नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरीः मिज़ोरम के सीएम ने प्रधानमंत्री से म्यांमार शरणार्थियों के लिए मदद मांगी

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मिज़ोरम, मेघालय, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और असम के प्रमुख समाचार.

दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा. (फोटो साभार: पीआईबी)

आइजॉल/शिलॉन्ग/इम्फाल/कोहिमा/दिसपुर/गंगटोकः म्यांमार में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों एवं सेना के बीच ताजा झड़प के बीच वहां से कई लोगों के सीमापार करने के बीच मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने शरणार्थियों के वास्ते मानवीय सहायता की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है.

मिजोरम के एकमात्र लोकसभा सदस्य सी. लालरोसांगा ने 15 सितंबर को दिल्ली में गृह सचिव (सीमा प्रबंधन) संजीव कुमार एवं अवर गृह सचिव (उत्तर पूर्व) पीयूष गोयल से भेंट की और उनसे शरणार्थियों की सहायता की अपील की क्योंकि म्यामांर में सात सितंबर को क्रांति के आह्वान के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद सैंकड़ों लोग देश छोड़कर इधर आ गए हैं.

मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने पहले भी केंद्र सरकार को पत्र भेजा था और उन शरणार्थियों के रहने एवं भोजन के प्रबंधन में मदद की मांग की थी जिन्हें स्वैच्छिक संगठन सहयोग कर रहे हैं.

शरणार्थी विषयों को देख रहे राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष एच राममावी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 15 सितंबर को प्रधानमंत्री को म्यांमार के उन निवासियों के दुखदर्द को लेकर दोबारा पत्र भेजा जो इस साल फरवरी में सैन्य शासन के सत्ता पर काबिज होने के बाद देश से भागकर आए हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जोरमथांगा ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजे इस पत्र की एक कॉपी विदेश सचिव हर्षवर्धन सिंगला को भी भेजी है और केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि शरणार्थियों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपये की धनराशि को मंजूरी दी जाए.

जोरमथांगा ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में 10 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद में से पांच करोड़ रुपये भोजन उपलब्ध कराने, तीन करोड़ रुपये शरणार्थियों के लिए आवास निर्माण और दो करोड़ रुपये शरणार्थियों को दवाइयों और स्वास्थ्य देखरेख की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए की हैं.

बता दें कि इससे पहले 18 मार्च 2021 को मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर राजनीतिक शरणार्थियों को मानवीय आधार पर शरण देने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था.

मेघालय: विपक्ष ने सदन में कहा- असम को एक इंच ज़मीन भी नहीं देंगे

मेघालय और असम के बीच अंतर राज्यीय सीमा विवाद को लेकर 16 सितंबर को विपक्ष के कई कांग्रेसी विधायकों ने सदन में एक विशेष प्रस्ताव रखा.

ईस्ट मोजो की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष ने ऐलान किया कि हमारी (मेघालय) एक इंच जमीन भी असम को नहीं दी जानी चाहिए.

यह प्रस्ताव कांग्रेस के विधायकों मायरलबोर्न सिएम, एचएम शांगप्लियांग, किम्फा मारबानियांग और अम्पारीन लिंगदोह ने संयुक्त रूप से पेश किया. इन्होंने कहा कि कई विधायकों ने लेन-देन के विचार पर असहमति जताई है.

नोंगपोह से विधायक मायरलबोर्न सिएम ने कहा कि मतभेदों के 12 इलाकों के अलावा ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां किसी का ध्यान भी नहीं गया.

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण भी बहुत हुआ है, जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.

सिएम ने कहा कि पूर्व में भी दोनों पक्षों ने यथास्थिति बनाए रखी थी और विवादित क्षेत्रों में विकास कार्यों को जारी रखा था. हालांकि, असम ने विकास कार्यों का विरोध किया था.

उन्होंने कहा, उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में रह रहे नागरिकों का उत्पीड़न भी किया.

इस प्रस्ताव के मुताबिक, 2009-2021 के बीच सीमावर्ती इलाकों में ऐसी 114 घटनाएं हुईं, जहां राज्य के लोगों का उत्पीड़न किया गया.
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे लोग डर में जी रहे हैं.

विधायक एचएम शांगप्लियांग ने कहा कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच जारी वार्ता समय-समय पर हो रही बैठकों का ही नतीजा है. दोनों मुख्यमंत्री के बीच मौजूदा वार्ता को पूर्ववर्ती वार्ताओं और फैसलों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए.

विधायक सिएम की बातों से सहमति जताते हुए शांगप्लियांग ने सरकार से ‘गिव एंड टेक’ के विचार के बारे में पूछा.

उन्होंने कहा, ‘मेघालय सरकार असम को क्या दे रही है औऱ असम से क्या ले रही है?’

