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सीजेआई बोबडे ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को सराहा, कहा- गोवा में संविधान निर्माताओं की सोच साकार

देश के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने शनिवार को गोवा में हुए एक कार्यक्रम में यूनिफॉर्म सिविल कोड की तारीफ़ करते हुए कहा कि इस बारे में अक्सर चर्चा करने वाले बुद्धिजीवियों को यहां आकर इसका प्रभाव देखना चाहिए. गोवा देश का एकमात्र राज्य है जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है.

सीजेआई एसए बोबडे. (फोटो: पीटीआई)

सीजेआई एसए बोबडे. (फोटो: पीटीआई)

पणजी/नई दिल्ली: देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर चल रही बहस के बीच देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे ने एक कार्यक्रम के दौरान गोवा में लागू इस तरह के कोड की सराहना की और कहा कि देश के जो बुद्धिजीवी अक्सर इस बारे में बात करते हैं, उन्हें राज्य में आकर देखना चाहिए कि इससे न्यायिक प्रशासन कितना प्रभावित हुआ है.

बीते शनिवार को गोवा के पोरवोरिम में बॉम्बे हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में थे, जब उन्होंने इस विवादित विषय को छेड़ा. उन्होंने कहा, ‘गोवा में वो है जिसकी संविधान के निर्माताओं ने कल्पना की थी- एक यूनिफॉर्म सिविल कोड.’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका  सौभाग्य है कि उन्हें ‘इस कोड’ के तहत काम करने का मौका मिला.

उन्होंने आगे कहा, ‘यह विवाह और उत्तराधिकार में मामलों में लागू होता है, जहां सभी गोवा निवासियों के लिए उनके अलग-अलग धर्म के बावजूद एक ही कानून है. मैंने कई शिक्षाविदों को यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में बात करते हुए सुना है. मैं उन सभी बुद्धिजीवियों से अपील करूंगा कि वे यहां आएं और यह कैसे काम करता है यह समझने के लिए न्यायिक प्रशासन के बारे में जानें.’

गौरतलब है कि गोवा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है. यहां देशभर के विपरीत विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के कानून हिंदू, मुस्लिम और ईसाई जैसे सभी धर्मों के लिए एक समान हैं.

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बोबडे ने कहा कि इस पीठ के बारे में कुछ अनूठा था, जो था कि उन्होंने यहां विभिन्न प्रकार के मामले सुने. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर देश में कोई ऐसी पीठ है जहां विविध अनुभव और सुप्रीम कोर्ट जैसी ही चुनौतियां हैं, तो वो गोवा की संवैधानिक पीठ ही है.

सीजेआई ने कहा, ‘जब आप गोवा की संवैधानिक पीठ में काम करते हैं तो भूमि अधिग्रहण, धारा 302 के तहत हत्या का मामला, कोई जनहित याचिका, किसी प्रशासनिक कानून से जुड़ा सवाल, आयकर, सेल्स टैक्स और एक्साइज कानून से जुड़ा कोई भी मसला आपके पास आ सकता है.’

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने से पहले बोबडे इसी पीठ के पीठासीन न्यायाधीश थे. शनिवार को हुए इस कार्यक्रम में सीजेआई बोबडे के साथ जस्टिस एनवी रमना और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे.

जस्टिस रमना ने न्यायिक संरचना के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय न्यायिक आधारभूत ढांचा निगम (नेशनल जुडिशियल इंफ्रास्ट्रक्टर कॉरपोरेशन) गठित करने की बात कही.

जस्टिस रमना ने यह भी कहा कि आधुनिकीकरण के रास्ते में आने वाली बाधाओं के बारे में बात करे तो, धन की कमी कभी भी प्रगति के रास्ते में अड़चन नहीं बननी चाहिए.’

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों को साथ मिलकर न्यायपालिका की अवसंरचना संबंधी जरुरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आधारभूत ढांचा निगम का गठन करना चाहिए. ऐसे सहयोग से न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने के आवश्यक एकरुपता और मानकता आएगी.’

उन्होंने आगे कहा तकनीक को न्यायपालिका के साथ जोड़ना मुश्किल भरा काम रहा है. हम सभी ने अदालतों को जर्जर भवनों में बिना रिकॉर्ड रूम के काम करते देखा है. ऐसे परिसर भी हैं, जहां शौचालय और बैठने की जगह तक नहीं है.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने बहुत बड़ी चुनौती पेश की थी, लेकिन जस्टिस बोबडे ने केंद्र की मदद से वर्चुअल सुनवाई की शुरूआत करने के लिए कदम उठाया. इस कदम ने अदालतों को लोगों के घरों तक पहुंचा दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)