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बिहार में लापरवाही के आरोप में 66 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज

वैशाली के एसपी एमएस ढिल्लन ने हाजीपुर के एसएचओ को इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए. आरोप है कि इन अधिकारियों ने जिले से तबादला होने के सालों बाद भी लंबित मामले अन्य अधिकारियों को नहीं सौंपे थे.

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पटनाः बिहार में 66 पुलिसकर्मियों पर एक साथ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें तीन डीएसपी और 50 पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एफआईआर वैशाली जिले के हाजीपुर पुलिस थाने में सोमवार शाम को दर्ज की गई.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वैशाली के एसपी एमएस ढिल्लन ने हाजीपुर के एसएचओ को इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए. आरोप है कि इन अधिकारियों ने जिले से तबादला होने के सालों बाद भी लंबित मामले अन्य अधिकारियों को नहीं सौंपे थे.

इन सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों का काफी पहले जिले से अन्य स्थानों पर तबादला कर दिया गया था. इनमें से तीन आरोपी डीएसपी अब सीबीआई में हैं.

एफआईआर में जिन आरोपी डीएसपी का नाम है, उनमें नागेंद्र प्रसाद फिलहाल सीबीआई में हैं. पंकज रावत बेतिया में एसडीपीओ सदर हैं और अशोक प्रसाद पटना में डीएसपी हैं.

इन पुलिस अधिकारियों को पहले नोटिस जारी कर कहा गया था कि वे तबादले से पहले वे जिन आपराधिक मामलों की जांच कर रहे हैं, उन्हें दूसरे अधिकारियों को सौंप दे लेकिन इन आरोपी अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया.

तबादले के कई सालों बाद भी अन्य पुलिसकर्मियों को मामले नहीं सौंपे जाने की वजह से 66 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 634 और 409 के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

पुलिस मुख्यालय ने बताया कि दूसरे जिलों को भी इस तरह की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के आदेश पर वैशाली में आपराधिक घटनाओं, लंबित मामलों की समीक्षा करने के लिए लोगों का फीडबैक लिया जा रहा है. इसी दौरान बड़े स्तर पर मामले लंबित पाए गए, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई.

द वायर से बात करते हुए सदर पुलिस स्टेशन, हाजीपुर के एसएचओ रोहन कुमार ने 66 पुलिसकर्मियों पर एक साथ एफआईआर दर्ज करने की पुष्टि की.

रोहन कुमार ने कहा, ‘66 पुलिसकर्मियों पर एक साथ एफआईआर दर्ज किए जाने की बात सही. यहां से ट्रांसफर होने के बाद भी इन लोगों ने अपने केस का चार्ज संबंधित अधिकारी को नहीं सौंपा था. ये मामले पांच, सात या आठ साल पुराने हैं. इन मामलों में अभी जांच होगी, केस कोर्ट में जाएंगे फिर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.’