधवार की रात मामला दर्ज किया है. इनके खिलाफ महाराष्ट्र जन सामाजिक बहिष्कार निषिद्ध (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.

शिकायतकर्ता विवेक तमाइचिकर ने पुलिस को बताया कि उनके समुदाय की जाति पंचायत ने बीते एक साल से उनके परिवार का बहिष्कार कर दिया है क्योंकि उन्होंने उस प्रथा का विरोध किया था, जिसके तहत नवविवाहित महिला को यह साबित करना होता है कि वह शादी से पहले कुंवारी थी.

विवेक ने आरोप लगाया कि उनकी पंचायत ने समुदाय के सभी सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे उनके परिवार के साथ किसी तरह का संबंध न रखें.

विवेक ने संवाददाताओं से कहा, ‘सोमवार को मेरी दादी का देहांत हो गया लेकिन बहिष्कार की वजह से समुदाय के लोग अंतिम संस्कार के लिए नहीं आए. उसी दिन कस्बे में एक विवाह था और समुदाय के लोग वहां जश्न के लिए चले गए.’

शिकायतकर्ता ने कहा कि प्रगतिशील समाज में इस तरह के बहिष्कार की कोई आवश्यकता नहीं है. अंबरनाथ पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, ‘शिकायत के बाद चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है.’

नवभारत में छपी खबर के मुताबिक अंबरनाथ के प्रसिद्ध फातिमा स्कूल परिसर निवासी विवेक तमाइचिकर का डेढ़ साल पहले उसी के समाज की लड़की से विवाह हुआ था.

शादी के बाद जाति पंचायत की मांग पर होने वाले वर्जिनिटी टेस्ट का विवेक ने विरोध किया था. इसी कारण जाति पंचायत ने उस दंपति का बहिष्कार कर दिया.

सोमवार की रात विवेक की दादी का निधन हो गया. इस दुःख की घड़ी में समाज का कोई व्यक्ति उसके घर नहीं गया. सभी गांव वाले समाज के एक व्यक्ति के घर विवाह समारोह चले गए.

इसी कार्यक्रम के दौरान जाति पंचायत के एक नेता ने लोगों से आह्वान किया कि तमाइचिकर के घर अंतिम यात्रा में कोई शामिल न हों. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से पूरा मामला सामने आया.

पीड़ित तमाइचिकर का कहना है कि निधन के बाद होने किए जाने वाली धार्मिक विधियों को पूरा करने के बाद वह इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन व मानविधिकार आयोग के पास न्याय मांगेंगे.

महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल फरवरी में कहा था कि वह जल्द ही महिला को वर्जिनिटी टेस्ट कराने के लिए बाध्य करने को दंडनीय अपराध बनाने जा रही है.

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री रणजीत पाटिल ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट को यौन उत्पीड़न का एक रूप माना जाएगा. कानून और न्यायपालिका विभाग के साथ विचार-विमर्श के बाद इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)