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किसी भी हालत में झारखंड का बिहारीकरण नहीं होने देंगेः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक साक्षात्कार में कहा कि भोजपुरी और मगही बिहार की भाषा है, झारखंड की नहीं. झारखंड का बिहारीकरण क्‍यों किया जाए? आदिवासियों ने झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई क्षेत्रीय भाषाओं के दम पर लड़ी थी, भोजपुरी और मगही भाषा की बदौलत नहीं.

हेमंत सोरेन. (फोटो साभार: फेसबुक/@HemantSorenJMM)

पटनाः झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने भोजपुरी और मगही भाषा को लेकर विवादित बयान दिया है.

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुतबिक, सोरेन ने कहा है कि इन दोनों भाषाओं को बोलने वाले लोग बहुत अधिकार जमाने वाले होते हैं.

सोरेन ने एक मीडिया संस्थान को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘भोजपुरी और मगही बिहार की भाषा है, झारखंड की नहीं. झारखंड का बिहारीकरण क्‍यों किया जाए? महिलाओं की इज्‍जत लूटकर भोजपुरी भाषा में गाली दी जाती है. आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं के दम पर जंग लड़ी गई थी, भोजपुरी और मगही भाषा की बदौलत नहीं. झारखंड आंदोलन क्षेत्रीय भाषा के दम पर लड़ा गया था.’

उन्होंने कहा, ‘झारखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों की छाती पर पैर रखकर, महिलाओं की इज्जत लूटते वक्त भोजपुरी भाषा में ही गाली दी जाती थी.’

उन्‍होंने कहा कि आदिवासियों ने झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई क्षेत्रीय भाषाओं के दम पर लड़ी है न कि भोजपुरी और हिंदी भाषा की बदौलत. वह किसी भी हालत में झारखंड का बिहारीकरण नहीं होने देंगे.

सोरेन ने कथित तौर पर कहा कि भोजपुरी और मगही भाषाओं ने आदिवासी राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है.

झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन के इस बयान के बाद विवाद शुरू हो गया है. इस बयान को लेकर भाजपा की बिहार इकाई ने आपत्ति जताई है.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सोरेन के बयान को बेहद आपत्तिजनक करार देते हुए कहा था, ‘यह समाज को बांटने की कोशिश है. जब पूरा देश हिंदी दिवस मना रहा है, झारखंड के मुख्यमंत्री भोजपुरी और मगही के बारे में इस तरह के बयान देकर गंदी राजनीति कर रहे हैं.’

उन्‍होंने कहा, ‘सोरेन के इस बयान ने उनकी मानसिकता को उजागर किया है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)