भारत

मॉब लिंचिंग पर प्रधानमंत्री मोदी को खुला पत्र लिखने वाले 49 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

बिहार के वकील सुधीर कुमार ओझा की ओर से दो महीने पहले दायर की गई एक याचिका पर मुज़फ़्फ़रपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद यह एफआईआर दर्ज हुई है.

श्याम बेनेगल, रामचंद्र गुहा, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन.

श्याम बेनेगल, रामचंद्र गुहा, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन.

मुजफ्फरपुर: देश में लगातार बढ़ रहे मॉब लिंचिंग के मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखने वाली विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं 49 हस्तियों के खिलाफ बीते गुरुवार को एफआईआर दर्ज की गई.

स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की ओर से दो महीने पहले बिहार की एक अदालत में दायर की गई याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूर्यकांत तिवारी के आदेश के बाद यह प्राथमिकी दर्ज हुई है.

ओझा ने कहा कि सीजेएम ने 20 अगस्त को उनकी याचिका स्वीकार कर ली थी. इसके बाद गुरुवार को सदर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज हुई.

ओझा का आरोप है कि इन हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री मोदी की छवि को कथित तौर पर धूमिल किया. इसके साथ ओझा ने सभी 49 हस्तियों पर अलगाववादी प्रवृत्ति का समर्थन करने का भी आरोप लगाया.

23 जुलाई को लिखे गए पत्र में इन लोगों ने मांग किया कि ऐसे मामलों में जल्द से जल्द और सख्त सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए.

यह पत्र लिखने वालों में इतिहासकार रामचंद्र गुहा, फिल्मकार मणि रत्नम, अपर्णा सेन, गायिका शुभा मुद्गल, अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप सहित विभिन्न क्षेत्रों की कम से कम 49 हस्तियां शामिल थीं.

पुलिस ने बताया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. इसमें राजद्रोह, उपद्रव करने, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धाराएं लगाई गईं हैं.

पत्र में लिखा गया था, ‘मुस्लिमों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ हो रही लिंचिंग की घटनाएं तुरंत रुकनी चाहिए. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ें देखकर हम चौंक गए कि साल 2016 में देश में दलितों के साथ कम से कम 840 घटनाएं हुईं. इसके साथ ही हमने उन मामलों में सजा के घटते प्रतिशत को भी देखा.’

मालूम हो कि इन 49 हस्तियों के पत्र के जवाब में कंगना रनौत, प्रसून जोशी, समेत 62 हस्तियों ने खुला खत लिखा था.

उनका कहना था कि कुछ लोग चुनिंदा तरीके से सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हैं.  इसका मकसद सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों को बदनाम करना है.  उन्होंने पूछा कि जब नक्सली वंचितों को निशाना बनाते हैं तब वे क्यों चुप रहते हैं?

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)