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घटिया हिप इंप्लांट के लिए अमेरिका में जुर्माना देगी जॉनसन एंड जॉनसन, भारत में इनकार

जॉनसन एंड जॉनसन पर आरोप है कि उसके दोषपूर्ण हिप इंप्लांट के चलते दुनियाभर में ढेरों मरीजों की सेहत पर बुरा असर पड़ा है. अमेरिका में कई मुकदमों के बाद अब कंपनी एक अरब डॉलर का जुर्माना भरेगी, जबकि भारत में यह पीड़ितों को मुआवज़ा देने को तैयार नहीं है.

फोटो रॉयटर्स

फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्लीः वैश्विक फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन अमेरिका में दोषपूर्ण पिनैकल हिप इंप्लांट लगाने के चलते एक अरब डॉलर का भुगतान करने को तैयार हो गई है. कंपनी ने सात मई को अमेरिका के टेक्सास की एक अदालत के समक्ष इसे स्वीकार किया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां कंपनी के खिलाफ 10 सालों 2003 से 2013 के दौरान 6,000 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं जहां मरीजों ने घटिया हिप इंप्लांट लगाने की शिकायत की थी. कंपनी ने 2013 में इस उत्पाद को बाजार से हटा लिया था.

हालांकि, इस मामले में दोहरा रवैया अपनाते हुए कंपनी भारतीय पीड़ितों को जुर्माना देने के लिए तैयार नहीं है. यहां कंपनी सरकार के उस आदेश के खिलाफ लड़ रही है, जिसमें कंपनी को इसके घटिया एएसआर हिप इंप्लांट के चलते पीड़ित मरीजों को 20 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये जुर्माना देने की बात कही गई थी.

एएसआर हिप इंप्लांट कंपनी के पिनैकल इंप्लांट के बाद बाजार में आया था. कंपनी का कहना है कि उसे पिनैकल को लेकर भारत से किसी तरह की नकारात्मक रिपोर्ट नहीं मिली है.

हालांकि, मेडिकल रिकॉर्डस कुछ और कहते हैं. नवंबर में इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में सामने आया था कि तीन मरीज घटिया पिनैकल हिप इंप्लांट के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रहे हैं और अब ऐसे चार और मामले सामने आए हैं.

इनमें से तीन मरीजों को ये तक नहीं पता था कि उनके शरीर में पिनैकल इंप्लांट लगा हुआ है और कम से कम दो मामलों में यह स्पष्ट है कि कंपनी को इस गड़बड़ी के बारे में पता था.

इन मरीजों के हिप इंप्लांट में मौजूद कोबाल्ट-क्रोमियम आयन रिसकर इनके शरीर में जा रहा है, जिससे मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. इनमें खून में जहरीली धातुएं घुल रही हैं, जिससे दर्द बढ़ रहा है और शरीर के अंग खराब हो रहे हैं.

पिनैकल इंप्लांट की वजह से मरीजों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को लेकर पर जॉनसन एंड जॉनसन के प्रवक्ता ने कहा, ‘फिलहाल अभी तक हमें इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिली है.’

जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा 2018 में अमेरिकी विनियामक सिक्योरिटीज एक्सचेंज एंड कमिशन (एसईसी) के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों में कंपनी ने स्वीकार किया है कि उत्पाद दायित्व के लिए पिनैकल सबसे प्रमुख मामलों में से एक है. कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका में अकेले पिनैकल से संबंधित 10,500 मामले दर्ज हैं.

भारत में एएसआर के मामले में सरकार ने पिछले साल एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. इस समिति ने कहा था कि कंपनी अनुमानित रूप से 4,000 पीड़ितों को कम से कम 20 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर दे. सरकार द्वारा गठित एक अन्य समिति ने 1.22 करोड़ रुपये के हर्जाने की सिफारिश की थी.

हालांकि, जॉनसन एंड जॉनसन ने इन सिफारिशों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां कंपनी ने कहा था कि जिन लोगों की दोबारा सर्जरी हुई है, कंपनी ऐसे 66 मरीजों को 25-25 लाख रुपये का भुगतान करेगी.

कंपनी ने 2010 में दुनियाभर से दोषपूर्ण एएसआर को वापस ले लिया था. मालूम हो कि भारत में एएसआर को बिना चिकित्सकीय परीक्षण के, यूरोपीय नियामकों द्वारा पिनैकल को मिली अनुमति के आधार पर ही मंजूरी दी गई थी.

कंपनी ने 2013 में पिनैकल को भी बाजार से वापस ले लिया था लेकिन तब तक बहुत नुकसान हो चुका था. दोषपूर्ण एएसआर इंप्लांट के बारे में रिपोर्ट आने के बाद पिनैकल इंप्लांट वाले लोगों ने मरीजों के अधिकार के लिए काम करने वाले संगठन ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क से संपर्क किया.

इस संगठन की सह-संयोजक मालिनी ऐसोला कहती हैं, ‘पिनैकल का नियामक इतिहास भी एएसआर जितना ही खराब रहा है. प्रतिकूल प्रभावों की बात करें तो दोनों तरह के इंप्लांट में कोई फर्क नहीं है. एएसआर के उलट जॉनसन एंड जॉनसन ने स्वेच्छा से पिनैकल इंप्लांट में पिनैकल धातु का इस्तेमाल बंद किया था. इसलिए वे नियामक जांच का खामियाजा भुगतने से बच गए. और सरकार को इन इंप्लांट के दोषपूर्ण होने के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी.’