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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में प्रोफ़ेसर गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद का मामला. बीते सात मार्च को एसआरके महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर शहरयार अली ने हुमा नक़वी नामक महिला द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की तस्वीर पर कथित रूप से अभद्र टिप्पणी की थी, जिसके बाद भाजपा नेता की तहरीर पर उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.

Bengaluru: Union Textiles Minister & BJP leader Smriti Irani gestures during an intellectual meet in Bengaluru, Sunday, Feb 10, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI2_10_2019_000200B)

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (फोटोः पीटीआई)

फिरोजाबादः केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोपी प्रोफेसर ने मंगलवार को स्थानीय अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया.

प्रोफेसर शहरयार अली ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराग कुमार की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया और अंतरिम जमानत याचिका दायर की, जिसके खारिज होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया.

फिरोजाबाद पुलिस ने एसआरके कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रमुख शहरयार अली के खिलाफ मार्च महीने में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ फेसबुक पोस्ट पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था.

शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि बीते सात मार्च को एसआरके महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शहरयार अली ने हुमा नकवी नामक महिला द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की तस्वीर पर कथित रूप से अभद्र टिप्पणी की थी.

उन्होंने बताया कि इसे लेकर कुछ हिंदूवादी संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था. मामले में पार्षद एवं भाजपा नेता उदय प्रताप सिंह की तहरीर पर रामगढ़ थाने में मामला दर्ज किया गया था.

बीते 7 मार्च को अली के खिलाफ फिरोजाबाद जिले के रामगढ़ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 505 (2) (वर्गों के बीच दुश्मनी, घृणा या द्वेष पैदा करने वाले बयान) और आईटी अधिनियम की धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया था.

इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर को निलंबन नोटिस भेजा था.

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी प्रोफेसर को गिरफ्तारी से संरक्षण देने से इनकार कर दिया था.

दरअसल प्रोफेसर ने अपना फेसबुक अकाउंट हैक होने का दावा करते हुए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई में खारिज कर दिया था.

गिरफ्तारी से संरक्षण देने से इनकार करते हुए जस्टिस जेजे मुनीर ने कहा था कि ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं कि प्रोफेसर का फेसबुक अकाउंट हैक हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)