Worker

​​(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गुजरात: सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान ज़हरीली गैस से दम घुटने से दो की मौत

गुजरात के भरूच ज़िले का मामला है. तीन श्रमिक टैंक के अंदर द्रव से ठोस अपशिष्ट अलग कर रहे थे, तब यह घटना घटी. वे ज़हरीली गैस के कारण अचानक बेहोश हो गए.

Jabalpur: Railway official provides drinking water from a distance to migrants travelling by a train to their native places, during the ongoing nationwide COVID-19 lockdown, at a railway station in Jabalpur, Wednesday, May 27, 2020. (PTI Photo) (PTI27-05-2020 000149B)(PTI27-05-2020 000198B)

‘मुंबई से गांव आने के लिए निकले, लेकिन उनका सफ़र रास्ते में ही ख़त्म हो गया’

बीते 26 मई को झांसी से गोरखपुर जा रही एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार आज़मगढ़ के 45 वर्षीय प्रवासी श्रमिक रामभवन मुंबई से अपने परिवार सहित घर लौट रहे थे, जब रास्ते में अचानक उनकी तबियत ख़राब होने लगी. परिजनों का कहना है कि समय पर उचित मेडिकल सहायता न मिलने के कारण उन्होंने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर दम तोड़ दिया.

(फोटो: पीटीआई)

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अब तक कम से कम 80 लोगों की मौत: आरपीएफ

रेलवे सुरक्षा बल के आंकड़ों के मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में करीब 80 लोगों की मौत 9 मई से 27 मई के बीच हुई है. इनमें चार वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक के यात्री शामिल थे.

Prayagraj: A mother covers her childs head to beat the heat while waiting to board a bus to reach her native place after arriving via special train at Prayagraj Junction, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Prayagraj, Tuesday, May 26, 2020. (PTI Photo)(PTI26-05-2020 000043B)

स्पेशल ट्रेन चलने के बाद भी क्यों श्रमिकों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं?

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अपने घरों को लौट रहे प्रवासी मज़दूरों को न सिर्फ़ खाने-पीने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, बल्कि रेलवे द्वारा रूट बदलने के कारण कई दिनों की देरी से वे अपने गंतव्य तक पहुंच पा रहे हैं. इस दौरान भूख-प्यास और भीषण गर्मी के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोग दम तोड़ चुके हैं.

Ghaziabad: Migrants wait at a roadside after police stopped them at the Ghazipur border, during ongoing COVID-19 lockdown, in Ghaziabad, Wednesday, May 20, 2020. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI20-05-2020_000271B)

लॉकडाउन: घोषणाओं से दिल भले बहल जाएं, पेट कैसे भरेंगे

मज़दूरों के नाम पर हो रही बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बीच यह स्पष्ट दिख रहा है कि सरकार और समाज के पास न तो उनके लिए सरोकार है, न सम्मान की भाषा और व्यवहार. न ही वह गरिमा और आंख का पानी बचा है, जिसके साथ एक मनुष्य दूसरे को मनुष्य समझते हुए देखता है.

Bhubaneswar: A migrant family walks along the national highway (NH-16) to reach the native place, during ongoing COVID-19 lockdown, in Bhubaneswar, Monday, May 18, 2020. (PTI Photo) (PTI18-05-2020 000088B)

महाराष्ट्र: पैदल घर लौट रहे एक श्रमिक की भूख-प्यास से मौत

गन्ने के खेत में काम करने वाले चालीस साल के पिंटू पंवार मार्च में लॉकडाउन लागू होने के समय पुणे में अपने माता-पिता से मिलने गए हुए थे. लॉकडाउन लगातार बढ़ने पर वे वहां से पैदल अपने गांव की ओर निकल गए, सोमवार को रास्ते के एक गांव के पास उनका शव मिला है.

