Jawahar Lal Nehru

(फोटो: पीटीआई)

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 73 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

Ayodhya: FILE - In this Sunday, Nov. 25, 2018 photo, a man holds a brick reading "Jai Shree Ram" (Victory to Lord Ram) as bricks of the old Babri Mosque are piled up in Ayodhya, in the central Indian state of Uttar Pradesh. State-run broadcaster on Saturday, Nov. 9, 2019, said top court rules for disputed temple-mosque land for Hindus with alternate land to Muslims. Authorities increased security in Ayodhya, 550 kilometers (350 miles) east of New Delhi, and deployed more than 5,000 paramilitary forces to prevent any attacks by Hindu activists on Muslims, who comprise 6% of the town's more than 55,500 people. AP/PTI(AP11_9_2019_000038B)

…जब प्रधानमंत्री नेहरू के बार-बार कहने के बाद भी बाबरी मस्जिद में रखी मूर्तियां नहीं हटाई गईं

पुस्तक अंश: अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद में वर्ष 1949 में मूर्ति रखने के बाद की घटनाएं यह प्रमाणित करती हैं कि कम-से-कम फ़ैज़ाबाद के तत्कालीन ज़िलाधीश केकेके नायर तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत यदि मूर्ति स्थापित करने के षड्यंत्र में शामिल न भी रहे हों, तब भी मूर्ति को हटाने में उनकी दिलचस्पी नहीं थी.

(फोटो: पीटीआई)

1948 में जब समाजवादी नेता को हराने के लिए फ़ैज़ाबाद कांग्रेस ने राम जन्मभूमि का कार्ड खेला था

पुस्तक अंश: फ़ैज़ाबाद में 1948 में हुए उपचुनाव में समाजवादी नेता आचार्य नरेंद्र देव मैदान में थे. कांग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ देवरिया के बाबा राघव दास को अपना प्रत्याशी बनाया. चुनाव प्रचार में कांग्रेस ने कहा था कि आचार्य नरेंद्र की विद्वत्ता का लोहा भले दुनिया मानती है, लेकिन वे नास्तिक हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी अयोध्या ऐसे व्यक्ति को कैसे स्वीकार कर पाएगी?

जवाहरलाल नेहरू. (फोटो साभार: IISG/Flickr (CC BY-SA 2.0)

कश्मीर और 370 से लेकर विभाजन तक नेहरू के प्रति भाजपा की नफ़रत झूठ की बुनियाद पर टिकी है

गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त में दिए एक भाषण में कहा था कि अगर नेहरू न होते, तो पाक अधिकृत कश्मीर भारत के कब्ज़े में होता. सच तो यह है कि अगर आज कश्मीर भारत का हिस्सा है तो यह केवल नेहरू के चलते ही है.

Indian security personnel stand guard along a deserted street during restrictions in Jammu, August 5, 2019. REUTERS/Mukesh Gupta

‘दुर्भाग्य से 370 के होने और जाने पर ठीक से चर्चा न तो संसद के अंदर हुई और न ही बाहर’

वीडियो: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले पर जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर से विशाल जायसवाल की बातचीत.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi flashes the victory sign as he arrives at the party headquarters to celebrate the party's victory in the 2019 Lok Sabha elections, in New Delhi, Thursday, May 23, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI5_23_2019_000464B)

यह एक नया भारत है और नरेंद्र मोदी उसकी आवाज़ हैं

नरेंद्र मोदी को वोट देने वालों की सोच यह नहीं है कि वह अपने किए गए वादों को पूरा करेंगे या नहीं, बल्कि उन्होंने मोदी को इसलिए वोट किया क्योंकि उन्हें उनमें अपना ही अक्स दिखाई देता है.

लाल बहादुर शास्त्री और जवाहर लाल नेहरू. (फोटो साभार: ​​विकिपीडिया/ट्विटर)

अब तक गठित सोलह लोकसभाओं में तीसरी ने देखे सबसे बुरे दिन

चुनावी बातें: तीसरी लोकसभा के कार्यकाल के दौरान देश ने अपने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के आक्रमणों का मुक़ाबला किया और अपने दो प्रधानमंत्रियों को गंवाया.

