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दिल्ली: कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों ने हर्ष मंदर से जुड़े परिसरों पर ईडी की छापेमारी की निंदा की

ईडी ने गुरुवार को दिल्ली में मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की थी. 500 से अधिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह केंद्र सरकार के हर आलोचक को धमकाने, डराने और चुप कराने की लगातार की जा रही कोशिश का हिस्सा हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर

नई दिल्ली: कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों के एक समूह ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धनशोधन के मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर के दिल्ली से जुड़े कई परिसरों (वसंत कुंज में उनके घर, अधचीनी में उनके कार्यालय और महरौली में एक बाल गृह) पर गुरुवार को की गई छापेमारी की निंदा की.

इन 500 से अधिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह छापेमारी सरकार के हर आलोचक को धमकाने, डराने और चुप कराने की लगातार की जा रही कोशिश का हिस्सा है.

इन बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने हर्ष मंदर के प्रति एकजुटता दिखाते हुए संयुक्त बयान में कहा कि मंदर ने शांति और सौहार्द्र के लिए काम करने के अलावा कुछ भी नहीं किया है.

बयान में कहा गया, ‘हम मानवाधिकार और शांति के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता को परेशान करने और डराने के लिए इन छापों की निंदा करते हैं. मंदर ने शांति और सौहार्द्र के लिए काम करने के अलावा कुछ नहीं किया है और लगातार ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के उच्च मानकों को बनाए रखा है.’

बयान में कहा गया, ‘बीते एक साल में कई सरकारी एजेंसियों ने हर्ष मंदर और सीईएस का लगातार उत्पीड़न किया है. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा लगाए गए झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोपों का दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बेहतर ढंग से जवाब दिया है.’

बता दें कि दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर सीईएस के खिलाफ झूठे आरोपों लगाने के लिए हलफनामा दायर किया था.

बयान में कहा गया, ‘आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और आईटी विभाग लगातार सीईएस का उत्पीड़न कर रहा है. प्रतिशोध के लिए की गई इन कार्रवाइयों से पता चलता है कि न तो धन का हेरफेर हुआ है और न ही कानून का उल्लंघन किया है. ईडी और आईटी विभाग द्वारा हाल ही में की गई छापेमारियों को मौजूदा सरकार के हर आलोचक को धमकाने, डराने और चुप कराने की लगातार की जा रही सरकारी संस्थानों की कोशिशों के रूप में देखा जा सकता है.’

इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में योजना आयोग की पूर्व सदस्य डॉक्टर सईदा हमीद, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद, वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह, कविता कृष्णन, सिटिजन फ़ॉर जस्टिस एंड पीस की सचिव तीस्ता सीतलवाड़ और गैर सरकारी संगठन अनहद की संस्थापक शबनम हाशमी आदि शामिल हैं.

बता दें कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के रजिस्ट्रार की शिकायत पर आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश की अवज्ञा), किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और 83 (2) के तहत एक मामला दर्ज किया गया था.

ये मामले सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (सीएसई) द्वारा दक्षिण दिल्ली में स्थापित ‘उम्मीद अमन घर’ और ‘खुशी रेनबो होम’ से जुड़े हैं.

पुलिस ने तब बताया था कि इन संस्थानों की एनसीपीसीआर की टीम द्वारा पिछले वर्ष अक्टूबर में जांच के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने तब आरोप लगाए थे कि दो गैर सरकारी संगठनों की जांच में एक संस्थान में किशोर न्याय अधिनियम और बाल यौन उत्पीड़न सहित कई अन्य अनियमितताएं पाई गई थीं.

मंदर ने तब इन आरोपों को अनुचित बताया था.

मालूम हो कि ईडी ने धनशोधन के मामले में दिल्ली में मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर से जुड़े कई परिसरों (वसंत कुंज में उनके घर, अधचीनी में उनके कार्यालय और महरौली में एक बाल गृह) पर गुरुवार को छापेमारी की थी.

बता दें कि हर्ष मंदर नरेंद्र मोदी सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं और उनके एनजीओ के शोधकार्यों में सभी के लिए समान और सुरक्षित भारत बनाने में सरकार की असफलताओं को उजागर किया गया है. मंदर ने कई पुस्तक लिखी हैं और सामाजिक कार्यों के अलावा वह सामाजिक न्याय और मानवाधिकार जैसे विषयों पर समाचार पत्रों में संपादकीय भी लिखते हैं.

हर्ष मंदर और उनकी पत्नी बुधवार रात को ही जर्मनी के लिए रवाना हो गए थे, जहां पर मंदर नौ महीने के फेलोशिप कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)