उन्होंने कहा कि असम को एक इंच जमीन भी नहीं दी जानी चाहिए और ऐसा कुछ नहीं है जो असम को दिया जा सके.

विधायक किम्फा ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग कशमकश में हैं. उन्होंने कहा, ‘सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों को नहीं पता कि क्या वे असम के हैं या मेघालय से. जिला प्रशासन ने उनसे अज्ञात कारणों से अपने मतदाता पहचानपत्र सौंपने को कहा है.’

इस विशेष प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने कहा कि मेघालय की तरह असम के पास भी दिखाने के लिए अपने दस्तावेज हैं.

संगमा ने कहा, ‘सिर्फ अदालत फैसला कर सकती है कि क्या हम अलग दृष्टिकोण से चीजों को देखना चाहिए.’

मणिपुरः कार्यकर्ता को एनएसए के तहत हिरासत में लेने के मामले में मुआवजा याचिका दो हफ्ते के लिए स्थगित

मणिपुर के कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम. (फोटो साभारः फेसबुक)

एक फेसबुक पोस्ट को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गलत तरीके से हिरासत में लिए गए मणिपुर के कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम के लिए मुआवजे की मांग करते हुए उनके पिता की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट दो हफ्ते बाद सुनवाई करेगा.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर सरकार ने मामले की सुनवाई तीन हफ्ते के बाद सूचीबद्ध करने का सुझाव दिया था, जिसका कार्यकर्ता के पिता ने विरोध किया.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले की सुनवाई दो हफ्ते के लिए स्थगित कर दी है.

मामले में मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सुनवाई तीन हफ्तों के लिए स्थगित करने की मांग की थी.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका पर मुआवजे को लेकर मणिपुर सरकार से जवाब मांगते हुए कहा था कि यह बहुत ही गंभीर मामला है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यह गंभीर मामला है. किसी ने अपनी आजादी खो दी थी.’

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एनएसए के तहत हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम को रिहा करने का आदेश दिया था.

मालूम हो कि मणिपुर के कार्यकर्ता एरेन्द्रो लीचोम्बाम को कोरोना वायरस से मणिपुर भाजपा अध्यक्ष की मौत के संबंध में आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में बीते 13 मई को गिरफ़्तार किया गया था.

इस पोस्ट में कोविड-19 के इलाज के लिए गोबर तथा गोमूत्र के इस्तेमाल की आलोचना की गई थी. मई महीने में ही उन्हें ज़मानत मिल गई थी, लेकिन उन्हें जमानत मिलने के कुछ दिनों बाद रिहा किया गया था.

नगालैंडः मीडिया ने किया आरएन रवि के विदाई समारोह का बहिष्कार किया

नगालैंड के कोहिमा प्रेस क्लब ने राज्य के निवर्तमान राज्यपाल आरएन रवि के आधिकारिक विदाई समारोह का बहिष्कार कर दिया है.

प्रेस क्लब का आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान राज्य में प्रेस और मीडिया बिरादरी की पूरी तरह से अनदेखी की.

बता दें कि रवि को जुलाई 2019 में नगालैंड का राज्यपाल और नगा वार्ता के लिये वार्ताकार नियुक्त किया गया था लेकिन अब उन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल नामित किया गया है.

केपीसी के सदस्यों ने रवि के सम्मान में राजकीय विदाई समारोह का बहिष्कार करने का निर्णय लिया.

प्रेस क्लब की अध्यक्ष एलिस योशू ने राज्य में समाचार पत्रों के संपादकों को संबोधित करते हुए एक पत्र में लिखा, ‘केपीसी ने सर्वसम्मति से निवर्तमान राज्यपाल आरएन रवि के आधिकारिक विदाई कार्यक्रम का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. यह अभूतपूर्व कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है कि कैसे रवि ने अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान प्रेस और मीडिया बिरादरी की पूरी तरह से उपेक्षा की है.’

नगालैंड के राजनीतिक समूहों, सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित अवैध टैक्स को लेकर हुआ बंद

नगालैंड में राजनीतिक समूहों और सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित अवैध कर लगाने को लेकर 16 सितंबर को व्यापार संघों ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे दुकानें बंद रहीं और गाड़ियां सड़कों से नदारद रहीं.

कन्फेडेरेशन ऑफ नगालैंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (सीएनसीसीआई) ने बंद का आह्वान किया, जो सुबह छह बजे शुरू हुआ. दीमापुर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डीसीसीआई) ने जिले में इसे लागू किया.

सीएनसीसीआई अध्यक्ष खेकुघा मुरु ने बताया कि कोहिमा, दीमापुर और मोकोकचुंग जैसे बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि तुली, जालुकी, फुटसेरो जैसे छोटे शहरों में भी बंद आहूत किया गया.

