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उत्तराखंड: पहाड़ों में आपदाएं सियासी मुद्दा क्यों नहीं बनती हैं…

पहाड़ों में जनता की दुख-तकलीफ़ों को दूर करने के सियासी एजेंडा में पर्यावरण और विकास के सवाल हमेशा से ही विरोधाभासी रहे हैं क्योंकि राजनीतिक दलों को लगता है कि पर्यावरण बचाने की बातें करेंगे तो विकास के लिए तरसते लोग वोट नहीं देंगे.

उत्तराखंड: मूसलाधार बारिश से मरने वालों की संख्या 47 हुई, नैनीताल से संपर्क बहाल

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मरने वालों की संख्या 40 से अधिक हो गई है. भारी बारिश से कई मकान ढह गए. कई लोग अब भी मलबे में फंसे हुए हैं. सड़कों, पुलों और रेल पटरियों को नुकसान पहुंचा हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य भर में भारी क्षति हुई है. सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा. धामी ने राहत प्रयासों के लिए प्रत्येक ज़िलाधिकारियों को 10-10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.

केरल में बारिश का कहर जारी, 10 बांध के लिए रेड अलर्ट, सबरीमला यात्रा रोकी गई

केरल के दो ज़िलों- कोट्टायम और इडुक्की में भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं में रविवार तक 22 लोगों की मौत हो गई. ख़राब मौसम के कारण इडुक्की के पहाड़ी इलाकों में यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 20 से 24 अक्टूबर तक मौसम के और ख़राब होने का अनुमान लगाया है.

हिमाचलः किन्नौर में भूस्खलन से पांच की मौत, 30 से अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

भूस्खलन हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले के चौरा गांव में दोपहर से ठीक पहले हुआ. किन्नौर के उपायुक्त ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन की बस समेत अनेक वाहन भूस्खलन के मलबे में दब गए. बस किन्नौर के रेकॉन्ग प्यो से शिमला जा रही थी. बस में तकरीबन 40 लोग सवार थे. हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है.

महाराष्ट्र में बारिश का कहर जारी, कम से कम 136 लोगों की मौत

पश्चिमी महाराष्ट्र के पुणे मंडल में भारी बारिश और नदियों के उफान पर होने के चलते 84,452 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. इनमें 40,000 से अधिक लोग कोल्हापुर ज़िले से हैं.  पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र में हो रही भारी बारिश के कारण रायगढ़, रत्नागिरी, पालघर, ठाणे, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, सांगली और सतारा आदि ज़िले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं. कर्नाटक में भारी बारिश में तीन लोगों की मौत और हज़ारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया.

महाराष्ट्र: रायगढ़ ज़िले में भूस्खलन के कारण 36 लोगों की मौत

महाराष्ट्र के तटीय रायगढ़ ज़िले में यह हादसा महाड तहसील के तलाई गांव में बृहस्पतिवार शाम को हुआ. इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. मुंबई के गोवंडी में मकान ढहने से चार की मौत होने की सूचना है. पिछले दो दिनों से राज्य में हो रही भारी बारिश के कारण रायगढ़, रत्नागिरी, पालघर, ठाणे, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, सांगली और सतारा ज़िलों में भीषण बाढ़ आई हुई है, जिसके कारण कई हादसे भी हो चुके हैं.

मेघालय: बारह दिनों से खदान में फंसे हैं पांच श्रमिक, सरकार ने नौसेना से मदद मांगी

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स ज़िले के एक अवैध कोयला खदान में पांच श्रमिक बीते 31 मई से फंसे हुए हैं. ज़िला प्रशासन ने बताया कि खदान में पानी भरा हुआ है और बचावकर्मी जलस्तर कम होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अवैध खनन के आरोप में खदान के मालिक को गिरफ़्तार किया गया है.

क्या ‘ग्रीन’ शब्द जुड़ जाने मात्र से कोई परियोजना प्रकृति अनुकूल हो जाती है

नदी, पहाड़, जैव-विविधता की अनदेखी कर बनी बड़ी हाइड्रो पावर परियोजनाओं से पैदा ऊर्जा को ‘ग्रीन एनर्जी’ कैसे कह सकते हैं? एक आकलन के अनुसार कई परियोजनाएं तो उनकी क्षमता की 25 प्रतिशत बिजली भी पैदा नहीं कर पा रही हैं. तो अगर ये परियोजनाएं व्यावहारिक नहीं हैं, तो सरकार ज़िद पर क्यों अड़ी है?

उत्तराखंड आपदा: हादसों के ढेर पर बैठे हैं लेकिन सबक कुछ नहीं

भूगर्भ वैज्ञानिक निरंतर चेतावनी दे रहे हैं कि सभी ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में विभिन्न मौसमी बदलाव हो रहे हैं. ऐसे में तरह-तरह के हाइड्रोप्रोजेक्ट बनाने की ज़िद प्राकृतिक हादसों को आमंत्रण दे रही है. सबसे चिंताजनक यह है कि केंद्र या उत्तराखंड सरकार इन क्षेत्रों में लगातार हो रहे हादसों से कुछ नहीं सीख रही है.

उत्तराखंड आपदा: एक और शव मिला, मृतक संख्या बढ़कर 62 हुई, 142 लोग अब भी लापता

बीते सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली ज़िले की ऋषिगंगा घाटी में पर ग्लेशियर टूटने से हिमस्खलन हुआ था, जिससे नदी के किनारे 13.2 मेगावाट की एक जलविद्युत परियोजना ध्वस्त हो गई थी, जबकि धौलीगंगा के साथ लगती एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना को व्यापक नुकसान पहुंचा था.

उत्तराखंड में एक बार फ़िर कुदरत ने बरपाया क़हर

वीडियो: उत्तराखंड के जोशीमठ में रविवार नंदादेवी ग्लेशियर के फटने की वजह से धौलीगंगा नदी में विकराल बाढ़ आ गई. रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है. तपोवन विष्णुगाढ़ हाइड्रो पॉवर प्लांट पूरी तरह से तहस-नहस हो गया है. इस विषय पर पर्यावरण के लिए काम करने वाले पत्रकार कबीर अग्रवाल से बातचीत.