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जब नेहरू ने कहा- वही संस्कृति के बारे में सबसे ज़्यादा बात कर रहे हैं, जिनमें इसका क़तरा तक नहीं है

पुस्तक अंश: 1950 में नेहरू ने लिखा, ‘यूपी कांग्रेस कमेटी की आवाज़ उस कांग्रेस की आवाज़ नहीं है, जिसे मैं जानता हूं, बल्कि यह उस तरह की आवाज़ है जिसका मैं पूरी ज़िंदगी विरोध करता रहा हूं. कुछ कांग्रेसी नेता लगातार ऐसे आपत्तिजनक भाषण दे रहे हैं, जैसे हिंदू महासभा के लोग देते हैं.’

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हम भी भारत, एपिसोड 56: मोदी के भारत में नेहरू का महत्व

हम भी भारत की 56वीं कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी मोदी के भारत में नेहरू के महत्व पर इतिहासकार सैयद इरफ़ान हबीब और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी से चर्चा कर रही हैं.

अर्णब गोस्वामी और प्रताप भानु मेहता. (फोटो साभार: फेसबुक)

नेहरू मेमोरियल से प्रताप भानु मेहता का इस्तीफ़ा मंज़ूर, अर्णब गोस्वामी समेत चार नियुक्त

केंद्र सरकार ने नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की कार्यकारी समिति के सदस्यों- अर्थशास्त्री नितिन देसाई, पूर्व नौकरशाह बीपी सिंह, प्रताप भानु मेहता और प्रो. उदयन मिश्रा की जगह पत्रकार राम बहादुर राय, पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर, अर्णब गोस्वामी और भाजपा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे को नियु​क्त किया है.

मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी (फोटो: पीटीआई)

तीन मूर्ति भवन: नेहरू की विरासत से न हो छेड़छाड़, मनमोहन ने लिखा मोदी को पत्र

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से जुड़े नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) और तीन मूर्ति भवन से संभावित छेड़छाड़ को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नाराजगी जाहिर की है.

सुभाषचंद्र बोस (फोटो: पीटीआई)

बोस के पोते बोले: नेहरू से मोदी तक किसी ने नहीं की नेताजी के अवशेष भारत लाने की कोशिश

स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस के पोते आशीष रे ने कहा कि 1995 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अवशेष लाने की एक कोशिश की थी , लेकिन वे काम पूरा नहीं कर पाए.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi speaks in the Lok Sabha, at the parliament in New Delhi on Wednesday. PTI Photo / TV Grab (PTI2_7_2018_000095B)

झूठ बोलो, ज़ोर से बोलो, बार-बार बोलो, ऐसी कुछ लोगों की आदत हो गई है: मोदी

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सिर्फ़ घोषणाएं कर, अख़बार की सुर्ख़ियों में छा जाना हमारी संस्कृति नहीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: ट्विटर/नरेंद्र मोदी)

‘नाना-परनाना की बजाय ये क्यों नहीं बताते कितने घर, रोज़गार, स्कूल-अस्पताल दिए?’

सोशल मीडिया: गुजरात चुनाव प्रचार में विकास की जगह राहुल के परनाना ने ले ली तो फेसबुक और ​ट्विटर पर लोगों ने प्रधानमंत्री की भाषा और ग़लतबयानियों पर जमकर चुटकी ली.

(फोटो साभार: फ़ेसबुक)

मैंने आज़ादी के बाद जैसा हिंदुस्तान देखा था, उसी हिंदुस्तान में मरना चाहता हूं: मुनव्वर राना

जन्मदिन विशेष: इस सियासी उथल-पुथल में एक बुजुर्ग की हैसियत से मुझे ख़ौफ़ लगता है कि कहीं हिंदुस्तान में ज़बान, तहज़ीब और मज़हब के आधार पर कई हिंदुस्तान बन जाएं. यह बहुत अफ़सोसनाक होगा.