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जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने पर पुलवामा जैसा हमला दोबारा हो सकता है: इमरान खान

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह ऐसा युद्ध होगा, जिसे कोई नहीं जीतेगा और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फोटो साभार: ट्विटर/@PTIofficial)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फोटो साभार: ट्विटर/@PTIofficial)

इस्लामाबादः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने के बाद पुलवामा जैसे हमले की आशंका जताते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध छिड़ सकता है.

उन्होंने संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते कहा, ‘यह ऐसा युद्ध होगा जिसे कोई नहीं जीतेगा और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.’

पाकिस्सतान संसद की यह संयुक्त बैठक जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने के भारत सरकार के फैसले के एक दिन बाद कश्मीर की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी.

भारत जम्मू कश्मीर को अपना अखंड हिस्सा कहता है और इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी शामिल है.

प्रधानमंत्री खान ने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियार से संपन्न दोनों पड़ोसियों के बीच मौजूदा तनाव में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. उन्होंने कहा कि कश्मीरी विरोध करेंगे और भारत उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा.

खान ने कहा, ‘इस दृष्टिकोण से एक बार फिर पुलवामा जैसे हमले हो सकते हैं. मैं आशंका जता चुका हूं, यह होगा. एक बार फिर वे हम पर दोष मढेंगे. वे हम पर फिर हमला कर सकते हैं और हम जवाब देंगे.’

इमरान खान ने सांसदों से कहा, ‘फिर क्या होगा? जंग कौन जीतेगा ? कोई भी नहीं जीतेगा और सारी दुनिया के लिए इसके गंभीर नतीजे होंगे. परमाणु हमले को लेकर ब्लैकमेल करने की बात नहीं है.’

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर में हालात का संज्ञान लेने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार वैश्विक नेताओं से संपर्क करेगी और कश्मीर में हालात के बारे में उन्हें अवगत कराएगी.

उन्होंने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित हर मंच पर लड़ेंगे. इसके साथ ही खान ने कहा कि पाकिस्तान मामले को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में भी ले जाने की सोच रहा है.

इमरान खान ने कहा कि उन्होंने भारत सहित सभी पड़ोसियों से संबंध बेहतर करने की कोशिश की लेकिन नई दिल्ली ने उनके प्रस्ताव को अनसुना कर दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)