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विक्टोरिया घोड़ागाड़ी के संचालकों का पुनर्वास करेगी महाराष्ट्र सरकार

1870 के दशक में ये बग्घियां ब्रिटेन से भारत पहुंची थीं. तब ये विक्टोरिया टर्मिनस से लोगों को लाने-ले जाने में काम आया करती थीं.

Victoria Carriage Reuters

ताजमहल पैलेस होटल के सामने से गुज़रती ‘विक्टोरिया’ (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र सरकार विक्टोरिया घोड़ागाड़ी के संचालकों का पुनर्वास करेगी. बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा इन पर प्रतिबंध लगाने के बाद राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक में इसके संचालकों की पुनर्वास योजना को मंज़ूरी मिल गई है.

सरकार द्वारा उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए व्यापार करने (हॉकिंग) का लाइसेंस और एक लाख रुपये मूल पूंजी दी जाएगी या फिर वे एक बार में कुल तीन लाख रुपये भी ले सकते हैं.

सरकार द्वारा यह फैसला 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया जिसमें कहा गया था कि औपनिवेशिक काल से मुंबई की सड़कों पर दौड़ने वाली घोड़ागाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए और उन पर निर्भर परिवारों का पुनर्वास किया जाए.

मूल रूप से फ्रांस में चलने वाली इन बग्घियों को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के नाम से ‘विक्टोरिया’ नाम मिला. 1870 के दशक में ये ब्रिटेन से भारत में पहुंची थीं. तब ये बग्घियां विक्टोरिया टर्मिनस से लोगों को लाने-ले जाने में काम आया करती थी.

समय बीतने के साथ ये मुंबई घूमने आने वाले सैलानियों को गेटवे ऑफ इंडिया, नरीमन पॉइंट, ताज होटल जैसी जगहों की सैर करवाती थीं. पर पशु अधिकार समूहों का आरोप था कि इन बग्घियों में लगने वाले घोड़ों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है.

जून 2015 गैर सरकारी संगठन एनिमल्स ऐंड बर्ड्स चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका पर फैसला देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से कहा कि ये घोड़ागाड़ियां ग़ैरक़ानूनी हैं, साथ ही पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम 1960 का हनन हैं, इसलिए इन्हें बंद किया जाए. उस समय इन गाड़ियों के मालिकों और चालकों के पुनर्वास की व्यवस्था करने की बात कही थी.

एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रिमंडल के इस फैसले के दायरे में विक्टोरिया के 91 मालिक और 130 चालक आएंगे. विक्टोरिया मालिकों का दावा है कि इससे रोजगार के लिए लगभग 800 परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)