Lockdown Migrant Worker Photoo By Shome Basu (2)

चित्रकथा: लॉकडाउन में जो शहरों में ही रुके, वो मज़दूर किस हाल में हैं

देशव्यापी लॉकडाउन के चलते बड़े शहरों में काम करने वाले मज़दूरों के पास काम बंद हो जाने की स्थिति में दो विकल्प थे- या तो घर लौट जाएं, या फिर यहीं रहकर काम दोबारा शुरू होने का इंतज़ार करें. घरों तक के सफ़र में मज़दूरों के सामने तमाम चुनौतियां आई हैं, लेकिन जो नहीं गए उनका भी हाल कुछ बेहतर नहीं है.

Chandigarh: Migrants from various districts of Uttar Pradesh ride bicycles to reach their native places, during the ongoing COVID-19 lockdown, in the outskirts of Chandigarh, Saturday, May 16, 2020. (PTI Photo)(PTI16-05-2020 000062B)

‘फोन पर बोले साइकिल से निकले हैं, कुछ दिन में घर आ जाएंगे, पांच घंटे बाद उनकी मौत की ख़बर आई’

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले के बहुआस के रहने वाले राजू गुजरात के अंकलेश्वर में काम करते थे. चार मई को वे साइकिल से अपने गांव जाने के लिए निकले थे, इसी शाम उनका शव बड़ौदा के करजन में नेशनल हाईवे पर मिला.

ट्रेन के लिए राह देख रहे प्रवासी मजदूर (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: ‘जिस तकलीफ़ से घर लौटा हूं, अब से काम के लिए दूसरे राज्य जाने की हिम्मत नहीं होगी’

श्रमिक स्पेशल ट्रेन के किराये को लेकर सरकार के विभिन्न दावों के बीच गुजरात से बिहार लौटे कामगारों का कहना है कि उन्होंने टिकट ख़ुद खरीदा था. उन्होंने यह भी बताया कि डेढ़ हज़ार किलोमीटर और 31 घंटे से ज़्यादा के इस सफ़र में उन्हें चौबीस घंटों के बाद खाना दिया गया.

Thane: Migrants with their belongings ride on bicycles as they move towards their native places on the Mumbai-Nashik highway during the nationwide lockdown, in wake of the coronavirus pandemic, in Thane, Friday, May 1, 2020. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad)(PTI01-05-2020_000219B) *** Local Caption ***

लॉकडाउन: राजस्थान से बिहार पहुंचे चार मज़दूर, कहीं पैदल तो कहीं साइकिल से पूरा किया सफ़र

बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले ये मज़दूर उदयपुर की जयसमंद झील में मछली पकड़ने का काम करते थे. लॉकडाउन का दूसरा चरण शुरू होने तक किसी तरह की मदद न मिलने पर इन्होंने घर का रुख़ किया. रास्ते में कहीं ट्रकवालों, तो कहीं ग्रामीणों की मदद से ये सभी 13 दिन बाद रविवार को अपने गांव पहुंचे हैं.

लॉकडाउन के दौरान पैदल जाते मजदूर. (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: साइकिल से गुजरात से यूपी जा रहे मज़दूर की रास्ते में जान गई

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले के रहने वाले राजू अंकलेश्वर के एक पावर प्लांट में काम करते थे. सोमवार को वे किसी को बिना बताए साइकिल से अपने गांव जाने के लिए निकले थे, इसी शाम उनका शव नेशनल हाईवे पर मिला.

फोटो: एएनआई

कोरोना वायरस: दिल्ली के तीन आश्रय गृहों को आग लगाने के मामले में सात लोग गिरफ़्तार

बीते 11 अप्रैल को दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास स्थित तीन आश्रय गृहों में आग लगा दी गई थी. पुलिस ने गिरफ़्तार आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

Ranchi: RSS leader Indresh Kumar addresses a press conference, in Ranchi on Monday, July 23, 2018. (PTI Photo) (PTI7_23_2018_000133B)

आरएसएस नेता ने सुप्रीम कोर्ट के जजों पर साधा निशाना, कहा- केंद्र मंदिर पर क़ानून लाने को तैयार

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि अयोध्या मामला टालने की वजह से सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है.