मुरु ने बताया कि संगठन ने नगा राजनीतिक समूहों द्वारा कई कर लगाने की समस्या को तत्काल हल करने और जीएसटी के तहत आने वाले सामान पर नगर निकाय द्वारा लिए जाने वाले सभी तरह के करों को हटाने को लेकर नौ सितंबर को मुख्यमंत्री को प्रतिवेदन दिया था, जिस पर राज्य सरकार का संतोषजनक जवाब न आने के विरोध में बंद का आह्वान किया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सीएनसीसीआई की मांगों के जवाब में राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों से विरोध प्रदर्शन को वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन ने फैसला किया है कि जीएसटी के तहत आने वाली वस्तुओं पर नगरपालिका और नगर परिषदों द्वारा किसी भी प्रकार के कर या शुल्क नहीं लगाया जाएगा. इसे तुरंत रोक दिया जाएगा.

यह भी कहा कि सभी शहरी स्थानीय निकायों के प्रशासक अपने-अपने शहरों या कस्बों के व्यापारिक समुदाय के प्रतिनिधियों को अपनी सलाहकार समितियों में शामिल करने के लिए कदम उठाएंगे, ताकि विभिन्न व्यवसाय संबंधी गतिविधियों के संबंध में निर्णय लिया जा सके.

नगा राजनीतिक समूहों द्वारा जबरन वसूली को रोकने की सीएनसीसीआई की मांग पर सरकार ने दीमापुर के पुलिस आयुक्त को तुरंत एक सुरक्षा ग्रिड लगाने और विभिन्न स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने सहित अन्य उपाय करने का निर्देश दिया, ताकि अवैध जबरन वसूली को रोका जा सके.

त्रिपुरा: पुलिस हिरासत में व्यक्ति की मौत का आरोप, न्यायिक जांच की मांग

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में डकैती और मादक पदार्थ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार 35 वर्षीय व्यक्ति की बुधवार को पुलिस हिरासत में मौत मामले में परिवार ने सोनमुरा पुलिस थाने में प्रताड़ित कर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया.

विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की. उप-संभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) बानुज बिप्लब दास ने बताया कि आरोपी जमाल हुसैन ने देर रात दो बजे सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे निकटतम सोनमुरा अस्पताल ले जाया गया.

दास ने बताया कि डॉक्टरों ने व्यक्ति को मेलाघर अस्पताल में भेजने की सलाह दी.

एसडीपीओ ने कहा, ‘हुसैन को इलाज के बाद मेलाघर अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उसे फिर सोनमुरा पुलिस थाना लाकर हवालात में बंद कर दिया गया. आरोपी इसके बाद सुबह कोठरी में मृत पाया गया, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिेए भेजा गया.’

उप जिलाधिकारी और मजिस्ट्रेट (डीसीएम) मानस भट्टाचार्य ने संवाददाताओं को बताया कि पुलिस ने उन्हें इस घटना के बारे में सुबह आठ बजे जानकारी दी.

हुसैन 2009 के एक डकैती मामले और 2016 के मादक पदार्थ संबंधी मामले में आरोपी था और पिछले चार वर्षों से दुबई में काम कर रहा था. वह हाल में दो महीने के लिए घर आया था. हुसैन की बहन अजुफा ख़ातून ने आरोप लगाया कि पुलिस थाने में उसके भाई को प्रताड़ित करके मार डाला गया.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मेरे भाई को कोई बीमारी नहीं थी. पुलिस इस मामले को निपटाने की कोशिश कर रही है. इस मामले की उचित जांच होनी चाहिए.’

हुसैन की बहन के आरोपों का समर्थन करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेता सुबल भौमिक ने कहा कि यह हिरासत में मौत का मामला है और इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए.

भौमिक ने कहा, ‘उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश को मामले को देखना चाहिए और अपराधी को जल्द से जल्द दर्ज किया जाना चाहिए.’

सिक्किमः विद्यार्थियों में कोविड संक्रमण बढ़ने के बाद फिर बंद किए गए स्कूल-कॉलेज

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

सिक्किम सरकार ने 11 सितंबर को ऐलान किया कि छात्रों के कोरोना संक्रमित होने के बाद राज्य में सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा सचिव जीपी उपाध्याय ने कहा, ‘राज्य के स्कूल और कॉलेज छह सितंबर को खुले थे. स्कूलों में नौंवी कक्षा से बारहवीं तक की कक्षाएं हो रही थीं. कुछ स्कूलों में पांच बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए, जिसके बाद शैक्षणिक संस्थानों को 31 अक्टूबर तक बंद करने का फैसला लिया गया.’

उपाध्याय ने कहा कि स्कूल और कॉलेज पचास फीसदी क्षमता के साथ खुल रहे थे और छात्र अपने परिजनों की सहमति के बाद ही स्कूल आ रहे थे.

बता दें कि छात्रों में कोरोना के मामले दक्षिण सिक्किम के नामथांग, पूर्वी सिक्किम में रेनॉक, पश्चिम सिक्किम में युकसम के सरकारी स्कूलों में दर्ज किए गए. इसके अलावा उत्तरी सिक्किम जिले के मंगन के एक निजी स्कूल में भी कोरोना का मामला दर्ज हुआ.

उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार बहुत चिंतित है कि अगर स्कूलों को बंद नहीं किया गया तो कोरोना के मामले बढ़ सकते हैं.’

असमः शॉर्ट्स पहनकर परीक्षा देने गई छात्रा पर्दा लपेटकर बैठने को मजबूर किया गया

असम के तेजपुर में एक प्रवेश परीक्षा देने के लिए शॉर्ट्स पहनकर पहुंची 19 साल की छात्रा को पैरों को पर्दों से ढककर परीक्षा देने के लिए मजबूर किया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बुधवार को उस समय हुई, जब 19 साल की जुबली तमुली जोरहाट के असम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (एएयू) की प्रवेश परीक्षा देने गई थी.

वह परीक्षा देने के लिए अपने पिता के साथ अपने गृहनगर बिश्वनाथ चरियाली से 70 किलोमीटर दूर तेजपुर गई थी. जुबली का कहना है कि वह अपने परीक्षा केंद्र गिरिजानंद चौधरी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल्स साइंसेज (जीआईपीएस) के अंदर बिना रुकावट पहुंच गई लेकिन परीक्षा हॉल पहुंचने पर उसे खासी परेशानी का सामना करना पड़ा.

जुबली ने बताया, ‘सुरक्षाकर्मियों ने मुझे परीक्षा केंद्र के भीतर जाने दिया लेकिन परीक्षा हॉल में निरीक्षक ने मुझे रोक लिया. उन्होंने कहा कि मैं शॉर्ट्स पहनकर अंदर नहीं जा सकती.’

जुबली के मुताबिक, ‘परीक्षा के एडमिट कार्ड में ड्रेस कोड का कोई जिक्र नहीं था. कुछ दिन पहले मैंने तेजपुर में ही नीट की परीक्षा भी शॉर्ट्स पहनकर ही दी थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ था. न ही एएयू में शॉर्ट्स पहनने को लेकर कोई नियम है और न ही इस संबंध में एडमिट कार्ड में कुछ लिखा गया है तो मुझे कैसे पता चलता?’

जुबली कहती है कि मुझसे शुरुआत में कहा गया कि मैं परीक्षा नहीं दे सकती. उन्होंने बताया, ‘मैं रोते हुए बाहर अपने पिता के पास गई. आखिरकर कंट्रोलर ऑफ एग्जाम्स ने कहा कि अगर एक जोड़ी पैंट का इंतजाम कर लिया जाए तो मैं परीक्षा दे सकती हूं. इस पर मेरे पिता पैंट खरीदने के लिए बाजार गए.’

जुबली का कहना है कि इस दौरान बहुत समय खराब हो गया और मैं बहुत ही अपमानित और उत्पीड़ित महसूस कर रही थी. जुबली के पिता परीक्षा केंद्र से लगभग आठ किलोमीटर दूर स्थित बाजार से पैंट लेने गए थे. इस बीच जुबली को उनके पैर ढकने के लिए पर्दे दिए गए.

जुबली ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे अपमानजक अनुभव बताते हुए कहा कि वह इस घटना के बारे में असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू को पत्र लिखने की सोच रही है.

हालांकि जुबली अपनी परीक्षा पूरी देने में सफल रही लेकिन उसका कहना है कि यह पूरी घटना बहुत तनावपूर्ण थी क्योंकि जब वह परीक्षा दे रही थी तो उसके पैर पर ढका पर्दा बार-बार फिसल रहा था. इस मामले पर जीआईपीएस के प्रिंसिपल डॉ. अब्दुल बाकी अहमद का कहना है कि वह घटना के समय कॉलेज में नहीं थे लेकिन इस घटना से वाकिफ हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमारा परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है. हमारे कॉलेज को सिर्फ परीक्षा स्थल के रूप में चुना गया था. यहां तक कि जिस परीक्षा निरीक्षक निरीक्षक ने छात्रा को रोका था वह भी बाहरी था. परीक्षा में शॉर्ट्स पहनने को लेकर कोई नियम नहीं है लेकिन परीक्षा के दौरान यह जरूरी है कि शिष्टाचार बना रहे. परिजनों को भी इसे बेहतर तरह से समझना चाहिए.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)